बेंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी इच्छा से इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं की आवाज के दबाव में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। मुख्यमंत्री ने यह बयान बेंगलुरु में आयोजित कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।
डी.के. शिवकुमार रविवार को जवाहरलाल नेहरू तारामंडल स्थित नेशनल सोल्जर्स मेमोरियल में आयोजित कारगिल विजय दिवस समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के युवा और छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि इसी जनदबाव के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से हटना पड़ा। शिवकुमार ने कहा कि छात्रों की चिंताओं और उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे सीधे देश के भविष्य से जुड़े होते हैं। युवाओं और छात्रों के हितों की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने देश के वीर जवानों को याद करते हुए कहा कि भारतीय सेना के साहस और बलिदान के कारण ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और दुश्मन को परास्त कर देश का गौरव बढ़ाया।
समारोह में सेना के जवानों ने भी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। सैन्य परंपरा के अनुसार शहीदों को सलामी और शोक सलामी देकर उनके बलिदान को नमन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों को याद किया।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन वीर सैनिकों के त्याग और समर्पण की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सैनिकों के साहस और देशभक्ति से प्रेरणा लेनी चाहिए।
कारगिल युद्ध 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। इस युद्ध में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत दुर्गम पहाड़ियों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को पीछे हटने पर मजबूर किया था। हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शहीद सैनिकों के परिवारों और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और पूरा देश उनके प्रति कृतज्ञ है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर दिए गए मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। शिवकुमार के इस बयान को केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। वहीं, शिक्षा और छात्र आंदोलनों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता और युवाओं की आवाज महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि सरकारों को जनता की समस्याओं और मांगों पर ध्यान देना चाहिए। युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
कारगिल विजय दिवस कार्यक्रम में श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने शहीदों के सम्मान और देश की एकता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले जवानों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
कार्यक्रम में सेना के अधिकारियों, जवानों, जनप्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। सभी ने कारगिल के वीर शहीदों को नमन करते हुए उनके अदम्य साहस और देश सेवा को याद किया।