तिरुवनंतपुरम। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ करीब 20 साल पुराने कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले में केरल सरकार ने सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बुधवार, 4 नवंबर को बताया कि राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) में सचिव रहते हुए ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को निर्देश दिए गए हैं। मामला केरल राज्य परिवहन परियोजना (KSTP) के तहत सड़क निर्माण कार्यों और उनके भुगतान से जुड़ा है। पूर्व ठेकेदार की शिकायत में ज्ञानेश कुमार पर दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
20 साल पुराने मामले में फिर शुरू हुई जांच
जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2006 के आसपास का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल के लोक निर्माण विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। उस दौरान राज्य में सड़क निर्माण और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केरल राज्य परिवहन परियोजना के तहत विभिन्न कार्य किए जा रहे थे।इन परियोजनाओं में ठेके देने, निर्माण कार्यों के भुगतान और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। अब करीब दो दशक बाद इन आरोपों की दोबारा जांच कराई जा रही है।गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा है कि संबंधित शिकायतों की जांच के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना है।
दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप
ताजा मामला कोल्लम जिले के चदयामंगलम निवासी पूर्व ठेकेदार साजन की शिकायत से जुड़ा है। साजन ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के निदेशक को शिकायत देकर आरोप लगाया कि केरल राज्य परिवहन परियोजना के तहत पूरे किए गए सड़क निर्माण कार्यों का भुगतान जारी करने के बदले तत्कालीन पीडब्ल्यूडी सचिव ज्ञानेश कुमार ने दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।शिकायत में भारत-मलेशिया संयुक्त उद्यम PATI-BEL से जुड़ी सड़क परियोजना का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी के भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था।गृह विभाग ने शिकायत को जांच के लिए सतर्कता ब्यूरो के पास भेजा है। जांच में संबंधित दस्तावेजों, पुराने रिकॉर्ड और शिकायत में लगाए गए आरोपों का परीक्षण किया जा सकता है।यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और इन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
मलेशियाई इंजीनियर की मौत से भी जुड़ा मामला
इस विवाद का एक पहलू मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की मौत से भी जुड़ा है। वह सड़क निर्माण परियोजना से संबंधित कंपनी में प्रमुख परियोजना प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे।रिपोर्टों के अनुसार, ली सी बीन की मौत आत्महत्या से हुई थी। इस घटना के बाद परियोजना के भुगतान और कथित रिश्वत संबंधी आरोपों को लेकर सवाल उठे थे।शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि परियोजना से संबंधित बकाया भुगतान में देरी और कथित रिश्वत की मांग के कारण वित्तीय दबाव पैदा हुआ था।हालांकि, इंजीनियर की मौत और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि होना बाकी है। सतर्कता जांच का उद्देश्य संबंधित तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करना है।
अक्टूबर में भी दिए गए थे जांच के निर्देश
इस मामले में नया घटनाक्रम सामने आने से पहले अक्टूबर 2026 में भी केरल सरकार ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुराने आरोपों की जांच कराने का निर्णय लिया था।उस समय कांग्रेस नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल की शिकायत के आधार पर राज्य सरकार ने संबंधित फाइलों और पूर्व जांच के रिकॉर्ड की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे।गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बताया था कि शिकायत से जुड़े कानूनी पहलुओं की समीक्षा की गई है। इसके बाद सतर्कता जांच आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।पुराने मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि पूर्व में आरोपों को प्रमाणित नहीं किया जा सका था और आगे जांच आवश्यक नहीं होने संबंधी रिपोर्ट दी गई थी।अब नए आरोपों और शिकायतों के मद्देनजर मामले की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने क्या कहा?
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मामले को लेकर स्पष्ट किया कि किसी आरोप के पुराने होने मात्र से उसकी जांच की संभावना समाप्त नहीं हो जाती।उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में नए तथ्य या शिकायतें सामने आती हैं, तो उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के अनुसार उनकी समीक्षा की जा सकती है।चेन्निथला ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों को आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करनी चाहिए।उन्होंने इस मामले में सतर्कता विभाग को आवश्यक निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य शिकायतों की सत्यता का पता लगाना है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर हैं ज्ञानेश कुमार
ज्ञानेश कुमार वर्तमान में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। ऐसे में उनके खिलाफ पुराने प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े आरोपों की जांच का मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।हालांकि, यह जांच उनके वर्तमान चुनाव आयोग संबंधी कार्यों से नहीं, बल्कि केरल में लोक निर्माण विभाग के सचिव के रूप में उनके पुराने कार्यकाल से जुड़ी है।मुख्य चुनाव आयुक्त का पद एक महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी वाला पद है। इसलिए इस मामले में जांच की प्रक्रिया, कानूनी पहलुओं और निष्कर्षों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
केरल सरकार के निर्देशों के बाद सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के सामने पुराने रिकॉर्ड, शिकायतकर्ताओं के बयानों और संबंधित दस्तावेजों की जांच करने की जिम्मेदारी है।यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में नए साक्ष्य सामने आते हैं या पूर्व में दर्ज निष्कर्षों की पुष्टि होती है।फिलहाल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। जांच के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारी दोषी पाए गए हैं।आने वाले दिनों में सतर्कता ब्यूरो की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि करीब दो दशक पुराने इस मामले में आगे किसी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं।