रायसेन : मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के मंडीदीप स्थित सिविल अस्पताल में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक संविदा कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर गंभीर कदम उठाने की धमकी देने के बाद खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने तत्काल उसका उपचार शुरू किया। हालत को देखते हुए कर्मचारी को आगे के इलाज के लिए भोपाल रेफर किया गया। कर्मचारी की ओर से दावा किया गया है कि उसे ढाई महीने से अधिक समय से वेतन नहीं मिला था, जिसके चलते वह आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव से गुजर रहा था।
मंडीदीप सिविल अस्पताल में संविदा लैब टेक्नीशियन के पद पर काम करने वाले लक्ष्मी नारायण ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी। बताया गया कि पोस्ट में उसने गंभीर कदम उठाने की धमकी दी थी। सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों में चिंता बढ़ गई। कुछ समय बाद कर्मचारी ने कथित तौर पर खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने उसे संभाला तथा तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई।
कर्मचारी की हालत को देखते हुए उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन में भी हलचल बढ़ गई। कर्मचारी की ओर से मुख्य तौर पर वेतन नहीं मिलने की समस्या को अपनी परेशानी की वजह बताया गया है। उसका आरोप है कि ढाई महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उसे मेहनत का वेतन नहीं मिला था। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
घटना के बाद कर्मचारी को भोपाल ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया। उपचार के दौरान कर्मचारी ने घर जाने की इच्छा जताई। चिकित्सकों ने उसकी स्थिति को देखते हुए आवश्यक लिखित प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार फिलहाल कर्मचारी की हालत ठीक बताई जा रही है।
इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है। बीएमओ डॉ. राजीव गौर के अनुसार, मंडीदीप सिविल अस्पताल में संविदा कर्मचारी की ओर से किया गया यह आचरण विभागीय नियमों के विपरीत माना गया है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से विकासखंड लेखाधिकारी अनिल राजपूत को पत्र जारी किया गया है। कर्मचारी को कर्तव्य में लापरवाही के मामले में नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है।
दूसरी ओर, घटना की पुलिस जांच भी की जा रही है। पुलिस ने कर्मचारी के बयान दर्ज किए हैं, ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों और कर्मचारी की शिकायत से जुड़े तथ्यों को समझा जा सके। अस्पताल प्रभारी डॉ. शलभ तिवारी ने बताया कि कर्मचारी या किसी अन्य कर्मचारी की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई औपचारिक शिकायत नहीं की गई है। विभागीय स्तर पर मामले को देखा जा रहा है और आगे की कार्रवाई संबंधित तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
मामले में एक अन्य पहलू विभाग को बदनाम करने के आरोप से भी जुड़ा बताया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारी की ओर से सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को लेकर भी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, कर्मचारी द्वारा लगाए गए वेतन भुगतान से जुड़े आरोपों की भी अलग से जांच जरूरी होगी। यह स्पष्ट होना बाकी है कि वेतन भुगतान में देरी किन कारणों से हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
पूरे घटनाक्रम ने संविदा कर्मचारियों के वेतन और उनकी कार्य परिस्थितियों से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। संविदा कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं मिलने की स्थिति में उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में विभागीय स्तर पर वेतन संबंधी शिकायतों का समय पर समाधान करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल पुलिस ने कर्मचारी के बयान दर्ज कर लिए हैं और स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कर्मचारी की ओर से लगाए गए वेतन नहीं मिलने के आरोपों और विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई के बीच अब जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन की प्राथमिकता कर्मचारी की स्थिति पर नजर रखने के साथ-साथ घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच करना है।