मैसूरु। मैसूर-कोडागु लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद और BJP नेता प्रताप सिम्हा के खिलाफ टी. नरसीपुर पुलिस स्टेशन में एक और FIR दर्ज की गई है। यह मामला अंबेडकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मधु की शिकायत पर दर्ज हुआ है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सिम्हा ने टी. नरसीपुर के पुलिस इंस्पेक्टर धनंजय की जाति का उल्लेख करते हुए कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
यह नया मामला टी. नरसीपुर में गणेश प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी विवाद के बीच सामने आया है। इससे पहले भी प्रताप सिम्हा और अन्य लोगों के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषण, विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने और पुलिस के काम में बाधा डालने जैसे आरोपों को लेकर FIR दर्ज की गई थी।
मधु की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
अंबेडकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मधु ने टी. नरसीपुर पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रताप सिम्हा ने अपने संबोधन के दौरान इंस्पेक्टर धनंजय की जाति का उल्लेख करते हुए कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की।
शिकायत में दलित संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों को लेकर भी कथित अपमानजनक टिप्पणियां किए जाने का आरोप लगाया गया है। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं और मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
इंस्पेक्टर धनंजय से जुड़ा है विवाद
टी. नरसीपुर में यह विवाद गणेश उत्सव के दौरान शुरू हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक सितंबर की शुरुआत में एक शांति समिति की बैठक का वीडियो सामने आया था, जिसमें इंस्पेक्टर धनंजय द्वारा गणेश उत्सव आयोजकों को जुलूस और पटाखों को लेकर निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी।
इसके बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक विवाद में बदल गया। हिंदू संगठनों ने पुलिस अधिकारी के कथित बयान का विरोध किया और टी. नरसीपुर में गणेश प्रतिमा की शोभायात्रा आयोजित की। प्रताप सिम्हा भी इसमें शामिल हुए थे।
शोभायात्रा के बाद दर्ज हुई थी पहली FIR
18 सितंबर को टी. नरसीपुर में गणेश प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई थी। इसके बाद प्रताप सिम्हा समेत कई लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया।
पहली FIR में आरोप लगाया गया कि शोभायात्रा के दौरान कथित रूप से भड़काऊ भाषण और नारे लगाए गए तथा पुलिस अधिकारियों को अपना कर्तव्य निभाने से रोका गया। पुलिस के मुताबिक इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 191, 194, 196(1)(a)(b), 299, 353(1)(b)(c) और 190 समेत विभिन्न प्रावधान लगाए गए।
पुलिस की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि सार्वजनिक स्थान पर की गई कुछ टिप्पणियां धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और विभिन्न समुदायों के बीच तनाव पैदा करने वाली थीं। पुलिस ने ड्यूटी के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को भी साक्ष्य के तौर पर संरक्षित करने की बात कही थी।
अब जातिगत टिप्पणी का आरोप
पहले मामले के कुछ ही दिनों बाद प्रताप सिम्हा के खिलाफ दूसरी शिकायत सामने आई। इस बार विवाद कथित जातिगत टिप्पणी से जुड़ा है।
अंबेडकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मधु ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि सिम्हा ने पुलिस इंस्पेक्टर धनंजय को उनकी जाति का उल्लेख करते हुए कथित रूप से अपमानित किया। शिकायत में दलित संगठनों से जुड़े लोगों को लेकर दिए गए कथित बयानों पर भी आपत्ति जताई गई है।
पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। जांच के दौरान संबंधित भाषण या वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
दलित संगठनों ने किया था विरोध
इस विवाद के दौरान दलित संघर्ष समिति और अन्य संगठनों की ओर से भी प्रदर्शन किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रताप सिम्हा और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई थी।
अब अंबेडकर वेलफेयर एसोसिएशन की शिकायत पर नया मामला दर्ज होने से विवाद में एक और कानूनी पहलू जुड़ गया है।
प्रताप सिम्हा ने पहले मामले पर दिया था जवाब
पहली FIR दर्ज होने के बाद प्रताप सिम्हा ने अपने खिलाफ लगे आरोपों का विरोध किया था। उन्होंने दावा किया था कि इंस्पेक्टर धनंजय की टिप्पणियों से पहले विवाद पैदा हुआ और पुलिस को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी।
सिम्हा ने अपने खिलाफ दर्ज पहली FIR को लेकर राज्य सरकार और पुलिस पर भी आरोप लगाए थे। ये उनके राजनीतिक दावे हैं।
नई FIR में लगाए गए आरोपों पर उनकी विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में तत्काल स्पष्ट नहीं थी।
मैसूर के मौजूदा सांसद ने भी दी थी प्रतिक्रिया
पहली FIR के बाद मैसूर-कोडागु के मौजूदा BJP सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार ने कहा था कि प्रताप सिम्हा द्वारा व्यक्त विचार उनके व्यक्तिगत विचार हैं और उन्हें पार्टी की राय नहीं माना जाना चाहिए।
यदुवीर ने यह भी कहा था कि सिम्हा अपने खिलाफ लगे आरोपों का कानूनी तरीके से सामना करेंगे।
पुलिस जांच से स्पष्ट होंगे तथ्य
फिलहाल प्रताप सिम्हा के खिलाफ दर्ज नई FIR शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। किसी FIR का दर्ज होना अपने आप में आरोपों की पुष्टि या दोषसिद्धि नहीं होता। मामले में पुलिस को शिकायत, उपलब्ध वीडियो, बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच करनी होगी।
टी. नरसीपुर में गणेश शोभायात्रा से शुरू हुआ विवाद अब कई शिकायतों और कानूनी कार्रवाइयों तक पहुंच गया है। पहले कथित भड़काऊ भाषण और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था और अब कथित जातिगत टिप्पणी को लेकर दूसरी FIR सामने आई है।
आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पुलिस को क्या साक्ष्य मिलते हैं और मामले में आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जाती है।