कर्नाटक राज्योत्सव में वंदे मातरम पर बवाल, सिद्धारमैया के इशारे पर बीच में रुका गीत
नई दिल्ली। कर्नाटक के 71वें राज्योत्सव के अवसर पर दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन में आयोजित समारोह के दौरान राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर विवाद खड़ा हो गया। रविवार, 1 नवंबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम में पहले राष्ट्रगान 'जन गण मन' हुआ और इसके बाद 'वंदे मातरम' के सभी छह पद गाए जाने लगे। इसी दौरान मंच पर मौजूद कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आयोजकों को हाथ से इशारा कर गीत को रोकने के लिए कहा। उनके संकेत के बाद कार्यक्रम संचालकों ने बीच में ही राष्ट्रगीत का प्रसारण बंद कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद कुछ देर के लिए कार्यक्रम में असमंजस की स्थिति बन गई और राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, कर्नाटक भवन में राज्योत्सव के अवसर पर ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। कार्यक्रम में सिद्धारमैया सहित कई गणमान्य व्यक्ति और अधिकारी मौजूद थे। राष्ट्रीय ध्वज और कन्नड़ ध्वज के सम्मान से जुड़े कार्यक्रम के दौरान पहले राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। इसके बाद 'वंदे मातरम' के छह पदों का गायन शुरू हुआ।
बताया जा रहा है कि जब गीत के पहले दो पद समाप्त होने के बाद भी गायन जारी रहा और पांचवें पद तक पहुंच गया, तब सिद्धारमैया ने आयोजकों की ओर हाथ से संकेत किया। उन्होंने कार्यक्रम संचालकों को गीत रोकने के लिए कहा। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल ध्वनि प्रसारण बंद कर दिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सिद्धारमैया को इशारा करते हुए देखा जा सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, कर्नाटक में 'वंदे मातरम' के कितने पद गाए जाने चाहिए, इसे लेकर पहले से राजनीतिक और प्रशासनिक बहस चल रही है। राज्य की कांग्रेस सरकार ने सितंबर 2026 में आदेश जारी कर सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले दो पद गाने का निर्देश दिया था।
सरकार के आदेश के अनुसार, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को छोड़कर राज्य सरकार के अन्य आधिकारिक समारोहों में 'वंदे मातरम' के पहले दो पद ही गाए जाने हैं। सरकार ने इस व्यवस्था के पीछे कार्यक्रमों में एकरूपता, सम्मान और उचित प्रोटोकॉल बनाए रखने का तर्क दिया था।
ऐसे में दिल्ली के कर्नाटक भवन में आयोजित राज्योत्सव समारोह में सभी छह पदों का गायन शुरू होना चर्चा का विषय बन गया। रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम संचालकों ने निर्धारित दो पदों से आगे भी गायन जारी रखा था। इसी कारण सिद्धारमैया ने हस्तक्षेप किया और इसे रोकने का संकेत दिया।
कर्नाटक सरकार के आदेश में क्या है?
कर्नाटक सरकार ने 10 सितंबर 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार के सामान्य आधिकारिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पद गाए या बजाए जाएंगे। हालांकि, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में सभी छह पद प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
सरकार का कहना था कि अलग-अलग सरकारी कार्यक्रमों में गीत के गायन को लेकर एक समान प्रोटोकॉल होना चाहिए। इसी उद्देश्य से मंत्रिमंडल की चर्चा के बाद यह व्यवस्था लागू की गई थी।
यह आदेश सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद भी शुरू हुआ। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार के फैसले पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने अपने निर्णय को ऐतिहासिक परंपरा और 1937 के कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव से जोड़कर उचित ठहराया।
कांग्रेस का क्या है पक्ष?
कांग्रेस कार्यसमिति ने अगस्त 2026 में निर्णय लिया था कि पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पद गाए जाएंगे। पार्टी ने इसके समर्थन में वर्ष 1937 के कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव का हवाला दिया था।
कांग्रेस नेताओं का तर्क रहा है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर और अन्य प्रमुख नेताओं की सहमति से सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहले दो पदों को प्राथमिकता दी गई थी।
पार्टी का कहना है कि गीत के शुरुआती पद मातृभूमि की प्रशंसा और उसके प्रति सम्मान की भावना व्यक्त करते हैं। इसीलिए कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में इन्हीं पदों को गाने की परंपरा का पालन कर रही है।
केंद्र और राज्य के प्रोटोकॉल को लेकर भी बहस
इस विवाद का एक दूसरा पहलू केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार के निर्देशों के बीच अंतर से जुड़ा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर विस्तृत प्रोटोकॉल जारी किया था। इसमें आधिकारिक संस्करण के सभी छह पदों को गाने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। वहीं कर्नाटक सरकार ने अपने राज्य स्तरीय सरकारी कार्यक्रमों के लिए पहले दो पदों का नियम लागू किया।
इसी अंतर के कारण कर्नाटक में विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान भी सितंबर में विवाद देखने को मिला था। उस समय दो पदों के बाद राष्ट्रगीत का प्रसारण बंद होने पर भाजपा विधायकों ने शेष पद स्वयं गाए थे।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सितंबर में राज्य सरकार के दो पदों वाले आदेश पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, इस विषय से संबंधित कानूनी बहस जारी रही।
पहले दिल्ली कांग्रेस कार्यालय में भी हुआ था विवाद
'वंदे मातरम' को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले 15 अगस्त 2026 को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान भी राष्ट्रगीत के गायन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी।
उस समय सोनिया गांधी को गीत के पहले दो पदों के बाद आगे गायन जारी रहने पर इशारा करते हुए देखा गया था। इसके बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कार्यक्रम के संचालन में समन्वय की कमी के कारण भ्रम पैदा हुआ था।
अब फिर चर्चा में सिद्धारमैया का इशारा
दिल्ली के कर्नाटक भवन में हुई ताजा घटना ने एक बार फिर 'वंदे मातरम' के पदों की संख्या और सरकारी कार्यक्रमों में लागू प्रोटोकॉल को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
एक ओर राज्य सरकार का आदेश सामान्य कार्यक्रमों में पहले दो पदों तक गायन सीमित करता है, वहीं दूसरी ओर केंद्र के दिशानिर्देशों में सभी छह पदों का उल्लेख है। ऐसे में कार्यक्रम के दौरान हुई इस घटना ने दोनों व्यवस्थाओं के बीच समन्वय और आयोजन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिद्धारमैया के संकेत के बाद कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' का प्रसारण रोक दिया गया था। इस मामले पर उनकी ओर से अलग से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह विषय कर्नाटक की राजनीति में फिर चर्चा का मुद्दा बन गया है।