कूनो में चीता शावक की हत्या की जांच तेज, तीन संदिग्ध हिरासत में; लापरवाही पर 6 वनकर्मी सस्पेंड
भोपाल। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से जुड़े वन क्षेत्र में मादा चीता निर्वा के 19 महीने के शावक KNG22 की गोली मारकर हत्या के मामले में जांच तेज हो गई है। राज्य की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने पूछताछ के लिए तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश वन विभाग ने चीतों की सुरक्षा, निगरानी और ट्रैकिंग में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में छह वनकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इनमें दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षक शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि शावक को किस हथियार से गोली मारी गई और इस वारदात में कौन-कौन शामिल था।
इस घटना ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी उच्चस्तरीय जांच टीम मध्य प्रदेश भेजी है। राज्य की STF और केंद्रीय टीम मिलकर घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, रेडियो कॉलर के आंकड़ों और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था की जांच कर रही हैं।
25 अक्टूबर को घायल मिला था KNG22
जानकारी के अनुसार, मादा चीता निर्वा का 19 महीने का नर शावक KNG22 25 अक्टूबर 2026 को मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र के नितनवास इलाके में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला था। यह स्थान कूनो नेशनल पार्क के मुख्य संरक्षित क्षेत्र से बाहर स्थित क्षेत्रीय वन मंडल के अंतर्गत आता है।
वन विभाग की निगरानी टीम ने शावक को घायल हालत में देखा तो तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। उसे पहले कूनो लाया गया और फिर बेहतर उपचार के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेजा गया।
डॉक्टरों ने जांच के दौरान उसके शरीर में कई बाहरी वस्तुओं की मौजूदगी पाई। एक्स-रे और सीटी स्कैन के बाद पता चला कि उसके शरीर में गोली के छर्रे फंसे हुए थे। आपातकालीन सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पांच गोलियों के छर्रे निकाले। हालांकि, शावक के आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच चुका था। तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई।
तीन संदिग्धों से पूछताछ, हथियार की तलाश जारी
शावक की मौत के बाद गठित STF ने मुरैना और श्योपुर के सीमावर्ती जंगलों में जांच अभियान तेज कर दिया है। जांचकर्ताओं ने आसपास के गांवों और संदिग्ध शिकारियों के ठिकानों पर पूछताछ की है। मामले में करीब 20 लोगों से जानकारी जुटाई गई है।
तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि KNG22 पर गोली किसने चलाई और वारदात के समय उसके साथ कौन-कौन मौजूद था।
जांच में पारंपरिक भरमार बंदूक (Muzzle-loading firearm) के इस्तेमाल की आशंका भी सामने आई है। शावक के शरीर से निकले पांच छर्रों की जांच के आधार पर इस दिशा में पड़ताल की जा रही है। हालांकि, हथियार की बरामदगी और उससे गोली चलाए जाने की पुष्टि अभी बाकी है।
फॉरेंसिक टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर गोलीबारी की परिस्थितियों की जांच करेगी। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाएगा कि शावक को किस स्थान पर गोली मारी गई और घायल होने के बाद वह कितनी दूर तक चला था।
दो रेंजर समेत छह वनकर्मी निलंबित
चीता शावक की सुरक्षा में कथित लापरवाही सामने आने के बाद वन विभाग ने छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित कर्मचारियों में दो रेंजर, एक डिप्टी रेंजर और तीन वनरक्षक शामिल हैं। ये कर्मचारी मुरैना और श्योपुर वन मंडलों में तैनात थे।
विभागीय कार्रवाई के पीछे मुख्य वजह चीतों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक बताई जा रही है। अधिकारियों की जांच में यह सवाल भी उठ रहा है कि रेडियो कॉलर और अन्य निगरानी साधनों के बावजूद शावक की गतिविधियों पर प्रभावी नजर क्यों नहीं रखी जा सकी।
वन विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा के लिए संबंधित कर्मचारियों ने निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया था या नहीं।
निलंबित किए गए छह कर्मचारियों में मुरैना के पहाड़गढ़ क्षेत्र के रेंजर आकाश तोमर, डिप्टी रेंजर कीर्ति कुमार शांडिल्य और वनरक्षक दिनेश मरैया के नाम सामने आए हैं। श्योपुर वन मंडल से भी विजयपुर क्षेत्र के रेंजर झार सिंह गौड़ समेत अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।
केंद्र सरकार ने भी भेजी उच्चस्तरीय जांच टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 28 अक्टूबर को उच्चस्तरीय जांच टीम मध्य प्रदेश भेजने का निर्णय लिया था।
इस टीम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के वन महानिरीक्षक और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
केंद्रीय टीम को घटना की परिस्थितियों की जांच करने, उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण करने और राज्य वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
टीम विशेष रूप से यह जांच करेगी कि चीतों की सुरक्षा के लिए तय किए गए नियमों और निगरानी व्यवस्था को किस तरह लागू किया जा रहा था। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सुधारों की सिफारिश भी की जाएगी।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में दोबारा बसाई गई चीता आबादी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रेडियो कॉलर से खंगाली जा रही शावक की गतिविधियां
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा KNG22 के रेडियो कॉलर से प्राप्त लोकेशन डेटा है। इसके माध्यम से पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शावक 25 अक्टूबर से पहले किन इलाकों में गया था और उसकी गतिविधियां कहां-कहां दर्ज हुई थीं।
जांचकर्ता रेडियो कॉलर के आंकड़ों का मिलान स्थानीय ग्रामीणों के बयान, वन कर्मचारियों की जानकारी और निगरानी दल के रिकॉर्ड से कर रहे हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि शावक को गोली कहां मारी गई थी।
इसके साथ ही आसपास के इलाकों में शिकार की गतिविधियों और हथियार रखने वाले संदिग्ध लोगों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि फॉरेंसिक साक्ष्य और पूछताछ से घटना की पूरी कड़ी सामने आएगी।
प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
भारत में चीतों को दोबारा बसाने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में प्रोजेक्ट चीता शुरू किया गया था। इसके तहत अफ्रीकी देशों से चीतों को लाकर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया। इस परियोजना को भारत के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण पहल माना जाता है।
KNG22 की गोली लगने से हुई मौत ने परियोजना के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खासकर इसलिए क्योंकि शावक संरक्षित क्षेत्र से बाहर क्षेत्रीय वन मंडल में पहुंच गया था।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी है। रेडियो कॉलर से लोकेशन मिलने के बावजूद जमीन पर तैनात कर्मचारियों और निगरानी टीमों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए।
फिलहाल मामले में तीन संदिग्धों से पूछताछ, हथियार की तलाश और छह वनकर्मियों के निलंबन के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। अब सभी की नजर फॉरेंसिक रिपोर्ट और STF की जांच पर टिकी है। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि 19 महीने के KNG22 को किसने गोली मारी और वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।