केरल का नाम बदलने को लेकर चंद्रशेखर का बड़ा बयान

केरल का नाम बदलने की दिशा में बढ़ा एक और कदम

Update: 2026-08-10 09:32 GMT

Thiruvananthapuram:  केरल का नाम बदलने की मांग को लेकर राज्य में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जी. चंद्रशेखर ने संकेत दिया है कि केरल के नाम को बदलने की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव के करीब पहुंच रही है। प्रस्तावित नाम ‘केरलम’ है, जिसे राज्य की ऐतिहासिक और भाषाई पहचान से जोड़कर देखा जाता है।

नाम बदलने की यह मांग नई नहीं है। केरल सरकार और राज्य विधानसभा पहले भी केंद्र से राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का आग्रह कर चुके हैं। इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य तर्क यह है कि मलयालम भाषा में राज्य को लंबे समय से ‘केरलम’ कहा जाता है और यही नाम उसकी स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को बेहतर तरीके से दर्शाता है।
‘केरल’ से ‘केरलम’ करने की मांग
केरल का मौजूदा आधिकारिक नाम अंग्रेजी और हिंदी में ‘Kerala’ यानी केरल है। वहीं मलयालम में इसका नाम ‘കേരളം (Keralaṁ/Keralam)’ है।
राज्य सरकार का तर्क रहा है कि संविधान और आधिकारिक दस्तावेजों में भी राज्य के नाम को उसकी स्थानीय भाषाई पहचान के अनुरूप किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया था।
नाम परिवर्तन के लिए केवल राज्य सरकार की मंजूरी पर्याप्त नहीं होती। चूंकि राज्यों के नाम संविधान में दर्ज हैं, इसलिए अंतिम बदलाव के लिए संसद और संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
संविधान में बदलाव की जरूरत
भारत के संविधान की पहली अनुसूची में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम दर्ज हैं। इसलिए किसी राज्य का आधिकारिक नाम बदलने के लिए संविधान की संबंधित प्रविष्टि में संशोधन करना होता है।
संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को राज्यों के गठन और उनकी सीमाओं या नामों में बदलाव करने की शक्ति प्राप्त है। इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति की सिफारिश और संबंधित राज्य विधानसभा से राय लेने जैसी संवैधानिक प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
यही कारण है कि केरल का नाम ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया राजनीतिक घोषणा से आगे बढ़कर संवैधानिक स्तर पर महत्वपूर्ण कदम की मांग करती है।
‘केरलम’ नाम का सांस्कृतिक महत्व
‘केरलम’ शब्द को राज्य की मलयालम भाषाई और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है। केरल के लोग अपनी मातृभाषा में राज्य को ‘केरलम’ के नाम से संबोधित करते हैं।
समर्थकों का कहना है कि आधिकारिक नाम को स्थानीय रूप देने से राज्य की ऐतिहासिक पहचान और भाषाई विरासत को अधिक सम्मान मिलेगा। यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय भी है।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का मुद्दा कई वर्षों से राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा रहा है। राज्य विधानसभा ने पहले भी इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था।
हालांकि, प्रस्ताव को संवैधानिक रूप से लागू करने के लिए केंद्र स्तर पर आगे की कार्रवाई आवश्यक है। यही वजह है कि केंद्र सरकार की ओर से प्रक्रिया में होने वाली प्रगति पर केरल की नजर बनी हुई है।
नाम बदलने से क्या बदलेगा?
अगर ‘केरल’ का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ किया जाता है, तो संविधान और केंद्र सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में राज्य का नाम बदलेगा। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न दस्तावेजों, संस्थानों और आधिकारिक संचार में नए नाम को अपनाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
हालांकि, इससे राज्य की सीमाओं या प्रशासनिक व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा। यह मुख्य रूप से राज्य के आधिकारिक नाम में परिवर्तन होगा।
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