बेंगलुरु: वकील और पूर्व MLC रमेश बाबू ने कर्नाटक सरकार से यह जांच करने का आग्रह किया है कि क्या DGP (जेल और सुधार सेवाएं) आलोक कुमार, IPS ने सरकारी आचरण नियमों का उल्लंघन किया है। आरोप है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार द्वारा रखे गए पक्ष से जुड़े आधिकारिक पत्राचार को मीडिया के साथ साझा किया।
17 अक्टूबर को मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को दिए गए एक पत्र में, बाबू ने इस बात की जांच की मांग की कि अधिकारी के कथित पत्राचार की बातें मीडिया तक कैसे पहुंचीं। साथ ही, उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि इस मामले में अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाए।
14 और 15 अक्टूबर की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आलोक कुमार ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार के उन तर्कों पर सवाल उठाए थे, जो कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़े थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
बाबू ने कहा कि इस पत्राचार से 'ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968' के पालन पर सवाल खड़े होते हैं। इसमें विशेष रूप से मीडिया से बातचीत, सरकारी कार्यों की सार्वजनिक आलोचना और आधिकारिक जानकारी को बिना अनुमति के उजागर करने से जुड़े नियम शामिल हैं।
बाबू का तर्क है कि यदि अधिकारी ने, या उनकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति ने यह पत्राचार मीडिया को दिया है, तो लागू सेवा नियमों के तहत इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्टीकरण मांगा है कि अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से जुड़ी जानकारी कैसे मिली, और उन्होंने किस हैसियत से राज्य सरकार के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की।