भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को एक बार फिर यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश एक है तो कानून भी एक होना चाहिए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने UCC पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत जैसे देश में अलग-अलग कानूनों के बजाय एक समान कानून की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी नागरिकों के लिए समान नियम और अधिकार होना जरूरी है।
यादव ने कहा कि भारत की पहचान एकता और अखंडता से है। ऐसे में कानूनों में समानता का होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि "एक देश, एक कानून और एक नेता" वाले देश में अलग-अलग कानूनों की व्यवस्था के बजाय एक समान कानून व्यवस्था होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मध्य प्रदेश ने भी इसी दिशा में कदम उठाते हुए UCC को लेकर कानून बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समान कानून व्यवस्था के उद्देश्य से काम कर रही है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत मामलों से जुड़े समान नियम लागू करना है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषय शामिल होते हैं। वर्तमान में इन विषयों पर अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।
UCC को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे कानूनों में समानता आएगी और सभी नागरिकों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू होगी। वहीं, कुछ वर्गों की ओर से इसे लेकर अलग-अलग चिंताएं भी व्यक्त की जाती रही हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि समान कानून व्यवस्था से समाज में समानता और न्याय की भावना मजबूत होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की प्रगति के लिए जरूरी है कि नागरिकों को समान अधिकार और समान अवसर मिलें। कानूनों में समानता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पहले भी कई मौकों पर समान नागरिक संहिता को लेकर समर्थन जताया गया है। मुख्यमंत्री यादव लगातार इस मुद्दे पर अपनी राय रखते रहे हैं और इसे देशहित से जुड़ा विषय बताते रहे हैं।
राजनीतिक स्तर पर UCC एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। अलग-अलग राजनीतिक दलों की इस पर अलग-अलग राय है। कुछ दल इसे समानता और न्याय की दिशा में जरूरी कदम बताते हैं, जबकि कुछ दल इसे लेकर आपत्तियां भी जताते हैं।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद एक बार फिर UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है। खासकर ऐसे समय में जब देश के विभिन्न राज्यों में समान नागरिक संहिता को लेकर बहस जारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, समान नागरिक संहिता लागू करना एक जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि इसमें देश के विभिन्न समुदायों, परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है।
मोहन यादव ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि देश की एकता के लिए समान कानून व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है।
फिलहाल UCC को लेकर देशभर में बहस जारी है और आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का प्रमुख विषय बना रह सकता है।