तिरुवनंतपुरम: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया है। LDF विधायकों ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को पास किया। BJP विधायकों ने इसका विरोध किया। प्रस्ताव में कहा गया है कि चुनाव आयोग, जो एक संवैधानिक संस्था है, उसे सरकारी दबाव में आए बिना पूरी तरह निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए, और आयोग के मौजूदा कामों ने उसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। चुनाव आयोग वोटर लिस्ट तैयार करने और उसे वेरिफाई करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर को पारदर्शी और कानूनी तरीके से चलाने में नाकाम रहा।
प्रस्ताव में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिले वोट देने के अधिकार से किसी नागरिक को वंचित करना संविधान का उल्लंघन है। इसमें यह भी कहा गया है कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी लोगों के जनादेश को कमजोर करने के बराबर है।
प्रस्ताव के अनुसार, केवल प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति ही स्वतंत्र चुनाव आयुक्तों के चयन को सुनिश्चित कर सकती है। यह केंद्र सरकार से आग्रह करता है कि वह चयन समिति का पुनर्गठन करने के लिए कदम उठाए। इसमें आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद - जिसमें कहा गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए जिम्मेदार समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होने चाहिए - केंद्र के नए कानून ने संस्था की निष्पक्षता को कमजोर किया है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह के बीच, प्रस्ताव में उन मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए कदम उठाने की मांग की गई है, जिन पर आरोप लगे हैं। विधानसभा केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से यह भी आग्रह करती है कि वे उन सभी योग्य मतदाताओं के वोटिंग अधिकार तुरंत बहाल करें जिन्हें 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था।
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