बेंगलुरु : कर्नाटक के कई हिस्सों में मानसून की कमजोर स्थिति का असर खरीफ सीजन की सब्जियों की खेती पर पड़ता दिखाई दे रहा है। हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के सूत्रों के अनुसार, राज्य के कई क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण किसानों को प्याज, मिर्च और टमाटर जैसी प्रमुख सब्जी फसलों की बुआई में देरी का सामना करना पड़ रहा है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ सीजन की तीन प्रमुख सब्जी फसलों में अब तक बुआई की रफ्तार काफी धीमी रही है। प्याज की बुआई लक्ष्य के मुकाबले करीब 29.5 प्रतिशत, मिर्च की 19.7 प्रतिशत और टमाटर की 36.5 प्रतिशत तक ही पूरी हो सकी है। जबकि सामान्य परिस्थितियों में 15 जुलाई तक इन फसलों की लगभग 60 प्रतिशत बुआई पूरी होने की उम्मीद रहती है।
कर्नाटक में खरीफ सीजन के दौरान प्याज, मिर्च और टमाटर की खेती का बड़ा महत्व है। इन तीनों फसलों के लिए कुल खेती का लक्ष्य लगभग 3.1 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। यह क्षेत्र खरीफ मौसम में राज्य में होने वाली कुल सब्जी खेती के रकबे का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। ऐसे में इन फसलों की धीमी बुआई का असर किसानों की आय और बाजार में सब्जियों की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।
कृषि विभाग के अनुसार, इन फसलों की बुआई के लिए जून से अगस्त का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस अवधि में पर्याप्त नमी मिलने से बीज अंकुरण और पौधों के विकास में मदद मिलती है। लेकिन इस साल कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण किसान खेतों में बुआई शुरू करने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।
टमाटर की खेती मुख्य रूप से सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर रहती है। वहीं, मिर्च और प्याज की खेती का लगभग आधा क्षेत्र बारिश आधारित है। खासकर उत्तरी कर्नाटक के कई इलाकों में किसान मानसून की बारिश पर निर्भर रहते हैं। बारिश कम होने के कारण इन क्षेत्रों में खेती की तैयारी प्रभावित हुई है।
हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के सूत्रों ने बताया कि पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने के कारण कई किसानों ने इस बार सब्जियों की खेती का रकबा कम करने का फैसला लिया है। किसानों को डर है कि अगर आगे भी बारिश कमजोर रही तो सिंचाई की समस्या बढ़ सकती है और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
किसानों का कहना है कि सब्जी फसलों में शुरुआती चरण में पर्याप्त पानी और अनुकूल मौसम की जरूरत होती है। समय पर बारिश नहीं होने से खेत तैयार करने, बीज डालने और पौधों की देखभाल में कठिनाई आती है। इसके अलावा, सिंचाई के लिए अतिरिक्त खर्च बढ़ने से खेती की लागत भी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुआई में आई कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकता है। हालांकि, बुआई में देरी होने से फसल चक्र प्रभावित हो सकता है और उत्पादन अवधि कम हो सकती है। इसका असर बाजार में सब्जियों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
कर्नाटक में प्याज, मिर्च और टमाटर न केवल स्थानीय खपत के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि कई किसान इन्हें दूसरे राज्यों के बाजारों में भी भेजते हैं। ऐसे में उत्पादन में कमी आने पर आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना रहती है।
कृषि और बागवानी विभाग की नजर अब मानसून की स्थिति पर बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को मौसम और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए फसल योजना बनाने की सलाह दी जा रही है। जरूरत पड़ने पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और अन्य सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।
बारिश की कमी ने एक बार फिर कृषि क्षेत्र की मानसून पर निर्भरता को उजागर किया है। कर्नाटक के किसान अब अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि खरीफ सीजन की सब्जी फसलों की बुआई में तेजी आ सके और उत्पादन लक्ष्य हासिल किया जा सके।