इंदौर में IDA स्कीम 171 को लेकर प्लॉट मालिकों का प्रदर्शन

Update: 2026-07-27 04:31 GMT

इंदौर : लंबे समय से लंबित इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) की स्कीम नंबर 171 (पूर्व में स्कीम नंबर 132) को लेकर रविवार को बड़ी संख्या में प्लॉट मालिकों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। स्कीम से जुड़े करीब 6,000 प्लॉट मालिकों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। प्रभावित परिवारों ने IDA को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि जल्द से जल्द योजना को लागू किया जाए, अन्यथा बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

रविवार को पुष्प विहार कॉलोनी में आयोजित विरोध प्रदर्शन में 13 कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के सदस्य और 200 से अधिक जमीन मालिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने IDA और मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि लंबे समय से आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक योजना को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

प्लॉट मालिकों का आरोप है कि IDA के निर्देशों के अनुसार उन्होंने आवश्यक राशि जमा कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद योजना को लागू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, उन्होंने करीब 5.84 करोड़ रुपये और लागू GST की राशि जमा की थी। इसके बाद भी लगभग 18 महीने बीत जाने के बाद अब तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।

स्कीम नंबर 171 पुष्प विहार कॉलोनी प्लॉट होल्डर्स ग्रुप के जनरल सेक्रेटरी एन.के. मिश्रा ने कहा कि हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों ने अपने जीवन भर की कमाई प्लॉट खरीदने में लगा दी थी। उनका उद्देश्य अपना घर बनाना था, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण वे वर्षों बाद भी अपने प्लॉट पर निर्माण शुरू नहीं कर पाए हैं।

उन्होंने कहा कि योजना के लागू होने का इंतजार करते-करते कई प्लॉट मालिकों की मृत्यु तक हो चुकी है। वहीं, दूसरी ओर क्षेत्र में अवैध कब्जों की समस्या भी बढ़ती जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समय पर योजना लागू नहीं होने से जमीन की स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है और असली प्लॉट मालिक परेशान हैं।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि IDA और सरकार की ओर से कई बार योजना को जल्द लागू करने का भरोसा दिया गया, लेकिन हर बार प्रक्रिया किसी न किसी कारण से आगे नहीं बढ़ सकी। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और उन्हें ठोस निर्णय चाहिए।

प्लॉट मालिकों का कहना है कि वे लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करते आ रहे हैं। उन्होंने IDA के निर्देशों के अनुसार सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं और आर्थिक भुगतान भी किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपने ही प्लॉट पर घर बनाने का अधिकार नहीं मिल पा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि IDA जल्द से जल्द स्कीम नंबर 171 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करे और प्लॉट मालिकों को निर्माण संबंधी अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। कई परिवार वर्षों से अपने घर का सपना पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासनिक देरी के कारण उन्हें किराये के मकानों में रहना पड़ रहा है और आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों और कब्जों के कारण भविष्य में विवाद बढ़ सकते हैं। उनका कहना है कि यदि योजना जल्द लागू नहीं की गई तो जमीन से जुड़े विवाद और बढ़ने की संभावना है।

वहीं, IDA की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि योजनाओं से जुड़े मामलों में कई तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, जिसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है।

जानकारों के अनुसार, विकास योजनाओं में देरी होने से सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को होती है, जिन्होंने जमीन खरीदने के बाद वर्षों तक इंतजार किया होता है। समय पर अनुमति और अधिसूचना नहीं मिलने से निवेशकों और आम परिवारों दोनों पर असर पड़ता है।

स्कीम नंबर 171 को लेकर अब प्लॉट मालिकों ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन यदि प्रशासन ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

फिलहाल सभी की नजर IDA और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर है। करीब 6,000 प्लॉट मालिकों से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में कोई निर्णय होता है या आंदोलन तेज होता है, यह देखने वाली बात होगी।

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