इंदौर। इंदौर की विशेष POCSO अदालत ने नाबालिग लड़की के यौन शोषण के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 23 वर्षीय आरोपी को 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत दोषी ठहराया और पीड़िता को हुए मानसिक व शारीरिक नुकसान को देखते हुए मुआवजा देने की भी सिफारिश की है।
यह फैसला इंदौर की 21वीं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष POCSO अदालत ने सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी पवन उर्फ भाईयू उर्फ राम मायला पर 16 साल से कम उम्र की नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर एक बगीचे के पास स्थित झोपड़ी में ले जाकर उसका यौन शोषण करने का आरोप था।
अदालत ने आरोपी को POCSO अधिनियम की धारा 3/4(2) के तहत दोषी माना। इसके अलावा आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 87 के तहत भी दोषी ठहराया गया। अदालत ने POCSO प्रावधानों के तहत उसे 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई।
वहीं, BNS की धारा 87 के तहत आरोपी को तीन साल की कठोर कैद और 12,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने अपने फैसले में अपराध की गंभीरता और पीड़िता पर पड़े प्रभाव को ध्यान में रखा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, घटना 29 अक्टूबर 2024 की है। उस दिन नाबालिग लड़की अपने घर से यह कहकर निकली थी कि वह अपनी दादी के घर जा रही है। लेकिन वह उस रात घर वापस नहीं लौटी। अगले दिन सुबह वह घर पहुंची।
इसके बाद लड़की ने अपनी मां को पूरी घटना के बारे में बताया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी पवन, जिसे वह करीब एक साल से जानती थी, उसे अपनी झोपड़ी में लेकर गया था। वहां आरोपी ने उसके साथ यौन अपराध किया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। जांच पूरी होने के बाद मामला अदालत में पहुंचा।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने विभिन्न साक्ष्य और गवाह पेश किए। विशेष लोक अभियोजक ज्योति आर्य ने अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़िता के बयान को महत्वपूर्ण आधार बताया।
अदालत ने सुनवाई के बाद माना कि अपराध गंभीर प्रकृति का है और नाबालिग पीड़िता को शारीरिक एवं मानसिक आघात पहुंचा है। इसी को देखते हुए अदालत ने आरोपी को कड़ी सजा सुनाई।
इसके साथ ही अदालत ने पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता को 6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की सिफारिश की है। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में पीड़ित को न्याय के साथ-साथ पुनर्वास और सहायता की भी जरूरत होती है।
POCSO कानून के तहत नाबालिग बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को गंभीर अपराध माना जाता है। इस कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालतों द्वारा ऐसे मामलों में सख्त फैसले देने का उद्देश्य अपराधियों में कानून का डर पैदा करना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है। साथ ही यह समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करता है।
इंदौर की इस विशेष अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर यह संदेश गया है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराधों को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस और न्याय व्यवस्था ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई कर रही है ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
फिलहाल अदालत के फैसले के बाद आरोपी को सजा भुगतने के लिए भेज दिया गया है। वहीं पीड़िता को मुआवजा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।