गन्ना किसानों के आंदोलन से कर्नाटक में संकट गहराया, CM शिवकुमार ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
बेंगलुरु। कर्नाटक में गन्ना किसानों के आंदोलन और पेराई सीजन शुरू होने में हो रही देरी के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गन्ने के उचित मूल्य, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और एथेनॉल से संबंधित किसानों की मांगों का जल्द समाधान करने का अनुरोध किया। उन्होंने चेताया कि उत्तरी कर्नाटक में जारी विरोध प्रदर्शनों के कारण चीनी मिलों में पेराई का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। खेतों में तैयार गन्ने की फसल खड़ी है और लगातार देरी होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में बताया कि उत्तरी कर्नाटक के कई इलाकों में किसान आंदोलन कर रहे हैं। विभिन्न कस्बों से किसान पदयात्रा करते हुए हुबली की ओर बढ़ रहे हैं। उनका उद्देश्य केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव करना है। कई स्थानों पर सड़कें अवरुद्ध होने से आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पत्र में कहा कि गन्ना किसानों की प्रमुख मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया, ताकि किसान आंदोलन समाप्त करने पर विचार कर सकें और चीनी मिलों में पेराई शुरू हो सके।
मुख्यमंत्री के अनुसार, आंदोलन के कारण किसानों के साथ चीनी उद्योग भी प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में आवश्यक कदम उठा रही है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के लिए केंद्र सरकार का सहयोग जरूरी है।
हुबली की ओर पदयात्रा कर रहे किसान
उत्तरी कर्नाटक के विभिन्न जिलों में गन्ना उत्पादक किसान लंबे समय से उचित मूल्य की मांग कर रहे हैं।
कई स्थानों से किसान हुबली की ओर पदयात्रा निकाल रहे हैं।
उनकी योजना केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास के सामने विरोध प्रदर्शन करने की है।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री के आवास पर प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के निर्देश दिए हैं।
आंदोलन के कारण कई स्थानों पर यातायात भी प्रभावित हुआ है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि लगातार सड़कें अवरुद्ध होने से आम नागरिकों को परेशानी हो रही है।
17 अक्टूबर को किसानों से मिले थे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि वह 17 अक्टूबर को बेलगावी जिले के कित्तूर पहुंचे थे।
वहां उन्होंने प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
मुख्यमंत्री ने किसानों से पदयात्रा वापस लेने तथा बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की अपील की।
हालांकि, किसानों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया।
किसानों का कहना था कि जब तक केंद्र सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शिवकुमार ने किसानों और चीनी मिल संचालकों के साथ बैठक आयोजित करने का आश्वासन भी दिया था।
पेराई सीजन शुरू नहीं होने से बढ़ी चिंता
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि उत्तरी कर्नाटक में गन्ने की पेराई का सीजन समय पर शुरू नहीं हो पाया है।
खेतों में बड़ी मात्रा में तैयार गन्ना खड़ा है।
गन्ने की कटाई और पेराई में देरी होने से उसका वजन और चीनी की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ने की आशंका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में किसानों की समस्याओं का समाधान करना अत्यंत आवश्यक है।
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सामने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन की मांग रखी है।
उन्होंने कहा कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलोग्राम बना हुआ है।
इस बीच गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी हुई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, गन्ने की लागत बढ़ने के बावजूद चीनी का बिक्री मूल्य स्थिर रहने से मिलों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने घरेलू उपभोक्ताओं और व्यावसायिक खरीदारों के लिए अलग-अलग न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करने का प्रस्ताव भी रखा है।
एथेनॉल नीति की समीक्षा का अनुरोध
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने एथेनॉल खरीद नीति से संबंधित मुद्दे भी उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि 16 अक्टूबर को तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी एथेनॉल आपूर्ति निविदा में गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी मोलासेस से तैयार एथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे कर्नाटक की चीनी मिलों की आय प्रभावित हो सकती है।
राज्य में गन्ना आधारित एथेनॉल उत्पादन की स्थापित क्षमता लगभग 225 करोड़ लीटर सालाना है।
उन्होंने केंद्र से एथेनॉल खरीद में उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करने और गन्ना आधारित एथेनॉल की कीमतों में वृद्धि पर विचार करने की मांग की।
गन्ने की रिकवरी दर में बदलाव की मांग
पत्र में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी की आधार रिकवरी दर का मुद्दा भी उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले यह दर 9.50 प्रतिशत थी, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 10.25 प्रतिशत कर दिया गया।
उनका तर्क है कि गन्ने की रिकवरी मिट्टी, मौसम और पेराई के समय जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
इन परिस्थितियों को किसान पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते।
इसलिए उन्होंने आधार रिकवरी दर को फिर 9.50 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है, ताकि कम रिकवरी वाले क्षेत्रों के किसानों को उचित भुगतान मिल सके।
राज्य सरकार ने बताए अपने कदम
मुख्यमंत्री ने पत्र में राज्य सरकार द्वारा किए गए उपायों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि चीनी मिलों में गन्ने की तौल में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की गई है।
राज्य की सभी 81 चालू चीनी मिलों में एनालॉग व्यवस्था के स्थान पर डिजिटल लोड सेल लगाए गए हैं।
इसके अलावा जिला स्तर पर गठित टीमें गन्ने के वजन और चीनी रिकवरी की नियमित जांच कर रही हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य की औसत चीनी रिकवरी वर्ष 2022-23 में 9.91 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 11.09 प्रतिशत हो गई है।
किसानों को 290 करोड़ रुपये की सहायता का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 में चीनी मिलों द्वारा तय कीमत के अतिरिक्त किसानों को प्रति टन 100 रुपये देने की व्यवस्था की थी।
इसमें से 50 रुपये प्रति टन की राशि राज्य सरकार ने अपने कोष से वहन की।
उनके अनुसार, इस व्यवस्था के तहत लगभग 290 करोड़ रुपये सीधे किसानों को दिए गए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने स्तर पर कदम उठा रही है, लेकिन किसानों की प्रमुख मांगों के समाधान के लिए केंद्रीय नीतिगत फैसले आवश्यक हैं।
केंद्र ने समिति का किया गठन
गन्ना किसानों की समस्याओं का अध्ययन करने के लिए केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को पूर्व नीति आयोग सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति गठित की है।
यह समिति कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित गन्ना उत्पादक राज्यों की समस्याओं तथा चीनी उद्योग से जुड़े विषयों का अध्ययन करेगी।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने समिति के गठन का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार समिति को आवश्यक आंकड़े और सहयोग उपलब्ध कराएगी।
हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि समिति की रिपोर्ट आने तक सभी निर्णयों को टालना उचित नहीं होगा, क्योंकि किसानों को तत्काल राहत की आवश्यकता है।
किसानों और सरकार के सामने बड़ी चुनौती
उत्तरी कर्नाटक में जारी आंदोलन ने गन्ना उत्पादकों की आर्थिक चिंताओं को सामने रखा है।
किसानों की मांग है कि उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए और चीनी तथा एथेनॉल से संबंधित नीतियों में आवश्यक बदलाव किए जाएं।
वहीं सरकार के सामने किसानों, चीनी मिलों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने प्रधानमंत्री से जल्द निर्णय लेने का अनुरोध करते हुए कहा कि लाखों गन्ना किसानों की आजीविका इस मामले से जुड़ी हुई है।
अब किसानों की नजर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित बातचीत पर है। आंदोलन समाप्त होने तथा पेराई सीजन शुरू होने की स्थिति आगामी फैसलों से स्पष्ट होगी।