भारत की बुलेट ट्रेन का सपना होगा साकार, निर्माण कार्य देखकर खुश हुए रेल मंत्री
बेंगलुरु : 1 नवंबर 2026। भारत में हाई-स्पीड रेल परिवहन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) की विनिर्माण इकाई का दौरा कर देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ट्रेन के विभिन्न उपकरणों, तकनीकी प्रणालियों, निर्माण की गुणवत्ता और परीक्षण प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की। निरीक्षण के बाद रेल मंत्री ने परियोजना की प्रगति पर संतोष जताते हुए इसे 'बेहतरीन प्रगति' बताया। उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन के प्रमुख हिस्सों का निर्माण, एकीकरण और परीक्षण तेजी से आगे बढ़ रहा है।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बेंगलुरु स्थित BEML के आदित्य रेल परिसर में तैयार की जा रही बुलेट ट्रेन के निर्माण में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हाई-स्पीड ट्रेन का निर्माण सामान्य रेलगाड़ियों की तुलना में अधिक जटिल प्रक्रिया है। इसमें ट्रेन की मजबूती, संतुलन, सुरक्षा, तकनीकी दक्षता और यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े प्रत्येक पहलू पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
निरीक्षण के बाद वैष्णव ने कहा कि उन्होंने निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन का गहन निरीक्षण किया है। निर्माण कार्य की प्रगति उत्कृष्ट है और ट्रेन के सभी प्रमुख उपकरणों का निर्माण, एकीकरण तथा परीक्षण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रत्येक उपकरण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण किए जा रहे हैं।रेल मंत्री ने हाई-स्पीड ट्रेन की संरचनात्मक मजबूती से जुड़े परीक्षणों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि तेज गति से चलने वाली ट्रेन के आसपास उत्पन्न होने वाले वायुदाब में बदलाव को नियंत्रित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रेन की संरचना की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए 1,500 किलोन्यूटन तक के भार पर परीक्षण किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों का उद्देश्य ट्रेन की बॉडी और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की क्षमता का आकलन करना है।
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन को B28 नाम दिया गया है। यह ट्रेन भारत में विकसित की जा रही हाई-स्पीड रेल तकनीक का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसकी डिजाइन गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि शुरुआती परिचालन गति लगभग 250 किलोमीटर प्रति घंटा रखने की योजना है। इस ट्रेन को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।BEML को अक्टूबर 2024 में चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री की ओर से दो स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन, निर्माण और कमीशनिंग का अनुबंध दिया गया था। इस परियोजना का कुल अनुबंध मूल्य लगभग 866.87 करोड़ रुपये है। प्रत्येक ट्रेनसेट में आठ कोच होंगे। इसके निर्माण में BEML और मेधा सर्वो ड्राइव्स की महत्वपूर्ण भागीदारी है।नई बुलेट ट्रेन में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रेन के कोच पूरी तरह वातानुकूलित होंगे। इनमें आरामदायक और घूमने वाली सीटें, दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं तथा आधुनिक सूचना एवं मनोरंजन प्रणाली उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अतिरिक्त यात्रियों की सुरक्षा के लिए उन्नत ब्रेकिंग प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा।
स्वदेशी बुलेट ट्रेन के निर्माण को केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अभी तक भारत की हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में जापान की शिंकानसेन तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि, अब देश में ही हाई-स्पीड ट्रेनसेट तैयार करने की दिशा में प्रयास तेज किए गए हैं। इससे भविष्य में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने और भारतीय रेल उद्योग की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।रेल मंत्रालय के अनुसार, पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का प्रोटोटाइप वर्ष 2027 की शुरुआत में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद ट्रेन को परीक्षण के लिए गुजरात के सूरत डिपो ले जाया जाएगा। यहां विभिन्न तकनीकी और सुरक्षा परीक्षणों के बाद ही इसे व्यावसायिक परिचालन की अनुमति दी जाएगी।मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत की सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के माध्यम से महाराष्ट्र और गुजरात के प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाना है। इस परियोजना के अंतर्गत एलिवेटेड ट्रैक, आधुनिक रेलवे स्टेशन, पुल और सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है।
रेलवे की योजना के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के सूरत से वापी के बीच लगभग 97 किलोमीटर लंबे हिस्से पर पहली बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य है। इस खंड को अगस्त 2027 तक परिचालन के लिए तैयार करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, वास्तविक शुरुआत निर्माण कार्य, तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।बुलेट ट्रेन परियोजना से देश में आधुनिक रेलवे तकनीक के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। इसके निर्माण में इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, धातु निर्माण, डिजाइन और तकनीकी परीक्षण से जुड़े विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे भारतीय कंपनियों को हाई-स्पीड रेल क्षेत्र में अनुभव प्राप्त होगा।बेंगलुरु स्थित BEML का आदित्य रेल परिसर भविष्य की आधुनिक रेलगाड़ियों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां हाई-स्पीड ट्रेनसेट के अतिरिक्त अन्य आधुनिक रेल परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। कंपनी भविष्य में 350 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन गति वाले B35 ट्रेनसेट को विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का यह निरीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब देश में बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है। रेलवे का लक्ष्य निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर परियोजना को आगे बढ़ाना है।भारत में तैयार हो रही पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन को देश की रेलवे तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके सफल परीक्षण और परिचालन से भविष्य में अन्य हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए भी स्वदेशी ट्रेनसेट तैयार करने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें वर्ष 2027 में प्रस्तावित परीक्षण और पहली यात्री सेवा की शुरुआत पर टिकी हैं।