BJP पार्षद की छुट्टी अर्जी पर निगम में घमासान

Update: 2026-07-31 10:13 GMT

तिरुवनंतपुरम। नगर निगम की BJP शासित गवर्निंग बॉडी की शुक्रवार को होने वाली महत्वपूर्ण परिषद बैठक में वाझोट्टोकोनम के पार्षद आर. सुगाथन की सदस्यता को लेकर सियासी टकराव देखने को मिल सकता है। कापा (KAPA) मामले में जेल में बंद सुगाथन की कुर्सी बचाने के लिए BJP गवर्निंग बॉडी प्रयास कर रही है, जबकि विपक्षी दल UDF और LDF उनकी छुट्टी की अर्जी का विरोध करने की तैयारी में हैं।

बैठक में मेयर वी.वी. राजेश की ओर से आर. सुगाथन की छुट्टी की अर्जी परिषद की मंजूरी के लिए पेश की जाएगी। BJP नेतृत्व वाली गवर्निंग बॉडी का प्रयास है कि इस आवेदन को मंजूरी मिल जाए, ताकि सुगाथन की पार्षद पद पर स्थिति बनी रहे।

वहीं, विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला किया है। UDF और LDF नेताओं का कहना है कि मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। दोनों दलों ने छुट्टी आवेदन पर मतदान कराने की मांग करने की रणनीति बनाई है।

नियमों के अनुसार, यदि सुगाथन की छुट्टी की अर्जी परिषद द्वारा मंजूर नहीं की जाती है और वह लगातार तीन परिषद बैठकों में अनुपस्थित रहते हैं, तो उनकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में BJP गवर्निंग बॉडी के सामने राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है।

नगर निगम की मौजूदा सत्ता व्यवस्था में सुगाथन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। BJP गवर्निंग बॉडी को एक निर्दलीय सदस्य के समर्थन से पूर्ण बहुमत प्राप्त है। ऐसे में एक सीट का खाली होना भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

आर. सुगाथन कापा मामले के कारण चर्चा में आए हैं। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बाद उनकी परिषद बैठकों में मौजूदगी नहीं हो पा रही है। इसी वजह से उनकी सदस्यता को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।

BJP नेताओं का तर्क है कि जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक पार्षद पद को लेकर जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। उनका प्रयास है कि छुट्टी आवेदन को मंजूरी देकर सुगाथन की सदस्यता सुरक्षित रखी जाए।

दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के लिए तय नियमों का पालन जरूरी है। UDF और LDF नेताओं ने आरोप लगाया है कि BJP अपने राजनीतिक हितों के लिए नियमों में राहत देने की कोशिश कर रही है।

शुक्रवार की परिषद बैठक में इस मुद्दे पर बहस के साथ-साथ मतदान की संभावना भी जताई जा रही है। यदि प्रस्ताव गिरता है, तो इसका सीधा असर BJP गवर्निंग बॉडी की संख्या और स्थिरता पर पड़ सकता है।

नगर निगम की राजनीति में पहले भी बहुमत को लेकर कई बार खींचतान देखने को मिली है। वर्तमान स्थिति में BJP के लिए सुगाथन की सीट बचाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्दलीय सदस्य के समर्थन से बनी सत्ता व्यवस्था में हर सदस्य का महत्व बढ़ जाता है।

विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। उनका मानना है कि परिषद में पारदर्शिता और नियमों का पालन होना चाहिए।

वहीं BJP गवर्निंग बॉडी इस मामले को कानूनी और प्रक्रियात्मक आधार पर देख रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि परिषद सदस्य के अधिकारों और नियमों के अनुसार ही निर्णय लिया जाना चाहिए।

अब सभी की नजर शुक्रवार की परिषद बैठक पर है, जहां आर. सुगाथन की छुट्टी अर्जी पर होने वाला फैसला नगर निगम की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। यदि आवेदन मंजूर हो जाता है तो BJP को राहत मिलेगी, लेकिन अगर प्रस्ताव खारिज होता है तो पार्टी के सामने बहुमत बचाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।

Tags:    

Similar News