खाद्य सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं, नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई: यू. टी. खादर
मंगलौर। कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई के नियमों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। स्वास्थ्य मंत्री यू. टी. खादर ने कहा है कि मामला छोटा हो या बड़ा, खाद्य सुरक्षा जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों का स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है और खाने की गुणवत्ता तथा स्वच्छता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मंगलौर में फास्ट-फूड आउटलेट्स की अचानक जांच के दौरान खादर ने खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए पूरे राज्य में खाद्य पदार्थ बनाने, बेचने और वितरित करने वाले प्रतिष्ठानों की पहचान कर उनकी जांच की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य किसी व्यवसाय या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है।
खादर ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों को बताया जाए कि उनकी व्यवस्था में क्या गलत है और उपभोक्ताओं को भी वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई की कमी और भोजन की गुणवत्ता से समझौता किए जाने की गंभीर शिकायतें सामने आने के बाद राज्यभर में खाद्य प्रतिष्ठानों की तलाशी और विस्तृत जांच शुरू की गई है।
सरकार का जोर उन प्रतिष्ठानों पर है जहां बड़ी संख्या में लोग रोजाना खाना खाते या खाद्य सामग्री खरीदते हैं। इसमें फास्ट-फूड आउटलेट्स के साथ होटल, रेस्तरां और भोजन तैयार करने या वितरित करने वाले अन्य प्रतिष्ठान शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनके सुरक्षित तरीके से रखरखाव जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
मंगलौर में की गई अचानक जांच को भी इसी राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा बताया गया है। बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण का उद्देश्य प्रतिष्ठानों में रोजमर्रा की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। अगर जांच की जानकारी पहले मिल जाए तो प्रतिष्ठान अस्थायी रूप से व्यवस्था सुधार सकते हैं, जबकि अचानक निरीक्षण से सामान्य दिनों में अपनाई जा रही स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
खादर ने स्पष्ट किया कि जांच अभियान किसी के प्रति नाराजगी या व्यक्तिगत कारण से नहीं चलाया जा रहा है। इसका मकसद सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा कि खाद्य कारोबारियों को नियमों का पालन करना होगा और उपभोक्ताओं की सेहत को खतरे में डालने वाली लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
खाद्य सुरक्षा का मुद्दा सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। खराब गुणवत्ता वाली सामग्री, अस्वच्छ रसोई, दूषित पानी या गलत तरीके से रखे गए खाद्य पदार्थ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। विशेष रूप से फास्ट-फूड और तैयार भोजन के मामले में स्वच्छता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्राहकों को भोजन परोसा जाता है।
सरकार की सख्ती का उद्देश्य खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में जवाबदेही बढ़ाना भी है। खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली जगह की साफ-सफाई से लेकर सामग्री की गुणवत्ता तक हर स्तर पर निर्धारित मानकों का पालन जरूरी है। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि कार्रवाई प्रतिष्ठान के आकार या प्रभाव को देखकर नहीं होगी। छोटा फूड आउटलेट हो या बड़ा कारोबारी प्रतिष्ठान, खाद्य सुरक्षा के नियम सभी के लिए समान हैं। जांच में गंभीर खामियां मिलने पर किसी को केवल इसलिए राहत नहीं दी जाएगी कि उसका कारोबार बड़ा है या वह किसी विशेष क्षेत्र में प्रभाव रखता है।
इस अभियान का एक पहलू जागरूकता से भी जुड़ा है। सरकार चाहती है कि खाद्य कारोबारियों को उनकी कमियों के बारे में जानकारी मिले और वे निर्धारित मानकों के अनुरूप सुधार करें। साथ ही उपभोक्ताओं को भी यह जानने का अधिकार है कि उन्हें दिया जा रहा भोजन किस तरह की परिस्थितियों में तैयार किया जा रहा है।
राज्यव्यापी निरीक्षण से सरकार को अलग-अलग क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा की स्थिति का आकलन करने में भी मदद मिलेगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किन इलाकों या किस तरह के प्रतिष्ठानों में सबसे अधिक खामियां सामने आ रही हैं। इसके आधार पर आगे निरीक्षण, जागरूकता और प्रवर्तन की रणनीति तैयार की जा सकती है।
खादर ने स्वस्थ समाज के निर्माण को इस अभियान का व्यापक उद्देश्य बताया। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ बीमारियों से बचाव पर भी ध्यान देना जरूरी है। सुरक्षित और स्वच्छ भोजन इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है।
खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिलने पर समय रहते जांच जरूरी होती है। दूषित या खराब भोजन से होने वाली बीमारी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती। किसी रेस्तरां या आउटलेट में बड़ी संख्या में ग्राहकों को एक ही तरह का दूषित भोजन परोसा जाए तो इसका असर कई लोगों पर एक साथ पड़ सकता है। इसी कारण खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन जरूरी माना जाता है।
मंगलौर में फास्ट-फूड आउटलेट्स के निरीक्षण के दौरान मंत्री के सख्त संदेश से साफ है कि राज्य सरकार इस अभियान को आगे भी जारी रखने के मूड में है। नियमों का पालन करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए जांच चिंता का विषय नहीं होनी चाहिए, लेकिन स्वच्छता और गुणवत्ता में लापरवाही बरतने वालों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने इस अभियान को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य किसी व्यवसाय को परेशान करना नहीं है। खाद्य प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों को साफ-सुथरे वातावरण में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराएं। वहीं सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी इन मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
मंगलौर से दिए गए संदेश में खादर ने साफ कर दिया कि खाद्य सुरक्षा के मामले में सरकार की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की रहेगी। राज्यभर में जारी जांच के दौरान सामने आने वाली कमियों को संबंधित प्रतिष्ठानों के सामने रखा जाएगा और गंभीर उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि लोगों की सेहत सर्वोपरि है और इसे खतरे में डालने वाली किसी भी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।