बेंगलुरु। कर्नाटक के KR पेट इलाके के तहसीलदार श्रेयस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में तहसीलदार एक किसान को कथित तौर पर डांटते हुए, उसे बिचौलिया बताते हुए और पुलिस बुलाने की चेतावनी देते हुए नजर आ रहे हैं। घटना के बाद लोगों ने अधिकारी के व्यवहार की आलोचना की है और सवाल उठाए हैं कि आम जनता की समस्याओं को सुनने और समाधान करने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी का रवैया ऐसा क्यों रहा।
जानकारी के अनुसार, यह घटना तब हुई जब अन्नाय्या नाम का एक किसान जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी लेने के लिए KR पेट स्थित मिनी विधान सौधा पहुंचा था। किसान अपनी शिकायत और जमीन के दस्तावेजों से संबंधित जानकारी अधिकारियों के सामने रखना चाहता था। इसी दौरान तहसीलदार श्रेयस और किसान के बीच बातचीत हुई, जिसका वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
वीडियो में किसान अपनी समस्या बताते हुए दिखाई दे रहा है। इसी दौरान तहसीलदार कथित तौर पर नाराज हो जाते हैं और किसान को फटकार लगाते हैं। वीडियो में अधिकारी द्वारा किसान को बिचौलिया कहे जाने और पुलिस कार्रवाई की चेतावनी देने की बात सामने आई है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अधिकारी के व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई।
कई लोगों ने सवाल उठाया कि सरकारी कार्यालयों में आने वाले आम नागरिकों के साथ अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए। उनका कहना है कि किसानों और आम लोगों को अपनी समस्याएं रखने का अधिकार है और उनकी शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुनना प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
हालांकि, तहसीलदार श्रेयस ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी किसान का अपमान करना नहीं था, बल्कि कार्यालय में अनुशासन बनाए रखना था। अधिकारी ने दावा किया कि उन्होंने हमेशा किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए काम किया है और उनके कार्यकाल में किसानों से जुड़े कई मामलों का निपटारा किया गया है।
श्रेयस ने बताया कि घटना वाले दिन अन्नाय्या कई फाइलें लेकर कार्यालय आया था और कथित तौर पर कर्मचारियों के साथ ऊंची आवाज में बात कर रहा था। तहसीलदार के अनुसार, किसान के व्यवहार को देखते हुए उन्हें लगा कि वह नशे की हालत में हो सकता है। उन्होंने कहा कि कार्यालय में शांति बनाए रखने के लिए उन्होंने उसे चेतावनी दी थी कि यदि वह हंगामा जारी रखता है तो कार्रवाई की जाएगी।
तहसीलदार ने यह भी कहा कि बिचौलियों के कारण कई बार भोले-भाले नागरिकों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि इसी संदर्भ में उन्होंने चेतावनी दी थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान के खिलाफ पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
वायरल वीडियो को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अभी किसी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और आम जनता के बीच व्यवहार को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जनता के साथ संवाद में संयम और संवेदनशीलता भी बनाए रखनी चाहिए।
किसान संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, दस्तावेज और राजस्व विभाग के काम आम नागरिकों के लिए पहले से ही जटिल होते हैं। ऐसे में यदि कोई किसान अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचता है तो उसे उचित मार्गदर्शन मिलना चाहिए।
वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष है कि सरकारी कार्यालयों में व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है। कई बार शिकायतों के निपटारे के दौरान विवाद की स्थिति बन जाती है, ऐसे में अधिकारियों को स्थिति नियंत्रित करनी पड़ती है।
इस पूरे मामले में अब वायरल वीडियो के आधार पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक ओर लोग अधिकारी से आम जनता के प्रति अधिक विनम्र व्यवहार की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं तहसीलदार ने अपनी कार्रवाई को कार्यालय में अनुशासन बनाए रखने का कदम बताया है।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस घटना को लेकर कोई समीक्षा करता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों के बीच बेहतर संवाद और व्यवहार की जरूरत को सामने ला दिया है।