दतिया सीट पर निर्णायक मुकाबला, मतदान की तैयारी पूरी

Update: 2026-07-29 16:18 GMT

मध्य प्रदेश: दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का प्रचार अभियान अब समाप्त हो चुका है और सियासी मुकाबला निर्णायक दौर में पहुंच गया है। मंगलवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थमने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाने के लिए घर-घर संपर्क अभियान शुरू कर दिया है। हाई प्रोफाइल माने जा रहे इस उपचुनाव में 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम सामने आएंगे।

दतिया विधानसभा उपचुनाव कांग्रेस के तत्कालीन विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के कारण कराया जा रहा है। बैंक एफडी धोखाधड़ी मामले में अदालत द्वारा तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इसके बाद खाली हुई सीट पर भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है।

इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है। भाजपा ने इस बार पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने दतिया के पूर्व राजपरिवार से जुड़े और पूर्व विधायक घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव भी चुनाव मैदान में हैं, जिनकी मौजूदगी कुछ क्षेत्रों में चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

प्रचार खत्म होने के बाद अब चुनावी रणनीति पूरी तरह स्थानीय समीकरणों पर केंद्रित हो गई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मतदान के दिन भाजपा में डॉ. नरोत्तम मिश्रा समर्थकों और कांग्रेस में अवधेश नायक समर्थकों की सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। दोनों नेताओं का क्षेत्र में अपना प्रभाव है और उनके समर्थकों का रुख चुनाव परिणाम पर असर डाल सकता है।

भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी संगठन की पृष्ठभूमि से आते हैं और लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। उन्हें शिवराज सरकार के समय मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था। भाजपा ने उनके समर्थन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारा। पार्टी मतदाताओं के बीच यह संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही है कि सत्ता पक्ष का विधायक बनने से क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिलेगी।

हालांकि आशुतोष तिवारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र में अपनी नई पहचान स्थापित करना है। दतिया सीट पर लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव रहा है। ऐसे में टिकट बदलाव के बाद उनके समर्थकों की नाराजगी को भाजपा के लिए चुनौती माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व लगातार सभी गुटों को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहा है।

दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के पास क्षेत्रीय पहचान और राजनीतिक अनुभव की ताकत है। वे दतिया और सेवढ़ा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। पूर्व राजपरिवार से संबंध होने के कारण क्षेत्र में उनकी अलग पहचान मानी जाती है। कांग्रेस को उम्मीद है कि उनका व्यक्तिगत जनसंपर्क और स्थानीय पकड़ पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगी।

कांग्रेस के सामने भी कई चुनौतियां हैं। पार्टी को अंदरूनी गुटबाजी और संभावित भितरघात से निपटना होगा। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार की मौजूदगी कुछ वर्गों के वोटों को प्रभावित कर सकती है। चुनाव में छोटे दलों की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।

दतिया विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 20 हजार 410 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 1 लाख 16 हजार 116 पुरुष मतदाता, 1 लाख 4 हजार 284 महिला मतदाता और 10 अन्य मतदाता शामिल हैं। मतदान के लिए क्षेत्र में 291 केंद्र बनाए गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 79.26 प्रतिशत मतदान हुआ था।

अब सभी की निगाहें 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। भाजपा जहां संगठन और सत्ता के सहारे जीत का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस स्थानीय पहचान और पुराने समीकरणों के भरोसे मैदान में है। दतिया की जनता किसके पक्ष में फैसला सुनाती है, इसका खुलासा 3 अगस्त को मतगणना के बाद होगा।

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