भोपाल। मध्यप्रदेश में गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को करवाचौथ का त्योहार श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए दिनभर व्रत रखा। हालांकि इस बार मौसम ने त्योहार के उत्साह के बीच परेशानियां भी बढ़ाईं। राजधानी भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए रहने और बारिश की आशंका के कारण चंद्रदर्शन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। भोपाल में चंद्रमा निकलने का अनुमानित समय रात 8:26 बजे और इंदौर में रात 8:34 बजे था। लेकिन आसमान में बादल होने से कई स्थानों पर निर्धारित समय पर चांद दिखाई देने में परेशानी हुई। कुछ इलाकों में महिलाओं को रात 10:30 बजे के बाद तक चंद्रदर्शन के लिए इंतजार करना पड़ा, हालांकि इतने लंबे विलंब की स्वतंत्र स्थानवार पुष्टि नहीं हो सकी है। मौसम की इस चुनौती के बावजूद महिलाओं ने परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की और करवाचौथ का पर्व मनाया।
करवाचौथ को लेकर गुरुवार सुबह से ही प्रदेश के विभिन्न शहरों में उत्साह का माहौल दिखाई दिया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर पूजा की तैयारियां कीं। कई घरों में सुबह सरगी ग्रहण करने की परंपरा निभाई गई, जिसके बाद महिलाओं ने व्रत शुरू किया।
दिनभर महिलाओं ने अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की। शाम होते ही घरों में करवाचौथ की पूजा की तैयारियां तेज हो गईं।
महिलाओं ने पूजा की थालियां सजाईं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार करवा माता की पूजा की। कई स्थानों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया।
करवाचौथ पर चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद अपना व्रत खोलती हैं।
लेकिन इस वर्ष मौसम की स्थिति को देखते हुए चंद्रदर्शन में बाधा आने की आशंका पहले से जताई जा रही थी। मौसम संबंधी पूर्वानुमानों में प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए रहने और बारिश की संभावना बताई गई थी।
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से मध्यप्रदेश के मौसम में बदलाव की संभावना व्यक्त की गई थी। विशेष रूप से पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभागों में बारिश के आसार बताए गए थे।
वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभागों में बादल छाए रहने की संभावना थी। ऐसे में करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को चांद देखने के लिए सामान्य से अधिक इंतजार करना पड़ सकता था।
राजधानी भोपाल में शाम की पूजा के बाद महिलाओं ने चंद्रमा निकलने का इंतजार शुरू किया। पंचांग और खगोलीय गणना के अनुसार, शहर में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:26 बजे बताया गया था।
हालांकि बादलों की मौजूदगी के कारण निर्धारित समय पर चंद्रमा का दिखाई देना निश्चित नहीं था। कई महिलाओं ने घरों की छतों, बालकनी और खुले स्थानों से आसमान की ओर नजरें लगाए रखीं।
इंदौर में भी ऐसी ही स्थिति की आशंका थी। यहां चंद्रोदय का समय लगभग रात 8:34 बजे निर्धारित था। लेकिन मौसम खराब होने की संभावना ने चंद्रदर्शन को लेकर चिंता बढ़ा दी।
इस बार प्रदेश के अलग-अलग जिलों में चंद्रोदय के समय में भी अंतर था। खगोलीय जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्सों में चंद्रमा अपेक्षाकृत पहले दिखाई देने की संभावना थी, जबकि पश्चिमी जिलों में चंद्रोदय कुछ देर बाद होना था।
सिंगरौली में रात 8:01 बजे चंद्रमा निकलने का अनुमान लगाया गया था, जबकि आलीराजपुर में चंद्रोदय का समय रात 8:41 बजे बताया गया था।
इस तरह प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच चंद्रमा निकलने के समय में लगभग 40 मिनट का अंतर था।
खगोल विज्ञान विशेषज्ञ सारिका घारू ने बताया था कि पृथ्वी की गोलाकार बनावट और घूर्णन के कारण अलग-अलग स्थानों पर चंद्रमा के उदय का समय अलग होता है।
इसके अलावा वास्तविक चंद्रदर्शन का समय स्थानीय मौसम की स्थिति पर भी निर्भर करता है। घने बादल, कोहरा, ऊंची इमारतें और पहाड़ियां चंद्रमा के दिखाई देने में बाधा बन सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, चंद्रमा का खगोलीय उदय और उसका आंखों से दिखाई देना दो अलग स्थितियां हैं। कई बार चंद्रमा निर्धारित समय पर निकल जाता है, लेकिन बादलों की मोटी परत के कारण वह दिखाई नहीं देता।
यही वजह है कि करवाचौथ के दौरान कई महिलाओं को पंचांग में बताए गए समय के बाद भी आसमान साफ होने का इंतजार करना पड़ता है।
इस बार भी प्रदेश में मौसम की अनिश्चितता के कारण चंद्रदर्शन को लेकर यही परेशानी सामने आई। कुछ स्थानों पर देर रात तक इंतजार करने की जानकारी मिली, हालांकि रात 10:30 बजे के बाद चांद दिखाई देने के दावे की सभी शहरों के लिए पुष्टि नहीं है।
मौसम की स्थिति का असर खासकर उन महिलाओं पर अधिक पड़ सकता है, जो दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। लंबे समय तक बिना भोजन और पानी के रहने के बाद चंद्रदर्शन में देरी होने से थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
हालांकि उपवास रखना व्यक्तिगत धार्मिक आस्था का विषय है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को लंबे समय तक निर्जला उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
करवाचौथ की धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कई परिवारों में चंद्रमा दिखाई नहीं देने की स्थिति में स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के आधार पर पूजा संपन्न करने के उपाय अपनाए जाते हैं।
धार्मिक जानकारों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में परिवार अपनी परंपरा और स्थानीय पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार पूजा कर सकता है।
मध्यप्रदेश में इस बार करवाचौथ को लेकर बाजारों में भी खास रौनक रही। त्योहार से पहले महिलाओं ने मेहंदी, चूड़ियों, साड़ियों और श्रृंगार सामग्री की खरीदारी की।
कई परिवारों में महिलाएं पारंपरिक लाल और अन्य रंगों की साड़ियों तथा परिधानों में सजकर पूजा में शामिल हुईं। पूजा के दौरान करवाचौथ की कथा सुनने और परिवार के बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने की परंपरा भी निभाई गई।
इस अवसर पर प्रदेश के कई राजनीतिक नेताओं ने भी अपने परिवारों के साथ करवाचौथ मनाया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्नी साधना सिंह के साथ त्योहार की पूजा की।
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्नी आशा विजयवर्गीय के साथ करवाचौथ मनाया, जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता राय के साथ त्योहार की परंपराएं निभाईं।
नेताओं की पारिवारिक तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे।
इस बार करवाचौथ के अवसर पर एक ओर पारंपरिक पूजा और उत्सव का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर मौसम की अनिश्चितता ने लोगों को परेशान किया।
खासकर चंद्रदर्शन में देरी की आशंका को देखते हुए कई परिवारों में महिलाएं देर रात तक आसमान साफ होने का इंतजार करती रहीं।
फिलहाल गुरुवार को मनाया गया करवाचौथ प्रदेशभर में धार्मिक आस्था और पारिवारिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। बादलों और बारिश की आशंका ने जरूर चंद्रदर्शन की प्रतीक्षा बढ़ाई, लेकिन त्योहार के प्रति लोगों का उत्साह बना रहा।