झारखंड में बालू कारोबार पर संकट, कम बारिश बनी वजह

Update: 2026-07-31 10:53 GMT

झारखंड: लातेहार जिले के बरवाडीह क्षेत्र में इस बार कम बारिश का असर अब बालू कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। मानसून के बावजूद क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण कोयल, धड़धड़ी समेत अन्य नदियों में सामान्य बाढ़ की स्थिति नहीं बन पाई है। इसके चलते नदियों में बालू का प्राकृतिक पुनर्भरण नहीं हो सका है। कारोबारियों को आशंका है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो अगले सीजन में बालू की उपलब्धता में भारी कमी आ सकती है, जिसका सीधा असर निर्माण कार्यों और हजारों लोगों की आजीविका पर पड़ेगा।

बरवाडीह क्षेत्र में हर साल मानसून के दौरान पहाड़ी इलाकों से बहकर आने वाली मिट्टी और रेत नदियों में जमा होती है। तेज जल प्रवाह के कारण नदी के तल में नई बालू की परत तैयार होती है, जो अगले साल निर्माण कार्यों के लिए प्रमुख स्रोत बनती है। लेकिन इस बार कम वर्षा के कारण नदियों में जलस्तर अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया और बाढ़ जैसी स्थिति भी देखने को नहीं मिली। इससे बालू जमा होने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

स्थानीय बालू कारोबारियों के अनुसार, नदियों से लगातार बालू का उठाव होता रहता है। ऐसे में यदि बरसात के मौसम में पर्याप्त मात्रा में नया बालू जमा नहीं हुआ तो आने वाले समय में इसकी कमी होना तय है। इससे न सिर्फ निर्माण कार्य प्रभावित होंगे, बल्कि इस व्यवसाय से जुड़े हजारों मजदूरों, ट्रैक्टर और वाहन चालकों सहित छोटे कारोबारियों की आय पर भी संकट मंडरा सकता है।

बालू कारोबार क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। नदी घाटों से बालू निकालने, उसकी ढुलाई और बिक्री तक कई लोगों की रोजी-रोटी निर्भर रहती है। बालू की कमी होने पर निर्माण सामग्री महंगी हो सकती है, जिससे मकान निर्माण और अन्य विकास परियोजनाओं की लागत बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

कारोबारियों का कहना है कि अब उनकी उम्मीदें मानसून की आने वाली बारिश पर टिकी हुई हैं। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है और नदियों में तेज बहाव आता है तो प्राकृतिक रूप से बालू का जमाव दोबारा शुरू हो सकता है। इससे अगले सीजन में होने वाली संभावित कमी को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि बालू जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए संतुलित खनन बेहद जरूरी है। जरूरत से ज्यादा बालू उठाव से नदियों के पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ सकता है। इसलिए बारिश, जल प्रवाह और खनन गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल बनाना आवश्यक है।

बरवाडीह के अंचलाधिकारी लवकेश सिंह ने बताया कि नदी में बालू का प्राकृतिक पुनर्भरण पूरी तरह बारिश और जल प्रवाह पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि बालू खनन सरकार के निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। इससे नदियों का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के साथ भविष्य के लिए बालू जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों का संरक्षण भी किया जा सकेगा।

फिलहाल बरवाडीह क्षेत्र के बालू कारोबारी और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कम बारिश से पैदा हुए इस संकट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह केवल प्रकृति की मार है या फिर संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की कमी भी इसकी वजह है। आने वाला समय ही बताएगा कि मानसून की स्थिति बालू कारोबार को राहत दे पाती है या नहीं।

Tags:    

Similar News