कर्नाटक में बाढ़-सूखे के हालात पर JDS की अध्ययन टीमें गठित

Update: 2026-07-11 08:07 GMT

बेंगलुरु : कर्नाटक में इस वर्ष मानसून का असमान असर राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। एक ओर कई जिलों में भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन, कृषि और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है, वहीं दूसरी ओर कई क्षेत्रों में सामान्य से 40 से 43 प्रतिशत तक कम वर्षा होने के कारण सूखे की आशंका गहरा गई है। इन विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए जनता दल (सेक्युलर) [JDS] ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विधायकों और पूर्व विधायकों की अध्ययन टीमें गठित की हैं।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय इस्पात तथा भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक आपदा की स्थिति एक जैसी नहीं है। कहीं बाढ़ से लोग परेशान हैं तो कहीं बारिश की कमी के कारण किसान संकट में हैं। ऐसे में जमीनी हकीकत जानना और प्रभावित लोगों की समस्याओं को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से उठाना जरूरी है।

कई जिलों में बाढ़ से भारी नुकसान

एच.डी. कुमारस्वामी ने बताया कि उत्तर कन्नड़, चिक्कमगलुरु, शिवमोग्गा, कोडागु, बेलगाम, हावेरी और बागलकोट जैसे जिलों में लगातार हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इन क्षेत्रों में खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं, कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं और सरकारी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है तथा कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों और आम नागरिकों को तत्काल राहत मिलनी चाहिए।

कम बारिश से सूखे की आशंका

जहां राज्य के कुछ हिस्सों में बाढ़ ने मुश्किलें बढ़ाई हैं, वहीं कई जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान चिंता में हैं।

कुमारस्वामी ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में सामान्य से 40 से 43 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है। इससे खरीफ फसलों की बुआई और फसल विकास प्रभावित हुआ है। यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है, जिस पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

अध्ययन के लिए गठित की गई टीमें

JDS ने राज्यभर में हालात का आकलन करने के लिए विशेष अध्ययन दल बनाए हैं। इन टीमों में पार्टी के विधायक, पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल किए गए हैं।

कुमारस्वामी ने बताया कि अध्ययन दल का नेतृत्व विधायक दल के नेता सुरेश बाबू सी.बी. करेंगे, जबकि पार्टी की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमार भी इस अभियान का हिस्सा होंगे।

उन्होंने कहा कि सभी टीमें संबंधित जिलों के पार्टी अध्यक्षों, मौजूदा विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और स्थानीय नेताओं से चर्चा कर वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाएंगी।

जमीनी रिपोर्ट के आधार पर बनेगी रणनीति

पार्टी का कहना है कि अध्ययन टीमों की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।

टीमें किसानों, बाढ़ प्रभावित परिवारों, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर यह जानेंगी कि राहत कार्य किस स्तर पर चल रहे हैं और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।

इसके साथ ही फसलों के नुकसान, बुनियादी ढांचे की क्षति और लोगों की जरूरतों का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा।

किसानों की समस्याओं पर विशेष फोकस

एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि खेती राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में बाढ़ और सूखे दोनों परिस्थितियों में सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा दिया जाए, फसल क्षति का सर्वेक्षण तेजी से कराया जाए और राहत पैकेज की घोषणा की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी है, वहां सिंचाई और जल संरक्षण के वैकल्पिक उपायों पर तत्काल काम शुरू किया जाना चाहिए।

सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग

JDS ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि बाढ़ और सूखे से प्रभावित सभी जिलों में बिना किसी भेदभाव के राहत कार्य तेज किए जाएं।

पार्टी का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रभावित लोगों तक राहत और सहायता समय पर पहुंचना अधिक महत्वपूर्ण है।

कर्नाटक में इस वर्ष मानसून की असमान स्थिति ने कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर गंभीर प्रभाव डाला है। ऐसे में JDS की अध्ययन टीमें आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी, जिसके आधार पर पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी और सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग करेगी।

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