भोजशाला की वाग्देवी प्रतिमा को भारत लाने की कोशिश तेज

Update: 2026-08-05 08:06 GMT

नई दिल्ली/धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर से जुड़ी देवी वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। वर्तमान में यह प्रतिमा लंदन के एक संग्रहालय में रखी हुई है। इसे भारत वापस लाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं और अब केंद्र सरकार की ओर से भी इस दिशा में कूटनीतिक स्तर पर पहल की जा रही है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वाग्देवी की प्रतिमा को भारत लाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में कूटनीतिक माध्यमों के जरिए आगे बढ़ने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, प्रतिमा की वापसी को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित देशों के बीच बातचीत और प्रक्रियाओं के आधार पर होगा।

वाग्देवी की प्रतिमा मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मंदिर से जुड़ी मानी जाती है। भोजशाला को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। हिंदू परंपरा में देवी वाग्देवी को देवी सरस्वती का स्वरूप माना जाता है और उन्हें ज्ञान, कला तथा विद्या की देवी के रूप में पूजा जाता है।

इतिहासकारों और विभिन्न पक्षों के बीच भोजशाला और वहां से जुड़ी प्रतिमा को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। कई हिंदू संगठनों और याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि वाग्देवी की प्रतिमा को वापस भारत लाया जाए और इसे उसके मूल स्थान से जोड़ा जाए।

कुछ याचिकाकर्ताओं ने इस प्रतिमा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी तुलना कोहिनूर हीरे से भी की है। उनका कहना है कि यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।

वाग्देवी प्रतिमा की वापसी का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। इससे पहले भी कई भारतीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को विदेशों से वापस लाने के प्रयास किए गए हैं। केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में विदेशों में मौजूद भारतीय कलाकृतियों और पुरावशेषों को वापस लाने के लिए कई पहल की हैं।

संस्कृति मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि ऐसी वस्तुओं की पहचान, दस्तावेजीकरण और वापसी के लिए संबंधित देशों के साथ बातचीत की जाती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों और समझौतों का भी पालन किया जाता है।

भोजशाला का इतिहास काफी पुराना है और यह मध्य प्रदेश की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। यहां देवी वाग्देवी की पूजा और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी मान्यताएं रही हैं। इस कारण प्रतिमा की वापसी की मांग को धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से भी जोड़ा जाता है।

स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों का कहना है कि यदि प्रतिमा वापस आती है तो यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उपलब्धि होगी। उनका मानना है कि इससे भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व और अधिक बढ़ेगा।

हालांकि, प्रतिमा की वापसी की प्रक्रिया आसान नहीं होती। विदेशों में रखी गई ऐतिहासिक वस्तुओं को वापस लाने के लिए कानूनी, कूटनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। संबंधित देश के नियमों और संग्रहालयों की नीतियों को भी ध्यान में रखना होता है।

केंद्र सरकार पहले भी कई प्राचीन मूर्तियों और कलाकृतियों को विदेशों से भारत ला चुकी है। ऐसे मामलों में पुरावशेषों की प्रामाणिकता और उनके मूल स्थान से संबंध की पुष्टि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

वाग्देवी प्रतिमा को लेकर भी सरकार और संबंधित संस्थाएं इसी दिशा में काम कर रही हैं। फिलहाल संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस मामले में प्रयास जारी हैं और आने वाले समय में इस पर आगे की जानकारी सामने आ सकती है।

देवी वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी की मांग केवल एक धार्मिक विषय नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि कूटनीतिक प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्या यह प्राचीन धरोहर फिर से भारत लौट पाती है।

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