बेंगलुरु। हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और गैर-संक्रामक बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने लोगों के भोजन में नमक की मात्रा कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक लोगों द्वारा रोजाना खाए जाने वाले नमक की मात्रा में 30 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए मंगलवार को 'कर्नाटक स्टेट मल्टी-सेक्टरल सॉल्ट रिडक्शन एंड हेल्दी डाइट प्रमोशन एक्शन प्लान' लॉन्च किया गया।
विधान सौधा में आयोजित टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की बैठक में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने इस एक्शन प्लान की शुरुआत की। योजना का उद्देश्य केवल घरों में इस्तेमाल होने वाले नमक को कम करना नहीं है, बल्कि बाहर मिलने वाले भोजन और प्रोसेस्ड तथा पैकेज्ड फूड के जरिए शरीर में पहुंचने वाले अतिरिक्त सोडियम को भी कम करना है।
2030 तक 30 प्रतिशत कमी का लक्ष्य
एक्शन प्लान में वर्ष 2030 तक रोजाना नमक की खपत में 30 प्रतिशत कमी का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार स्वास्थ्य विभाग के साथ विभिन्न क्षेत्रों और संस्थानों को जोड़कर काम करने की तैयारी कर रही है।
योजना के तहत लोगों को यह समझाने पर जोर दिया जाएगा कि जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन स्वास्थ्य के लिए किस तरह जोखिम पैदा कर सकता है। खासकर हाई ब्लड प्रेशर और उससे जुड़ी हृदय संबंधी बीमारियों की रोकथाम को इस अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल किया गया है।
घर से पैकेज्ड फूड तक रहेगा फोकस
सरकार का यह अभियान कई स्तरों पर काम करेगा। आमतौर पर लोग घर में खाना बनाते समय नमक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन शरीर में पहुंचने वाला सोडियम केवल इसी स्रोत से नहीं आता।
रेस्तरां, होटल, स्ट्रीट फूड और दूसरे स्थानों पर मिलने वाले तैयार भोजन में भी नमक की मात्रा अधिक हो सकती है। इसके अलावा चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, सॉस, अचार और दूसरे प्रोसेस्ड या पैकेज्ड खाद्य पदार्थ भी सोडियम के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं।
इसी वजह से सरकार ने घरेलू भोजन के साथ बाहर के खाने और पैकेज्ड फूड को भी अपनी रणनीति में शामिल किया है।
स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए मिलेगी खान-पान की सलाह
एक्शन प्लान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्वास्थ्य प्रणाली के जरिए लोगों को बेहतर खान-पान के बारे में सलाह देना है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले लोगों को नमक के अधिक सेवन से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में जागरूक करने पर जोर रहेगा।
हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी जोखिम वाले लोगों को भोजन में नमक की मात्रा नियंत्रित करने के बारे में विशेष सलाह दी जा सकती है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। उन्हें स्वस्थ आहार के संबंध में लोगों तक स्पष्ट और व्यावहारिक जानकारी पहुंचाने के लिए तैयार किया जाएगा।
हाई ब्लड प्रेशर पर विशेष ध्यान
नमक में मौजूद सोडियम का अत्यधिक सेवन हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम से जुड़ा माना जाता है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों को प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। संगठन के मुताबिक दुनिया में औसत नमक सेवन अनुशंसित मात्रा से काफी अधिक है।
इसी कारण नमक की खपत कम करने को गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम से जुड़ी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों में शामिल किया जाता है।
हेल्दी डाइट को मिलेगा बढ़ावा
कर्नाटक सरकार का एक्शन प्लान केवल नमक कम करने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें समग्र रूप से स्वस्थ भोजन की आदतों को बढ़ावा देने की योजना भी शामिल है।
लोगों को अपने दैनिक भोजन में संतुलित आहार अपनाने और अत्यधिक नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने के लिए जागरूक किया जाएगा।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा दूसरे संबंधित विभागों और हितधारकों के बीच समन्वय पर जोर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य स्वस्थ भोजन को व्यक्तिगत पसंद तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान का हिस्सा बनाना है।
कम सोडियम वाले नमक पर भी रिसर्च
एक्शन प्लान में कम सोडियम और पोटैशियम युक्त नमक के विकल्पों पर अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
सामान्य नमक में सोडियम की मात्रा अधिक होती है। इसके विकल्प के रूप में ऐसे नमक पर दुनिया के कई हिस्सों में अध्ययन किए गए हैं जिनमें सोडियम का कुछ हिस्सा पोटैशियम से बदला जाता है।
हालांकि पोटैशियम युक्त नमक हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। खासकर किडनी संबंधी कुछ बीमारियों या ऐसी दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह की जरूरत हो सकती है। इसलिए इस तरह के विकल्पों के इस्तेमाल को चिकित्सा और वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा।
पैकेज्ड फूड भी बड़ी चुनौती
बदलती जीवनशैली के साथ प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड का इस्तेमाल बढ़ा है। ऐसे कई खाद्य पदार्थों में स्वाद, संरक्षण और प्रोसेसिंग के लिए सोडियम का इस्तेमाल किया जाता है।
कई बार उपभोक्ताओं को यह अंदाजा नहीं होता कि अलग-अलग खाद्य पदार्थों के जरिए पूरे दिन में कुल कितना नमक उनके शरीर में पहुंच रहा है।
ऐसे में लोगों को फूड लेबल पढ़ने और सोडियम की मात्रा समझने के लिए जागरूक करना भी उपयोगी हो सकता है। इससे उपभोक्ता कम सोडियम वाले विकल्प चुनने के बारे में बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
गैर-संक्रामक बीमारियों को रोकने की कोशिश
हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक और डायबिटीज जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य के सामने बड़ी चुनौती हैं। इन बीमारियों के जोखिम को कम करने में खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और तंबाकू से दूरी जैसी जीवनशैली संबंधी आदतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नमक की खपत कम करने की पहल को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सरकार की कोशिश है कि बीमारी होने के बाद इलाज के साथ-साथ उससे पहले जोखिम वाले कारकों को कम करने पर भी ध्यान दिया जाए।
जागरूकता होगी सबसे बड़ी चुनौती
सरकार के सामने इस योजना को जमीन पर लागू करने की बड़ी चुनौती लोगों की भोजन संबंधी आदतों में बदलाव लाना होगी। नमक भारतीय भोजन का सामान्य हिस्सा है और कई तैयार खाद्य पदार्थों में भी इसकी मात्रा अधिक हो सकती है।
ऐसे में केवल सरकारी दिशा-निर्देश जारी करने के बजाय लोगों को लगातार जागरूक करना महत्वपूर्ण होगा।
घर में खाना बनाने वाले लोगों से लेकर होटल-रेस्तरां और खाद्य उद्योग तक सभी की भागीदारी से ही नमक की कुल खपत में उल्लेखनीय कमी हासिल की जा सकती है।
कई क्षेत्रों को जोड़कर चलेगा अभियान
योजना के नाम में 'मल्टी-सेक्टरल' शब्द इसी बात की ओर संकेत करता है कि अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। स्वस्थ भोजन की उपलब्धता, खाद्य उत्पादों की संरचना, लोगों में जागरूकता और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे पहलुओं के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के सहयोग की जरूरत होगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य 2030 तक नमक की दैनिक खपत को 30 प्रतिशत कम करना है। यदि योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में स्वस्थ भोजन की आदतों को बढ़ावा देना और अधिक सोडियम सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना होगा।