झारखंड की नई सहकारिता नीति तैयार, 1 करोड़ लोगों को जोड़ने का लक्ष्य
झारखंड सरकार की नई सहकारिता नीति का मसौदा तैयार
Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य की सहकारिता व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू कर दी है। नई सहकारिता नीति का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है, जिसके जरिए अगले कुछ वर्षों में करीब 1 करोड़ लोगों को सहकारिता आंदोलन से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस नीति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
नई नीति का उद्देश्य केवल सहकारी समितियों का विस्तार करना नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक, पारदर्शी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर राज्य के समग्र विकास में उनकी भूमिका को बढ़ाना भी है।
प्रस्तावित नीति में किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs), युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी, लघु वनोपज, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में नई सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और लोगों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
सरकार का लक्ष्य राज्य के लगभग 1 करोड़ नागरिकों को किसी न किसी रूप में सहकारी संस्थाओं से जोड़ना है। इसके लिए नई सदस्यता अभियान, डिजिटल पंजीकरण, प्रशिक्षण कार्यक्रम और वित्तीय सहायता जैसी व्यवस्थाओं को नीति में शामिल किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल होता है तो झारखंड देश के प्रमुख सहकारिता राज्यों में शामिल हो सकता है।
रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा
नई सहकारिता नीति का सबसे बड़ा उद्देश्य रोजगार के अवसर बढ़ाना है। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कृषि आधारित उद्योग, डेयरी यूनिट, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, प्रोसेसिंग सेंटर और ग्रामीण विपणन नेटवर्क विकसित किए जाएंगे।
इन परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
डिजिटल और पारदर्शी बनेगा सहकारिता तंत्र
नई नीति में सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। सदस्यता, लेखा-जोखा, वित्तीय लेन-देन और ऑडिट प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने की योजना है, ताकि पारदर्शिता बढ़े और भ्रष्टाचार की संभावना कम हो।
इसके अलावा समितियों के प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि मजबूत सहकारी व्यवस्था किसानों को बेहतर बीज, उर्वरक, ऋण, भंडारण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगी। इससे कृषि लागत कम होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय बाजार भी मजबूत होंगे और पलायन में कमी आने की उम्मीद है।
सहकारिता क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, यदि नीति का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया गया तो यह झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। हालांकि इसके लिए सहकारी संस्थाओं में सुशासन, समय पर ऑडिट, वित्तीय अनुशासन और सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।
आगे की प्रक्रिया
ड्राफ्ट नीति पर संबंधित विभागों, विशेषज्ञों और हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। आवश्यक संशोधनों के बाद इसे राज्य सरकार की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से नई सहकारिता नीति लागू की जाएगी।
नई नीति के लागू होने से झारखंड में सहकारिता आंदोलन को नई गति मिलने, ग्रामीण विकास को मजबूती मिलने और लाखों लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।