किसानों के लिए खुशखबरी! मडुआ की खेती पर प्रोत्साहन, सोलर पंप पर मिलेगी भारी सब्सिडी
JHARKHAND : किसानों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल शुरू की है। राज्य में मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने के लिए मडुआ (रागी) की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि देने की योजना बनाई गई है। इसके तहत किसानों को मडुआ उत्पादन के लिए ₹3000 तक की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही सिंचाई सुविधा को मजबूत करने के लिए किसानों को 97 प्रतिशत तक सब्सिडी पर सोलर पंप सेट उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू की गई है।
सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को बढ़ावा देना और खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है। मडुआ जैसी पारंपरिक फसलें झारखंड के कई क्षेत्रों में पहले से उगाई जाती रही हैं और अब इन्हें व्यावसायिक रूप देने की तैयारी की जा रही है।
मडुआ की खेती को क्यों दिया जा रहा है बढ़ावा?
मडुआ यानी रागी को पोषक तत्वों से भरपूर अनाज माना जाता है। इसमें कैल्शियम, फाइबर, आयरन और अन्य जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। बदलती जीवनशैली के कारण देशभर में मिलेट्स की मांग बढ़ रही है।
मडुआ की खासियत यह है कि—
यह कम पानी में भी अच्छी तरह उग सकता है।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी इसकी खेती संभव है।
किसानों के लिए कम लागत वाली फसल साबित हो सकती है।
बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
इसी को देखते हुए सरकार किसानों को इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
किसानों को मिलेगी ₹3000 की प्रोत्साहन राशि
राज्य सरकार की योजना के तहत मडुआ की खेती करने वाले पात्र किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को बीज, खेती की तैयारी और अन्य कृषि कार्यों में मदद मिलेगी।
प्रोत्साहन राशि मिलने से किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ लाभकारी फसलों की ओर भी आकर्षित होंगे।
97% सब्सिडी पर मिलेगा सोलर पंप सेट
खेती में सबसे बड़ी चुनौती सिंचाई की होती है। इसे देखते हुए झारखंड सरकार किसानों को सोलर पंप सेट उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है।
इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप की लागत पर भारी सब्सिडी दी जाएगी। करीब 97 प्रतिशत तक सहायता मिलने से किसानों को अपनी जेब से बहुत कम राशि खर्च करनी होगी।
सोलर पंप के फायदे—
बिजली बिल से राहत।
डीजल पर निर्भरता कम होगी।
सिंचाई सुविधा बेहतर होगी।
पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा।
लंबे समय में किसानों की लागत घटेगी।
छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा फायदा
झारखंड में बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसान खेती पर निर्भर हैं। ऐसे किसानों के लिए सोलर सिंचाई व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
मडुआ जैसी फसल के साथ यदि किसान आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाते हैं तो उत्पादन और आय दोनों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है।
सरकार का मिलेट मिशन पर जोर
केंद्र और राज्य सरकारें पिछले कुछ वर्षों से मोटे अनाजों को बढ़ावा दे रही हैं। इसका उद्देश्य किसानों को वैकल्पिक फसलें उपलब्ध कराना और पोषण सुरक्षा को मजबूत करना है।
झारखंड में मडुआ, कोदो, बाजरा और अन्य मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को संबंधित कृषि विभाग या ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना पड़ सकता है। पात्रता, दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी स्थानीय कृषि कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।
आमतौर पर किसानों को इन दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ सकती है—
आधार कार्ड।
बैंक खाता विवरण।
जमीन से जुड़े दस्तावेज।
किसान पंजीकरण।
मोबाइल नंबर।
(योजना के नियमों के अनुसार दस्तावेजों में बदलाव संभव है।)
खेती में बदलाव ला सकती है योजना
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को आर्थिक सहायता और सिंचाई जैसी सुविधाएं मिलती हैं तो वे कम जोखिम वाली फसलों की ओर बढ़ सकते हैं। इससे न केवल किसानों की आय में सुधार होगा बल्कि राज्य में मिलेट उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।