टाटा स्टील की ब्रिटेन सरकार को चेतावनी, सस्ते आयात से प्लांट बंद होने का खतरा, हजारों नौकरियों पर संकट
नई दिल्ली/जमशेदपुर। भारतीय इस्पात क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा स्टील ने ब्रिटेन सरकार को चेतावनी दी है कि नई आयात नीति और एशियाई देशों से आने वाले सस्ते स्टील के कारण उसके ब्रिटिश प्लांट गंभीर आर्थिक संकट में फंस सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि यदि सरकार ने अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो दक्षिण वेल्स स्थित उसके प्लांटों का संचालन मुश्किल हो सकता है और हजारों कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
टाटा स्टील की यह चिंता ब्रिटेन सरकार की नई टैरिफ कोटा व्यवस्था लागू होने के बाद सामने आई है। इस नीति का उद्देश्य चीन, भारत और वियतनाम जैसे देशों से आने वाले सस्ते स्टील आयात को नियंत्रित करना था, लेकिन कंपनी का कहना है कि कुछ श्रेणियों में आयात सीमा बढ़ाए जाने से घरेलू स्टील उद्योग पर दबाव बढ़ गया है।
कंपनी के अनुसार गैल्वनाइज्ड स्टील यानी जस्ता लेपित स्टील की श्रेणी में नई व्यवस्था से बड़ी चुनौती पैदा हुई है। इस श्रेणी में वियतनाम के लिए वार्षिक आयात कोटा 51 हजार टन से बढ़ाकर करीब 1.74 लाख टन कर दिया गया है। वहीं भारत के लिए भी कोटा बढ़ाकर लगभग 1.25 लाख टन सालाना कर दिया गया है। टाटा स्टील का मानना है कि इससे ब्रिटेन के घरेलू निर्माताओं को सस्ते विदेशी स्टील से कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी।
टाटा स्टील का दक्षिण वेल्स स्थित लैनवर्न प्लांट इस चुनौती का सामना कर रहा है। यह प्लांट हर साल लगभग 6 लाख टन गैल्वनाइज्ड स्टील का उत्पादन करता है। कंपनी का कहना है कि यदि बाजार में सस्ते आयातित स्टील की मात्रा बढ़ती है तो घरेलू उत्पादों की मांग घट सकती है और प्लांट को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कंपनी ने ब्रिटिश सरकार से मांग की है कि आयात नीति में संतुलन बनाया जाए ताकि घरेलू स्टील उद्योग को नुकसान न पहुंचे। टाटा स्टील का कहना है कि ब्रिटेन में पर्यावरण नियमों का पालन करने के कारण घरेलू उत्पादन की लागत ज्यादा है, जबकि कई आयातित उत्पादों पर समान स्तर के पर्यावरण मानक लागू नहीं होते। इससे बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन रही है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा स्टील ब्रिटेन में अपने कारोबार को बड़े बदलाव के दौर से गुजार रही है। कंपनी ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य के तहत पोर्ट टालबोट स्थित अपने पुराने ब्लास्ट फर्नेस को बंद कर दिया है। इसके स्थान पर करीब 1.25 अरब पाउंड यानी लगभग 13,500 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस लगाया जा रहा है।
यह नई तकनीक स्क्रैप मेटल का इस्तेमाल करके ग्रीन स्टील तैयार करेगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि कंपनी का कहना है कि इस बदलाव के बीच सस्ते विदेशी आयात का दबाव ब्रिटेन में उसके निवेश और भविष्य की योजनाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
ब्रिटेन के स्टील उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नई आयात व्यवस्था में बदलाव के पीछे कई व्यापारिक और कूटनीतिक कारण हो सकते हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे भारत और ब्रिटेन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से जोड़कर भी देख रहे हैं।
टाटा स्टील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश नायर ने भी चिंता जताई है कि मौजूदा आयात कोटा बाजार की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि घरेलू कंपनियां सख्त पर्यावरण नियमों और उत्पादन लागत के कारण दबाव में हैं, जबकि आयातित स्टील को समान परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
कंपनी ने साफ किया है कि उसका उद्देश्य ब्रिटेन में अपने संचालन को मजबूत बनाए रखना है, लेकिन इसके लिए निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था जरूरी है। अब नजर ब्रिटेन सरकार के फैसले पर है कि वह घरेलू स्टील उद्योग और विदेशी आयात के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।