केरल : चक्करकल्लू पुलिस ने नकली सोने के गहने गिरवी रखकर बैंक से लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने नकली गहनों को असली सोना बताकर सहकारी बैंक से बड़ी रकम हासिल की थी। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुडाली निवासी मुहम्मद हफनाज (37), इरीवेरी निवासी धनेश बाबू (44) और मुनीर चंद्रोथ (48) के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, यह धोखाधड़ी पेरालासेरी कोऑपरेटिव बैंक की वेल्लाचल इवनिंग ब्रांच में सुनियोजित तरीके से की गई थी। आरोप है कि धनेश बाबू और मुनीर चंद्रोथ ने कई बार नकली सोने के गहने बैंक में गिरवी रखे और इसके बदले ऋण राशि प्राप्त की।
जांच में सामने आया है कि मुनीर ने करीब 120.8 ग्राम वजन के नकली गहने बैंक में गिरवी रखे थे, जबकि धनेश बाबू ने 62.325 ग्राम वजन के नकली गहने जमा किए थे। इन गहनों को असली सोना बताकर आरोपियों ने बैंक से लगभग 17 लाख 20 हजार रुपये की धोखाधड़ी की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने बैंक अधिकारियों को गुमराह करने के लिए नकली गहनों पर ‘916 BIS’ का फर्जी स्टांप भी लगाया था। इस निशान के जरिए गहनों को उच्च गुणवत्ता वाले असली सोने के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने तांबे और मोम से बने गहनों पर सोने की परत चढ़ाकर उन्हें तैयार किया था। इसके बाद इन नकली आभूषणों को बैंक में गिरवी रखकर ऋण लिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह पूरा काम योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।
पुलिस को जांच के दौरान जानकारी मिली कि कुडाली निवासी मुहम्मद हफनाज ने धनेश बाबू और मुनीर चंद्रोथ को नकली गहने उपलब्ध कराए थे। इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों की भूमिका की जांच की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
चक्करकल्लू पुलिस ने यह कार्रवाई बैंक मैनेजर की शिकायत के आधार पर शुरू की थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और गहनों की जांच सहित अन्य पहलुओं की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान गहनों के नकली होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
पुलिस अब मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन रिकॉर्ड, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस धोखाधड़ी में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं और क्या इसी तरह की वारदातें अन्य बैंकों में भी की गई हैं।
सहकारी बैंकों में सोना गिरवी रखकर ऋण लेने की व्यवस्था आम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सुविधा है। ऐसे मामलों में धोखाधड़ी होने से बैंकिंग व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि बैंक अब सोने की जांच प्रक्रिया को और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नकली गहनों की पहचान के लिए आधुनिक जांच उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। केवल बाहरी पहचान या मुहर के आधार पर सोने की गुणवत्ता तय करना जोखिम भरा हो सकता है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि नकली गहनों की तैयारी कहां और किस तरह की गई थी।
इस घटना के बाद बैंक अधिकारियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित विभागों को दें।
फिलहाल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।