कलबुर्गी। कर्नाटक सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। शनिवार को कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने पूछा कि भागवत को एडवांस सिक्योरिटी लाइजन यानी एएसएल जैसी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए कौन से मानदंड अपनाए गए हैं और इसका खर्च किसके द्वारा वहन किया जा रहा है।
प्रियांक खरगे ने कहा कि एएसएल से जुड़ी व्यवस्था सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और विदेश मंत्रालय से संबंधित उच्च पदस्थ लोगों के दौरों के दौरान देखने को मिलती है। उन्होंने दावा किया कि मोहन भागवत को भी इसी स्तर से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। खरगे ने कहा कि यदि इस सुरक्षा का खर्च करदाताओं के पैसे से उठाया जा रहा है तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि इसके पीछे क्या आधार और खतरे का आकलन है।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि कलबुर्गी के लोगों के टैक्स का पैसा मोहन भागवत की सुरक्षा पर खर्च किया जा रहा है तो संबंधित एजेंसियों को इसके मानदंड सार्वजनिक करने चाहिए। हालांकि किसी व्यक्ति को सुरक्षा उपलब्ध कराने का फैसला सामान्यतः केंद्रीय अथवा राज्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा खतरे के आकलन के आधार पर किया जाता है। इस तरह के मूल्यांकन का पूरा विवरण सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किया जाता।
खरगे ने कर्नाटक में आरएसएस की ओर से निकाले जाने वाले रूट मार्च का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब संगठन के कार्यक्रम या रूट मार्च आयोजित होते हैं, तब कर्नाटक पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में कर्मियों की तैनाती करती है। इससे पहले भी खरगे आरएसएस की कानूनी स्थिति, वित्तीय व्यवस्था और उसकी गतिविधियों को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि राज्य का मंत्री होने के नाते उन्हें यह जानने का अधिकार है कि पुलिस किन संगठनों और कार्यक्रमों को सुरक्षा उपलब्ध करा रही है।
प्रियांक खरगे ने कर्नाटक में विपक्ष के एक नेता की कथित चेतावनी का भी जिक्र किया। उनके अनुसार विपक्षी नेता ने कहा था कि यदि वह आरएसएस के खिलाफ बोलते रहे तो उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा। खरगे ने इस कथित बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या उन्हें गोली मारने या उनकी हत्या करने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने अपने बयान में महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए।
खरगे ने आरएसएस के लिए आतंकवादी संगठन जैसे शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि विरोधी नेताओं की धमकियां उनके आरोपों को साबित करती हैं। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है। आरएसएस को भारत सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित नहीं किया है और खरगे ने अपने बयान के समर्थन में किसी न्यायिक निर्णय या आधिकारिक अधिसूचना का उल्लेख नहीं किया। उनके ताजा आरोपों पर आरएसएस की विस्तृत प्रतिक्रिया तत्काल सामने नहीं आई है।
कांग्रेस और आरएसएस के बीच यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब मोहन भागवत ने शनिवार को नागपुर में युवाओं के साथ संवाद किया। लोकमत मीडिया समूह द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने युवाओं को भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो देश को इसका बड़ा लाभ होगा, लेकिन उनका उचित उपयोग नहीं होने पर भविष्य में सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
भागवत ने कहा कि रोजगार का अर्थ केवल सरकारी अथवा निजी नौकरी नहीं है। मेहनत मजदूरी और दूसरे प्रकार के काम करने वाले लोग भी आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं तथा उनके श्रम का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से केवल वर्तमान जरूरतों के बारे में नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के हितों पर भी विचार करने की अपील की।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज के युवा लगभग 30 वर्ष बाद उम्रदराज हो जाएंगे। इसलिए उन्हें ऐसा समाज और व्यवस्था तैयार करने में योगदान देना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी हो। उन्होंने भारत की परिस्थितियों के अनुरूप विकास का मॉडल और सोच विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भागवत ने कहा कि भारत को अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया या दूसरे देशों के विकास मॉडल की नकल करने के बजाय अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर मानदंड बनाने चाहिए। उनके अनुसार भारत के पास विश्व को संतुलन और भविष्य की दिशा दिखाने की क्षमता है।
एक तरफ भागवत युवाओं, रोजगार और राष्ट्र निर्माण पर अपने विचार रख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रियांक खरगे ने उनकी सुरक्षा और आरएसएस की गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। अब निगाहें केंद्र सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और आरएसएस की संभावित प्रतिक्रिया पर रहेंगी।