इंदौर के कुलदीप पंवार का कमाल, उमलिंग ला पर बनाया रिकॉर्ड

Update: 2026-07-31 07:52 GMT

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी 53 वर्षीय नेशनल एथलीट और अनुभवी मोटरसाइकिल राइडर कुलदीप सिंह पंवार ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर देश और शहर का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपनी रॉयल एनफील्ड हिमालयन मोटरसाइकिल से लद्दाख स्थित दुनिया की सबसे ऊंची मोटर चलाने योग्य सड़क उमलिंग ला पास तक सफलतापूर्वक यात्रा पूरी की है।

कुलदीप सिंह पंवार की इस चुनौतीपूर्ण यात्रा को मान्यता देते हुए उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें दुनिया की सबसे ऊंची मोटर चलाने योग्य सड़क पर मोटरसाइकिल चलाने की उपलब्धि के लिए आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।

यह ऐतिहासिक सफर 3 जुलाई से 17 जुलाई 2026 के बीच पूरा किया गया। इस दौरान पंवार ने इंदौर से अपनी यात्रा शुरू की और 2,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों को पार किया।

कुलदीप सिंह पंवार की यात्रा केवल एक बाइक राइड नहीं थी, बल्कि साहस, धैर्य और शारीरिक क्षमता की परीक्षा भी थी। उन्होंने बेहद कठिन मौसम, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण रास्तों का सामना करते हुए उमलिंग ला पास तक पहुंचने का लक्ष्य पूरा किया।

उमलिंग ला पास लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित है और इसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 19,024 फीट है। यह दुनिया की सबसे ऊंची मोटर चलाने योग्य सड़कों में शामिल है। यहां तक पहुंचना किसी भी मोटरसाइकिल राइडर के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

पंवार ने अपनी यात्रा की शुरुआत इंदौर से की। इसके बाद उनका मार्ग जम्मू, श्रीनगर, सोनमर्ग, जोजी ला पास, कारगिल, कारगिल वॉर मेमोरियल, लेह, नुब्रा वैली, खारदुंग ला, पैंगोंग झील, रेजांग ला वॉर मेमोरियल, हानले और उमलिंग ला से होकर गुजरा।

यात्रा के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक और रणनीतिक स्थानों को भी देखा। इनमें 1999 के कारगिल युद्ध की यादों से जुड़ा कारगिल वॉर मेमोरियल और 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़े रेजांग ला वॉर मेमोरियल प्रमुख रहे।

खारदुंग ला पास भी उनकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, जिसकी ऊंचाई लगभग 18,380 फीट है। इसके बाद उन्होंने पैंगोंग झील और हानले होते हुए उमलिंग ला पास तक पहुंच बनाई।

उमलिंग ला तक पहुंचने के बाद उनकी यह यात्रा यहीं समाप्त नहीं हुई। वापसी के दौरान उन्होंने सारचू, अटल टनल, मनाली और दिल्ली होते हुए दोबारा इंदौर तक का सफर पूरा किया।

कुलदीप सिंह पंवार पहले से ही खेल और फिटनेस के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। नेशनल एथलीट के रूप में उन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता और अनुशासन को मजबूत बनाया, जिसका फायदा उन्हें इस कठिन बाइक अभियान में मिला।

उन्होंने इस उपलब्धि के लिए लगातार तैयारी की और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के लिए खुद को तैयार किया। ऐसी यात्राओं में केवल मोटरसाइकिल चलाने का कौशल ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता भी जरूरी होती है।

पंवार की इस उपलब्धि पर इंदौर में खुशी का माहौल है। शहर के लोगों और खेल प्रेमियों ने उनकी सफलता को गौरव का क्षण बताया है। उनका कहना है कि पंवार ने उम्र को केवल एक संख्या साबित करते हुए साहस और जुनून का उदाहरण पेश किया है।

कुलदीप सिंह पंवार की यह उपलब्धि उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो नए लक्ष्य हासिल करने का सपना देखते हैं। उन्होंने साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, तैयारी और मेहनत के बल पर कठिन से कठिन चुनौतियों को भी पूरा किया जा सकता है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद पंवार अब उन चुनिंदा लोगों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़कों में से एक पर अपनी बाइक से सफर पूरा किया है। उनकी यह उपलब्धि इंदौर और पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।

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