कावेरी जल पर कर्नाटक सरकार जल्द लेगी फैसला

बेंगलुरु: कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने मंगलवार को कहा कि राज्य "गंभीर जल संकट" का सामना कर रहा है। यह बात कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के उस सुझाव के बीच कही गई है जिसमें अगले 15 दिनों तक हर दिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा गया है। पत्रकारों से बात करते हुए खड़गे ने कहा कि सूखे के मंडराते खतरे पर राज्य की प्रतिक्रिया पर चर्चा करने के लिए एक बैठक हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और वरिष्ठ अधिकारी आगे की कार्रवाई पर फैसला लेने से पहले इस मामले पर विचार-विमर्श करेंगे।

खड़गे ने कहा, "कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने सुझाव दिया है कि अगले 15 दिनों तक हर दिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाए। हम खुद गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं।"उन्होंने आगे कहा, "अभी हुई बैठक खास तौर पर इस बात पर चर्चा करने के लिए थी कि सूखे के मंडराते खतरे पर राज्य को क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए। मुख्यमंत्री और सभी वरिष्ठ अधिकारी इस मामले पर विचार-विमर्श करेंगे और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे।"खड़गे ने जोर देकर कहा कि पानी छोड़ने के सुझाव पर प्रतिक्रिया तय करते समय राज्य सरकार लोगों के हितों को प्राथमिकता देगी।

उन्होंने कहा, "हम यहां अपने लोगों के हितों की रक्षा के लिए हैं। हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो उनके हितों के खिलाफ हो। जो भी फैसला लिया जाएगा, वह कानूनी दायरे में रहकर लिया जाएगा।"यह बयान कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल बंटवारे के चल रहे मुद्दे के बीच आया है, जिसमें कर्नाटक पानी की उपलब्धता और सूखे जैसी स्थिति की आशंका को लेकर चिंतित है।सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह 13 अगस्त को तमिलनाडु की उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें CWMA के उस फैसले को लागू करने की मांग की गई है, जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने का निर्देश दिया गया था।

तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कर्नाटक के काबिनी और कृष्ण राज सागर जलाशयों से पानी छोड़ने के CWMA के 30 जुलाई के निर्देश को लागू न किए जाने को चुनौती दी थी।राज्य ने कुल 4.536 TMC पानी छोड़ने की मांग की है, जो 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी के बराबर है। इसमें मांग की गई है कि तय मात्रा 12 अगस्त तक जारी कर दी जाए।इसमें इस मुद्दे को सुलझाने और यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश मांगे गए कि तमिलनाडु को कावेरी का उसका वाजिब हिस्सा तय समय के भीतर मिल जाए।

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