खड़गे के बयान पर कर्नाटक में सियासी बवाल, PM मोदी के पिता पर टिप्पणी से भड़की भाजपा
बेंगलुरु। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को खड़गे के बयान के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि खड़गे की टिप्पणी राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है और इससे प्रधानमंत्री के परिवार का अपमान हुआ है।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद बसवराज बोम्मई ने भी खड़गे के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे वरिष्ठ पद पर बैठे नेता से इस प्रकार की भाषा की अपेक्षा नहीं की जा सकती। बोम्मई ने टिप्पणी को बेहद निंदनीय बताते हुए खड़गे को अपने पद की गरिमा बनाए रखने की सलाह दी।
बिहार में दिए गए बयान से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम से शुरू हुआ। रविवार, 25 अक्टूबर को बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भाषण दे रहे थे।
इसी दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी कहीं नहीं जाएंगे। इसके जवाब में खड़गे ने विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसमें प्रधानमंत्री के पिता का भी उल्लेख था।
बयान सामने आने के बाद भाजपा ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना शुरू कर दी। भाजपा नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी नेता के दिवंगत परिजनों के बारे में ऐसी टिप्पणी करना उचित नहीं है।
फ्रीडम पार्क में भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन
खड़गे के बयान के विरोध में सोमवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में भाजपा कार्यकर्ता एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगाए।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता लगातार प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां कर रहे हैं। उनका कहना था कि लोकतंत्र में सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना करना सभी राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियों से बचना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे से अपने बयान पर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस प्रकार की भाषा से राजनीतिक संवाद का स्तर गिरता है।
बसवराज बोम्मई ने खड़गे को दी नसीहत
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान की कड़ी आलोचना की।
बोम्मई ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे लंबे राजनीतिक अनुभव वाले वरिष्ठ नेता हैं और वर्तमान में देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उन्हें अपने शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि खड़गे का बयान उनके वरिष्ठ पद और गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह बेहद निंदनीय है।
बोम्मई ने खड़गे को सलाह दी कि वे अपने पिछले बयानों और उन पर जनता की प्रतिक्रिया को याद करें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को अपने अनुभवों से सीख लेकर सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
भाजपा सांसद के मुताबिक, व्यक्तिगत टिप्पणी करने से राजनीतिक बहस की दिशा बदल जाती है और जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
विधानसभा की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी, पुलिस ने रोका
बेंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब भाजपा नेता और कार्यकर्ता फ्रीडम पार्क से विधान सौध की ओर मार्च करने लगे।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
हिरासत में लिए गए नेताओं में कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, विधान परिषद सदस्य चलवादी नारायणस्वामी और भाजपा विधायक एन. रविकुमार भी शामिल थे।
देश के कई राज्यों में भाजपा ने जताया विरोध
खड़गे की टिप्पणी को लेकर विरोध केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहा। भाजपा ने सोमवार को बिहार, दिल्ली, जम्मू सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए।
पटना में भाजपा की बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय सरावगी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जन आक्रोश मार्च निकाला। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगाए गए और उनका पुतला भी जलाया गया।
दिल्ली में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे के आवास के पास प्रदर्शन करने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का पालन होना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने भी खड़गे के बयान पर उठाए सवाल
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के संदर्भ में दिए गए बयान से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को इस तरह के बयान का बचाव करने के बजाय खेद व्यक्त करना चाहिए।
वहीं, भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी आरोप लगाया कि कांग्रेस में राजनीतिक विरोध अब व्यक्तिगत हमलों का रूप लेता जा रहा है। हालांकि ये आरोप भाजपा नेताओं के राजनीतिक बयान हैं।
प्रियंक खड़गे ने किया पिता का बचाव, भाजपा पर दोहरे मापदंड का आरोप
दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार के मंत्री और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियंक खड़गे ने अपने पिता के बयान का बचाव किया।
उन्होंने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी को पूरे संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
प्रियंक खड़गे के अनुसार, कार्यक्रम में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर चुनौतीपूर्ण टिप्पणी की थी, जिसके जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा अनावश्यक रूप से इस मामले को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रही है।
प्रियंक खड़गे ने सवाल उठाया कि भाजपा अपने नेताओं की विवादित टिप्पणियों पर इसी तरह की प्रतिक्रिया क्यों नहीं देती।
राजनीतिक बयानबाजी से गरमाया कर्नाटक का माहौल
इस विवाद ने कर्नाटक में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। जहां भाजपा खड़गे के बयान को राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बता रही है, वहीं कांग्रेस पक्ष इसे संदर्भ से अलग प्रस्तुत करने का आरोप लगा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर यह विवाद सार्वजनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली भाषा और नेताओं की व्यक्तिगत टिप्पणियों से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े करता है।
बेंगलुरु में हुआ विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से प्रमुखता से उठा रही है।
फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष के बयान को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा माफी की मांग पर अड़ी हुई है, जबकि कांग्रेस के नेताओं ने टिप्पणी के संदर्भ को लेकर अपना पक्ष रखा है।