सीहोर में बारिश से तबाही, 700 एकड़ फसलें चौपट गांव में घुसा पानी, लोग परेशान
सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में पिछले दो दिनों से हुई भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। सबसे ज्यादा असर चरणलाल गांव में देखने को मिला, जहां बारिश का पानी भरने से पूरा गांव तालाब जैसा नजर आने लगा। भारी बारिश से करीब 700 एकड़ में लगी फसलें बर्बाद हो गईं, जबकि कई परिवारों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा।
बारिश के कारण गांव के कई हिस्सों में पानी जमा हो गया है। टीटी नगर और दर्जी मोहल्ला जैसे क्षेत्रों में हालात बेहद खराब रहे। यहां कई घरों और बस स्टैंड परिसर में घुटनों तक पानी भर गया। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई परिवारों के घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान खराब हो गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दो दिनों में हुई तेज बारिश ने गांव की व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत के बाद तैयार हुई फसल बारिश के पानी में बर्बाद हो गई। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
बारिश का असर व्यापारियों पर भी पड़ा है। कई दुकानों में पानी भरने से सामान खराब हो गया। स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक, करीब 100 क्विंटल अनाज पानी की वजह से खराब हो गया। दुकानों में रखा खाद्यान्न और अन्य सामान भीगने से व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान होने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा बारिश का पानी दूध की डेयरी में भी घुस गया। डेयरी संचालकों को भी नुकसान उठाना पड़ा। पानी भरने के कारण दूध और डेयरी से जुड़े सामान को सुरक्षित रखने में परेशानी हुई। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते जल निकासी की व्यवस्था की जाती तो नुकसान को कम किया जा सकता था।
ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। गांव वालों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी हालात का जायजा लेने के लिए गांव पहुंचे थे, लेकिन वे केवल कुछ मिनट रुककर वापस चले गए। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने स्थिति देखी जरूर, लेकिन प्रभावित लोगों को तत्काल कोई राहत उपलब्ध नहीं कराई गई।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराए और प्रभावित किसानों, व्यापारियों तथा परिवारों को मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि बारिश से हुए नुकसान के बाद लोगों को आर्थिक मदद की जरूरत है, ताकि वे दोबारा अपने जीवन को पटरी पर ला सकें।
वहीं, बारिश के कारण गांव में जलभराव की समस्या ने स्थानीय व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। नालियों की सफाई और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी लोगों के घरों और दुकानों में पहुंच जाता है।
किसानों ने बताया कि खेतों में पानी भरने से सोयाबीन और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई खेतों में फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। अब किसानों को सरकार से राहत और मुआवजे की उम्मीद है।
प्रशासन की ओर से फिलहाल नुकसान का आकलन किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है। अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें तत्काल राहत सामग्री और आर्थिक सहायता की जरूरत है।
भारी बारिश ने सीहोर जिले में आम लोगों से लेकर किसानों और व्यापारियों तक की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। अगर जल्द राहत नहीं पहुंचाई गई तो प्रभावित लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।