बेंगलुरु : बेंगलुरु शहर में बढ़ती ट्रैफिक समस्या को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया सैटेलाइट टाउन रिंग रोड (STRR) प्रोजेक्ट अब तेजी से पूरा होने की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना का काम जोर-शोर से चल रहा है और इसके कई महत्वपूर्ण हिस्से पूरे हो चुके हैं।
नितिन गडकरी ने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के सांसद पीसी मोहन के एक लिखित सवाल के जवाब में बताया कि करीब 14,655 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही 288 किलोमीटर लंबी सैटेलाइट टाउन रिंग रोड परियोजना से बेंगलुरु शहर में यातायात दबाव कम होने की उम्मीद है।
मंत्री ने बताया कि इस परियोजना को कुल छह पैकेज में बांटकर लागू किया जा रहा है। इनमें से दो पैकेज का काम पूरी तरह पूरा हो चुका है, जबकि दो अन्य पैकेज अंतिम चरण में हैं। बाकी हिस्सों पर भी तेजी से काम जारी है।
STRR परियोजना में कुल 288 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इसमें करीब 243 किलोमीटर हिस्सा कर्नाटक में और 45 किलोमीटर हिस्सा तमिलनाडु में आता है। यह रिंग रोड बेंगलुरु के आसपास के कई इलाकों को जोड़ने का काम करेगी और शहर में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों का दबाव कम करने में मदद करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु शहर के मुख्य हिस्सों में बढ़ते यातायात भार को कम करना है। वर्तमान में बेंगलुरु देश के सबसे अधिक ट्रैफिक दबाव वाले शहरों में शामिल है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में वाहन सड़कों पर चलते हैं। खासकर शहर के बाहरी इलाकों और प्रमुख राजमार्गों पर जाम की समस्या आम है।
STRR के पूरा होने के बाद शहर के चारों ओर एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे लंबी दूरी के वाहनों को शहर के अंदर से गुजरने की जरूरत कम होगी। इससे न केवल ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, बल्कि यात्रा समय और ईंधन की खपत में भी कमी आने की उम्मीद है।
गडकरी ने बताया कि डोड्डाबल्लापुर-डोड्डास्पेट बाईपास और बैंगलोर-चेन्नई एक्सप्रेसवे से जुड़े सड़क खंड का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। यह हिस्सा परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल है और इससे आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
उन्होंने बताया कि 38 किलोमीटर लंबे डोड्डाबल्लापुरा-होसाकोटे खंड का काम 99.2 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस हिस्से के नवंबर 2026 तक पूरी तरह तैयार होने की संभावना है। यह मार्ग बेंगलुरु के बाहरी क्षेत्रों में यातायात को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा, तमिलनाडु में बेलगोंडापल्ली और कर्नाटक सीमा के बीच 33.3 किलोमीटर लंबे सड़क खंड का निर्माण भी तेजी से जारी है। इस हिस्से का करीब 91.3 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसके सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।
सड़क परिवहन मंत्रालय का कहना है कि STRR केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि बेंगलुरु के भविष्य के यातायात प्रबंधन की एक महत्वपूर्ण योजना है। शहर के तेजी से विस्तार और बढ़ती आबादी को देखते हुए इस तरह की बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं की जरूरत महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिंग रोड परियोजनाएं बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से शहर के अंदर आने वाले बाहरी वाहनों की संख्या कम की जा सकती है और औद्योगिक तथा व्यावसायिक गतिविधियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है।
बेंगलुरु देश का प्रमुख आईटी और कारोबारी केंद्र है, जिसके कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं। शहर की सड़कों पर बढ़ता दबाव लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। STRR परियोजना को इस समस्या के समाधान की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है और समय पर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि STRR के पूरी तरह चालू होने के बाद बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
फिलहाल परियोजना के बाकी हिस्सों पर काम जारी है और संबंधित एजेंसियां इसे तय समयसीमा में पूरा करने के प्रयास में जुटी हैं। इसके पूरा होने के बाद बेंगलुरु को एक आधुनिक और बेहतर परिवहन नेटवर्क मिलने की उम्मीद है।