BJP नेता एम.के. प्राणेश ने विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा

Update: 2026-08-01 08:12 GMT

बेंगलुरु। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता एम.के. प्राणेश ने कर्नाटक विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी को सौंप दिया है और इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है।

एम.के. प्राणेश ने अपने इस्तीफा पत्र में कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से कर्नाटक विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन और विधायक पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। उन्होंने सभापति से उनका इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया।

प्राणेश का यह फैसला कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें 2021 के विधान परिषद चुनाव में चिक्कमगलुरु निर्वाचन क्षेत्र से उनके चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया गया था।

हाई कोर्ट ने रद्द किया था चुनाव

कर्नाटक हाई कोर्ट ने बीजेपी उम्मीदवार एम.के. प्राणेश के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया था। न्यायमूर्ति एस.जी. पंडित की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने गायत्री शांतेगौड़ा की ओर से दायर चुनाव विवाद याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया।

याचिका में प्राणेश के चुनाव को चुनौती दी गई थी। कोर्ट के फैसले के बाद उनके पद पर बने रहने को लेकर स्थिति बदल गई, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।

इस्तीफा पत्र में क्या कहा

अपने पत्र में एम.के. प्राणेश ने लिखा कि उन्होंने विधान परिषद के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन और सदस्य पद से इस्तीफा दे रहे हैं।

उन्होंने पत्र में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इस्तीफा स्वीकार करने की अपील की।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

प्राणेश के इस्तीफे के बाद कर्नाटक की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। बीजेपी नेता के तौर पर प्राणेश लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और विधान परिषद में डिप्टी चेयरमैन जैसे महत्वपूर्ण पद पर थे।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद उनका इस्तीफा राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब विधान परिषद में डिप्टी चेयरमैन पद को लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

चुनाव विवाद के बाद बढ़ी मुश्किलें

एम.के. प्राणेश का चुनाव 2021 में चिक्कमगलुरु निर्वाचन क्षेत्र से हुआ था। इसके बाद उनके निर्वाचन को लेकर विवाद खड़ा हुआ और मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

गायत्री शांतेगौड़ा की ओर से दायर चुनाव याचिका में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाया गया था। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद प्राणेश के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया।

हालांकि, कोर्ट के फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित विकल्पों को लेकर भी चर्चा जारी है।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन पद से इस्तीफे के बाद अब नए पदाधिकारी के चयन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही में डिप्टी चेयरमैन का पद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, प्राणेश का इस्तीफा बीजेपी के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, क्योंकि पार्टी को अब विधान परिषद में इस पद के लिए नए चेहरे पर विचार करना होगा।

फिलहाल एम.के. प्राणेश के इस्तीफे के बाद सभी की नजर राज्य की राजनीतिक गतिविधियों और आगे होने वाली नियुक्तियों पर बनी हुई है।

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