बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि सिद्धारमैया के खिलाफ कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे कांग्रेस के ही कुछ नेताओं का हाथ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी की आंतरिक कलह अब सार्वजनिक हो चुकी है और इसका नुकसान कांग्रेस को आगामी चुनावों में उठाना पड़ेगा।

आर. अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भविष्यवाणी की कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर देगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर चल रहे विवाद और एक-दूसरे के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों से जनता के बीच कांग्रेस की विश्वसनीयता कमजोर हो रही है।

भाजपा नेता ने सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कहा कि इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को उजागर कर दिया है। उनका आरोप है कि पार्टी के नेता आपसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में इतने उलझ चुके हैं कि उन्हें प्रदेश की जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है।

हालांकि, कथित स्टिंग ऑपरेशन में कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि किसी नेता के आरोप को जांच में स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना के बयान ने भी इस विवाद को नई दिशा दी है। राजन्ना ने मंगलवार को कहा कि सिद्धारमैया से संबंधित स्टिंग ऑपरेशन विवाद का असर हालिया विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ा हो सकता है। उन्होंने पार्टी के भीतर जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

राजन्ना के इस बयान को आधार बनाते हुए आर. अशोक ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि जब सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ नेता ही आंतरिक विवाद के कारण चुनावी नुकसान की आशंका जता रहे हैं, तब कांग्रेस नेतृत्व को अपनी स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

इस विवाद की शुरुआत सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो सामने आने के बाद हुई थी। वीडियो को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए। सिद्धारमैया ने मामले में कानूनी कदम उठाए और संबंधित सामग्री के प्रसारण के खिलाफ अदालत से अंतरिम राहत भी प्राप्त की।

सिद्धारमैया के बेटे और मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने भी आरोप लगाया था कि उनके पिता की छवि खराब करने के प्रयास में कांग्रेस के कुछ लोग शामिल हो सकते हैं। इस बयान के बाद पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चा और तेज हो गई। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, किसी वरिष्ठ नेता को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर एक ही पार्टी के नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आना संगठन के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी।

आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज को लेकर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक विवादों को अधिक महत्व दिया जा रहा है, जबकि किसानों, गरीबों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों से जुड़ी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने किसानों को मुआवजा देने में कथित देरी का मुद्दा उठाते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए। अशोक का आरोप है कि प्राकृतिक आपदाओं और सूखे से प्रभावित किसानों को समय पर पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। उन्होंने सरकार से किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और राहत व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की।

भाजपा नेता ने वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन से संबंधित परेशानियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, सरकार को राजनीतिक विवादों में उलझने के बजाय जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने पर ध्यान देना चाहिए।

इसके अलावा अशोक ने विभिन्न सरकारी विभागों में धन की कथित कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को लेकर विभागीय स्तर पर परेशानियां सामने आ रही हैं, जिससे जनहित के काम प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना आवश्यक है।

आर. अशोक लगातार राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने सूखे से प्रभावित किसानों के लिए घोषित राहत राशि को अपर्याप्त बताते हुए सरकार से स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की थी।

कर्नाटक में 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। भाजपा और जेडीएस गठबंधन कांग्रेस सरकार की नीतियों के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के आंतरिक विवादों को भी प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

दूसरी तरफ, कांग्रेस के सामने सरकार के कामकाज के साथ संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती है। सिद्धारमैया जैसे वरिष्ठ नेता से जुड़ा विवाद पार्टी की आंतरिक राजनीति में विशेष महत्व रखता है।

फिलहाल सिद्धारमैया स्टिंग ऑपरेशन विवाद की सच्चाई संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकेगी। इस बीच आर. अशोक के बयानों ने कर्नाटक की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को किस प्रकार सुलझाता है और विपक्ष आगामी चुनावों में इसे किस हद तक राजनीतिक मुद्दा बना पाता है।

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