गदग। कर्नाटक के गदग जिले के छोटे से होमबल गांव से निकलकर भारतीय सेना में अपनी अलग पहचान बनाने वाली कर्नल सुपुत्री कुलकर्णी ने नई उपलब्धि हासिल की है। उन्हें बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) के ‘प्रोजेक्ट चेतक’ के तहत टास्क फोर्स 45 की पहली महिला कमांडर नियुक्त किया गया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने न केवल अपने परिवार और गृह जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की उन युवतियों के लिए भी प्रेरणा पेश की है जो सेना और अन्य चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में करियर बनाने का सपना देखती हैं।

कर्नल सुपुत्री कुलकर्णी की नियुक्ति इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने BRO के प्रोजेक्ट चेतक में टास्क फोर्स 45 की पहली महिला कमांडर के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन देश के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में रणनीतिक महत्व की सड़क तथा अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम करता है। ऐसे में किसी टास्क फोर्स की कमान संभालना बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है।

सुपुत्री कुलकर्णी का जन्म 26 मई 1989 को हुआ। वह गदग के पास स्थित होमबल गांव के रंगनाथ कुलकर्णी और गीता की सबसे बड़ी बेटी हैं। उनकी पारिवारिक कहानी भी सेना और देश सेवा से गहराई से जुड़ी हुई है। सुपुत्री की छोटी बहन संप्रीता कुलकर्णी भी भारतीय सेना में कार्यरत हैं और मेजर के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। एक ही परिवार की दोनों बेटियों का भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवा देना क्षेत्र के लिए गर्व की बात मानी जा रही है।

सुपुत्री का बचपन और शुरुआती शिक्षा गदग में हुई। उन्होंने टोंटादार्य, सेंट जॉन्स और विद्यादान स्कूलों से अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पूरी की। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को सीमित नहीं होने दिया और शिक्षा के साथ आगे बढ़ते हुए सेना में करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए।

उनके जीवन में वर्ष 2003 बेहद कठिन समय लेकर आया, जब उनकी मां का निधन हो गया। इसके बाद पिता रंगनाथ कुलकर्णी के कंधों पर दोनों बेटियों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी आ गई। उन्होंने अकेले ही बच्चों की देखभाल और शिक्षा की जिम्मेदारी संभाली और दोनों बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

परिवार के सामने आई कठिन परिस्थितियों के बावजूद सुपुत्री ने अपनी पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा। लगन, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने भारतीय सेना में अपनी जगह बनाई। सेना में अधिकारी बनने के बाद उन्हें विभिन्न जिम्मेदारियां मिलीं और अब कर्नल के रूप में BRO के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में टास्क फोर्स की कमान सौंपे जाने से उनकी उपलब्धियों में नया अध्याय जुड़ गया है।

BRO की जिम्मेदारियां सामान्य निर्माण परियोजनाओं से काफी अलग होती हैं। संगठन को अक्सर कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और रणनीतिक रूप से संवेदनशील स्थानों पर सड़कें तथा अन्य आधारभूत संरचना तैयार करने में BRO की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

ऐसे वातावरण में टास्क फोर्स का नेतृत्व करने के लिए प्रशासनिक क्षमता के साथ तकनीकी समझ, टीम मैनेजमेंट और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता जरूरी होती है। कर्नल सुपुत्री कुलकर्णी को टास्क फोर्स 45 की कमान मिलना उनके सैन्य करियर में अर्जित अनुभव और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।

उनकी उपलब्धि महिला सशक्तिकरण के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। महिलाएं अब कई ऐसे क्षेत्रों में नेतृत्वकारी जिम्मेदारियां संभाल रही हैं, जिन्हें कभी मुख्य रूप से पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था। कर्नल कुलकर्णी की नई जिम्मेदारी इस बदलती तस्वीर का एक और उदाहरण है।

विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों के लिए उनकी यात्रा प्रेरणादायक है। छोटे गांवों में रहने वाले कई युवाओं के सामने संसाधनों और अवसरों से जुड़ी चुनौतियां होती हैं। इसके बावजूद सही मार्गदर्शन, शिक्षा और दृढ़ इच्छाशक्ति के जरिए बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। सुपुत्री कुलकर्णी ने अपनी सफलता से इसी संदेश को मजबूत किया है।

उनका सफर यह भी बताता है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि या महिला होना सफलता की राह में बाधा नहीं होना चाहिए। होमबल जैसे गांव से निकलकर भारतीय सेना में कर्नल बनने और फिर BRO की महत्वपूर्ण टास्क फोर्स की पहली महिला कमांडर बनने तक का उनका सफर कई युवाओं को अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।

सुपुत्री की छोटी बहन संप्रीता का भी भारतीय सेना में मेजर होना परिवार के लिए दोहरी उपलब्धि है। दोनों बहनों ने रक्षा सेवाओं को अपना करियर चुना और अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रही हैं। इसके पीछे उनके पिता रंगनाथ कुलकर्णी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने पत्नी के निधन के बाद दोनों बेटियों की परवरिश और शिक्षा की जिम्मेदारी अकेले संभाली।

कर्नल सुपुत्री की उपलब्धि से गदग जिले और उनके गृह गांव होमबल में भी गर्व का माहौल है। स्थानीय स्तर पर उनकी सफलता को इस बात के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है कि छोटे शहरों और गांवों से आने वाले युवा भी देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं में सर्वोच्च जिम्मेदारियों तक पहुंच सकते हैं।

BRO के प्रोजेक्ट चेतक का काम सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा विकसित करने से जुड़ा है। टास्क फोर्स 45 की कमान संभालते हुए कर्नल कुलकर्णी को परियोजनाओं के क्रियान्वयन, कर्मचारियों के नेतृत्व और कठिन परिस्थितियों में कार्य संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होंगी।

उनकी नियुक्ति से रक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़े क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का संदेश भी मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना और अन्य रक्षा संगठनों में महिला अधिकारियों को अधिक जिम्मेदारियां मिलने का दायरा बढ़ा है। नेतृत्वकारी भूमिकाओं में महिलाओं की मौजूदगी नई पीढ़ी के लिए अवसरों के नए रास्ते खोल रही है।

कर्नल सुपुत्री कुलकर्णी की कहानी व्यक्तिगत सफलता से आगे संघर्ष, पारिवारिक सहयोग और दृढ़ संकल्प की कहानी भी है। कम उम्र में मां को खोने, ग्रामीण पृष्ठभूमि से आगे बढ़ने और सैन्य जीवन की चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल किया।

अब प्रोजेक्ट चेतक के तहत टास्क फोर्स 45 की पहली महिला कमांडर के रूप में उनकी उपलब्धि ने कर्नाटक के गदग जिले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। उनकी सफलता खासकर ग्रामीण युवतियों को यह संदेश देती है कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, शिक्षा, मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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