टांके लगाने से पहले एनेस्थीसिया, डेढ़ साल के बच्चे की मौत

Update: 2026-07-25 05:24 GMT

कन्नूर : केरल के कन्नूर जिले में एक निजी अस्पताल में डेढ़ साल के बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। आरोप है कि होंठ की चोट पर टांके लगाने के लिए एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद बच्चे के माता-पिता ने अधिकारियों से मामले की जांच में तेजी लाने की मांग की है।

मृतक बच्चे की पहचान एरामम निवासी देवांश शौर्य के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, 5 जुलाई को खेलते समय बच्चे के होंठ पर चोट लग गई थी। चोट लगने के बाद परिजन उसे इलाज के लिए पय्यानूर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे।

परिवार के अनुसार, अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्चे की चोट की जांच करने के बाद घाव पर टांके लगाने की सलाह दी। इसके लिए बच्चे को एनेस्थीसिया दिया गया, ताकि प्रक्रिया के दौरान उसे दर्द महसूस न हो।

परिजनों का आरोप है कि एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद बच्चा बेहोश हो गया और उसकी स्थिति सामान्य नहीं हुई। इसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए कन्नूर के एक अन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने इलाज का प्रयास किया, लेकिन बाद में बच्चे की मौत हो गई।

घटना के बाद परिवार ने अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया और एनेस्थीसिया दिए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। माता-पिता का कहना है कि इतनी कम उम्र के बच्चे को एनेस्थीसिया देने के दौरान जरूरी सावधानियां बरती गई थीं या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए।

बच्चे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों ने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने की अपील की है। उनका कहना है कि जांच जल्द पूरी होनी चाहिए, ताकि उन्हें पूरी सच्चाई पता चल सके।

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस मामले की ओर गया है। हालांकि, आधिकारिक रूप से जांच की स्थिति और आगे की कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मरीज को एनेस्थीसिया देने से पहले उसकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य चिकित्सकीय पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी होता है। बच्चों में एनेस्थीसिया की प्रक्रिया के दौरान विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है, क्योंकि उनकी शारीरिक स्थिति अलग होती है।

परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया तय चिकित्सा मानकों के अनुसार हुई थी या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि एनेस्थीसिया देने के बाद बच्चे की स्थिति बिगड़ने के क्या कारण रहे।

स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि छोटे बच्चों के इलाज के दौरान अस्पतालों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसी घटनाओं से लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठते हैं।

परिवार ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि मामले में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

फिलहाल बच्चे की मौत को लेकर जांच प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों के सामने मुख्य चुनौती यह पता लगाना है कि मौत का कारण क्या था और क्या इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

यह घटना एक बार फिर बच्चों के इलाज में विशेष सावधानी और चिकित्सा प्रक्रियाओं की निगरानी की जरूरत को सामने लाती है। परिजन अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके। 

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