Panna Tiger Reserve में फिर गई बाघ की जान

Update: 2026-07-20 14:50 GMT

मध्य प्रदेश: पन्ना टाइगर रिजर्व में एक बार फिर बाघ की मौत का मामला सामने आया है। शनिवार को किशनगढ़ कोर रेंज की बृजपुरा बीट में एक वयस्क बाघ मृत अवस्था में मिला। इस घटना के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। वहीं, एक महीने के भीतर बाघ की मौत की यह तीसरी घटना होने के कारण टाइगर रिजर्व की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह रोजाना की तरह वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम जंगल क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान टीम को बृजपुरा क्षेत्र में एक पहाड़ी के पास एक बाघ जमीन पर लेटा हुआ दिखाई दिया। शुरुआत में वनकर्मियों को लगा कि बाघ आराम कर रहा है, इसलिए वे आगे बढ़ गए।

हालांकि, जब काफी देर तक बाघ ने कोई हलचल नहीं की तो वनकर्मियों को संदेह हुआ। इसके बाद टीम ने सावधानीपूर्वक बाघ के पास जाकर जांच की। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि बाघ की मौत हो चुकी है। वनकर्मियों ने तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी।

घटना की जानकारी मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू की गई। नियमानुसार बाघ की पहचान, पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। हालांकि, अभी तक मृत बाघ की पहचान संख्या यानी आईडी की पुष्टि नहीं हो पाई है।

वन विभाग की प्रारंभिक जांच में बाघ के शरीर पर किसी भी तरह के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला प्राकृतिक मृत्यु का लग रहा है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।

बाघ की मौत की यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जाता रहा है। एक महीने के अंदर तीन बाघों की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

पन्ना टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल है और यहां बाघ संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जाती हैं। कुछ साल पहले पन्ना में बाघों की संख्या काफी कम हो गई थी, जिसके बाद विशेष संरक्षण अभियान चलाकर बाघों की संख्या बढ़ाने में सफलता मिली थी।

ऐसे में लगातार बाघों की मौत वन विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की सुरक्षा के लिए नियमित पेट्रोलिंग, कैमरा ट्रैप निगरानी और जंगल क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन बेहद जरूरी है।

वन विभाग की टीम अब आसपास के क्षेत्र की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बाघ की मौत के पीछे कोई अन्य कारण तो नहीं है। इसके अलावा आसपास के इलाकों में वन्यजीव गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही या अन्य कारण सामने आते हैं तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत को लेकर वन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग की टीमें लगातार जंगल में गश्त कर रही हैं और अन्य बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। एक महीने में हुई तीन घटनाओं ने भले ही चिंता बढ़ाई है, लेकिन अधिकारी मामले की विस्तृत जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कह रहे हैं।

Tags:    

Similar News