बेंगलुरु। कर्नाटक के बड़े हिस्से में सूखे की गंभीर स्थिति बनी हुई है। बारिश की भारी कमी के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जबकि कई इलाकों में पशुओं के लिए चारे और लोगों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को सूखे की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार से सूखा राहत कोष के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रयास भी जारी हैं।बेंगलुरु के सदाशिवनगर स्थित अपने आवास के पास मीडिया से बातचीत करते हुए परमेश्वर ने कहा कि कर्नाटक के कई हिस्सों में सूखे का असर गंभीर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि वह उत्तरी कर्नाटक सहित विभिन्न सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी परेशानियों को समझने और जमीनी परिस्थितियों का आकलन करने का प्रयास किया।
बारिश के बाद भी नहीं सुधरे हालात
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल के दिनों में राज्य के कुछ इलाकों में बारिश जरूर हुई है, लेकिन इससे व्यापक सूखे की स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में पानी की कमी और कृषि संबंधी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई। अक्टूबर में भी वर्षा की कमी बनी रही। उत्तरी कर्नाटक के कई हिस्सों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेती और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है।
किसानों की आजीविका पर गहरा असर
सूखे के कारण सबसे अधिक परेशानी कृषि पर निर्भर परिवारों को हो रही है। वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों को फसल उत्पादन में नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर पर्याप्त नमी नहीं मिलने से फसलों की वृद्धि प्रभावित हुई है।राज्य सरकार के अनुसार, सूखे के कारण कृषि और बागवानी क्षेत्र को व्यापक नुकसान पहुंचा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।परमेश्वर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के दौरान उन्होंने किसानों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। किसानों ने खेती के लिए पानी की कमी, फसलों को हुए नुकसान और भविष्य की आजीविका को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।
पेयजल और पशुओं के चारे की समस्या
कर्नाटक में सूखे का प्रभाव केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की उपलब्धता और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।वर्षा की कमी से जलाशयों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों और पशुपालकों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता, जलाशयों में पानी के स्तर और आने वाले महीनों के लिए चारे के भंडार जैसी परिस्थितियों का आकलन केंद्र की सूखा मूल्यांकन टीम के समक्ष भी रखा है।
राहत के लिए केंद्र सरकार से संपर्क
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सूखे से प्रभावित किसानों और ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। साथ ही केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रयास जारी हैं।कर्नाटक सरकार पहले भी केंद्र के समक्ष सूखे से हुए नुकसान का विवरण प्रस्तुत कर चुकी है। राज्य में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीमों के दौरे की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।सरकार ने प्रभावित किसानों को तत्काल सहायता देने के लिए प्रति किसान 2,500 रुपये की इनपुट सब्सिडी देने की घोषणा की थी। सितंबर में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य के 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था और कृषि नुकसान का प्रारंभिक अनुमान करीब 18 हजार करोड़ रुपये लगाया गया था।
प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना प्राथमिकता
परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार सूखे से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रशासन का ध्यान किसानों की समस्याओं के समाधान, पेयजल उपलब्धता और पशुधन की जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित हैउन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ क्षेत्रों में हुई हालिया बारिश के बावजूद सूखे की गंभीरता को कम करके नहीं आंका जा सकता। राज्य के कई हिस्सों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं और प्रभावित लोगों को सहायता की आवश्यकता है। कर्नाटक में सूखे की यह स्थिति कृषि उत्पादन के साथ ग्रामीण आजीविका के लिए भी गंभीर चुनौती बन गई है। ऐसे में राज्य सरकार की राहत व्यवस्था और केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगी।