गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ करेगी CID

Update: 2026-07-23 13:50 GMT

झारखंड: लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में सीआईडी ने जांच तेज कर दी है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गुरुवार को सीआईडी की अलग-अलग टीमों ने एक साथ तीन प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते का आवास, जेपीएससी कार्यालय और परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) का कार्यालय शामिल है।

सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। अब इन सभी डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की छेड़छाड़, डेटा में बदलाव या ओएमआर शीट से जुड़ी गड़बड़ी हुई है या नहीं।

सीआईडी की एक टीम ने कांके रोड स्थित एल. खियांग्ते के आवास की तलाशी ली, जबकि दूसरी टीम ने जेल चौक स्थित जेपीएससी कार्यालय में दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। वहीं तीसरी टीम ने परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी टीडीपीएल के कार्यालय में पहुंचकर जरूरी रिकॉर्ड खंगाले। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे थे। आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में ओएमआर शीट, कटऑफ निर्धारण और परिणाम तैयार करने में गड़बड़ी हुई। शिकायतों के बाद सीआईडी ने मामले की जांच शुरू की और शुरुआती जांच के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

इस मामले में सीआईडी ने पहले ही पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह और एजेंसी से जुड़े दो अन्य कर्मचारी उस्मान और एबाद शामिल हैं।

अब सीआईडी इन सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी शुक्रवार को अदालत में रिमांड आवेदन दाखिल करेगी। रिमांड मिलने के बाद आरोपियों से परीक्षा में कथित गड़बड़ी, दस्तावेजों में हेरफेर और अन्य संभावित कड़ियों के बारे में पूछताछ की जाएगी।

सीआईडी का मानना है कि इस मामले में कई और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। जांच का दायरा अब जेपीएससी के अधिकारियों, परीक्षा संचालन एजेंसी और अन्य संबंधित लोगों तक बढ़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार, अगर जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण उपाय) अधिनियम 2023 के तहत भी कार्रवाई की जा रही है। सीआईडी डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

जेपीएससी जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा में कथित गड़बड़ी ने अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। छात्र लगातार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब सीआईडी की आगे की जांच और रिमांड पर होने वाली पूछताछ से इस मामले में नए खुलासे होने की उम्मीद है।

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