Karnataka : बच्चे के अंगदान से 13 साल की लक्ष्मी प्रिया को मिला नया जीवन
बेंगलुरु : अंगदान की महत्ता को साबित करने वाली एक प्रेरणादायक घटना में मैसूर के एक पांच वर्षीय बच्चे के लिवर दान ने 13 वर्षीय लक्ष्मी प्रिया को नया जीवन दिया है। दुर्लभ जन्मजात बीमारी बाइलरी एट्रेसिया (Biliary Atresia) से जूझ रही लक्ष्मी प्रिया का बेंगलुरु के यशवंतपुर स्थित स्पर्श अस्पताल में सफल लिवर प्रत्यारोपण किया गया। जटिल सर्जरी के बाद अब बच्ची तेजी से स्वस्थ हो रही है और डॉक्टरों का कहना है कि वह सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकेगी।
चिकित्सकों ने इस सफलता का श्रेय समय पर हुए अंगदान, विभिन्न विभागों के डॉक्टरों के समन्वय और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को दिया है। अस्पताल प्रबंधन ने भी इसे अंगदान के महत्व का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया है।
जन्म से ही गंभीर बीमारी से जूझ रही थी लक्ष्मी
लक्ष्मी प्रिया बचपन से ही बाइलरी एट्रेसिया नामक दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित थी। इस बीमारी में बच्चे के शरीर की पित्त नलिकाएं (बाइल डक्ट) सही तरीके से विकसित नहीं होतीं, जिसके कारण लिवर से पित्त का प्रवाह रुक जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी धीरे-धीरे लिवर को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर देती है।
डॉक्टरों के अनुसार, लक्ष्मी में यह बीमारी शैशव अवस्था में ही पहचान ली गई थी। बीमारी की पुष्टि होने के बाद वर्ष 2012 में उसका कसाई पोर्टोएंटेरोस्टॉमी (Kasai Portoenterostomy) ऑपरेशन किया गया था। इस सर्जरी का उद्देश्य पित्त के प्रवाह को कुछ हद तक सामान्य बनाना होता है ताकि लिवर को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
समय के साथ बिगड़ती गई हालत
हालांकि शुरुआती सर्जरी के बाद कुछ समय तक स्थिति नियंत्रित रही, लेकिन धीरे-धीरे बीमारी का असर बढ़ता गया। लक्ष्मी का लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने लगा और उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।
डॉक्टरों के मुताबिक उसे लगातार पीलिया (जॉन्डिस), शारीरिक विकास रुकना, बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की नौबत और पोर्टल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर जटिलताएं होने लगीं। इस स्थिति में आंतरिक रक्तस्राव (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग) का खतरा भी काफी बढ़ गया था, जिससे उसकी जान को लगातार खतरा बना हुआ था।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि चिकित्सकों ने स्पष्ट कर दिया था कि अब केवल लिवर ट्रांसप्लांट ही उसके जीवन को बचा सकता है।
पांच वर्षीय बच्चे के अंगदान से मिली नई उम्मीद
इसी दौरान मैसूर के एक पांच वर्षीय बच्चे के परिजनों ने कठिन परिस्थितियों में भी मानवता की मिसाल पेश करते हुए उसके अंग दान करने का निर्णय लिया। चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस बच्चे का लिवर लक्ष्मी प्रिया के लिए उपयुक्त पाया गया।
अस्पताल प्रशासन ने तुरंत अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की। अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों, सर्जनों, एनेस्थीसिया टीम, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों और ट्रांसप्लांट समन्वयकों ने मिलकर पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
सफल रहा जटिल लिवर ट्रांसप्लांट
स्पर्श अस्पताल में कई घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद लक्ष्मी प्रिया का सफल लिवर प्रत्यारोपण किया गया। ऑपरेशन के बाद उसे कुछ समय तक गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में निगरानी में रखा गया।
डॉक्टरों ने बताया कि प्रत्यारोपित लिवर ने अच्छी तरह काम करना शुरू कर दिया है और मरीज की हालत लगातार सुधर रही है। अब वह सामान्य रूप से भोजन कर पा रही है, उसकी शारीरिक स्थिति बेहतर हो रही है और भविष्य में स्वस्थ जीवन जीने की पूरी उम्मीद है।
डॉक्टरों ने बताया अंगदान का महत्व
अस्पताल के विशेषज्ञों ने कहा कि यदि समय पर अंगदान नहीं मिलता, तो मरीज की जान बचाना बेहद कठिन हो सकता था। उन्होंने कहा कि इस मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि अंगदान कई लोगों के लिए नया जीवन बन सकता है।
डॉक्टरों ने बताया कि भारत में अभी भी अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। हर वर्ष हजारों मरीज लिवर, किडनी, हृदय और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं, लेकिन पर्याप्त संख्या में अंग उपलब्ध नहीं हो पाते।
परिजनों ने जताया आभार
लक्ष्मी प्रिया के परिवार ने अंगदान करने वाले बच्चे के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि एक परिवार के कठिन निर्णय ने उनकी बेटी को नया जीवन दिया है, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे।
परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पूरी चिकित्सा टीम का भी धन्यवाद किया, जिनकी मेहनत और समर्पण से यह जटिल ऑपरेशन सफल हो सका।
समाज के लिए प्रेरणा बना मामला
यह घटना केवल एक सफल चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी है। अंगदान के माध्यम से एक व्यक्ति कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं, तो हजारों गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
पांच वर्षीय बच्चे के परिवार द्वारा लिया गया यह साहसिक और संवेदनशील निर्णय आज 13 वर्षीय लक्ष्मी प्रिया के चेहरे पर मुस्कान लौटाने का कारण बना है। यह घटना इस बात का जीवंत उदाहरण है कि किसी एक का अंगदान किसी दूसरे के लिए नई जिंदगी का सबसे बड़ा उपहार बन सकता है।