इंदौर में बड़े कचरा उत्पादकों के गीले कचरे का होगा वैज्ञानिक निपटान, नगर निगम ने मांगा EOI
इंदौर। स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाला इंदौर अब गीले कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इंदौर नगर निगम (IMC) ने शहर में बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों (Bulk Waste Generators-BWG) से निकलने वाले गीले कचरे की प्रोसेसिंग के लिए योग्य संस्थानों और एजेंसियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित किए हैं।
नगर निगम का उद्देश्य बड़े कचरा उत्पादकों से निकलने वाले जैविक कचरे के निपटारे के लिए एक व्यवस्थित और प्रभावी प्रणाली तैयार करना है। इसके तहत ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनसे गीले कचरे का उपयोग खाद, बायोगैस, बायो-सीएनजी और अन्य उपयोगी उत्पादों में किया जा सके।
नगर आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि यह पहल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 को प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों से निकलने वाले गीले कचरे के लिए उचित प्रोसेसिंग सिस्टम विकसित करना जरूरी है, ताकि कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोका जा सके और उसका बेहतर उपयोग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन करने से पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। साथ ही इससे शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
अतिरिक्त नगर आयुक्त प्रखर सिंह के अनुसार, नगर निगम द्वारा एजेंसियों को दो अलग-अलग श्रेणियों में सूचीबद्ध किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी संस्थाओं को जोड़ना है, जिनके पास गीले कचरे के प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक और पर्याप्त अनुभव उपलब्ध हो।
पहली श्रेणी में गीले कचरे की प्रोसेसिंग के लिए उपकरण और सिस्टम तैयार करने वाले निर्माता तथा तकनीकी सेवा प्रदाता आवेदन कर सकते हैं। इसमें विभिन्न प्रकार की आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है।
इन तकनीकों में ऑर्गेनिक वेस्ट कंपोस्टर (OWC), कम्पोस्टिंग सिस्टम, इन-वेसल कम्पोस्टिंग, बायोगैस प्लांट, बायोमेथेनेशन, बायो-CNG और कॉम्पैक्ट, मॉड्यूलर तथा कंटेनर आधारित सिस्टम शामिल हैं।
नगर निगम का कहना है कि इन तकनीकों के माध्यम से बड़े कचरा उत्पादकों जैसे होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्पिटल, संस्थान, हाउसिंग सोसाइटी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गीले कचरे का स्थानीय स्तर पर ही निपटारा किया जा सकेगा।
इस पहल से कचरे के परिवहन पर होने वाला खर्च कम होगा और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। गीले कचरे से तैयार होने वाली खाद का उपयोग खेती और बागवानी में किया जा सकता है, जबकि बायोगैस और बायो-CNG जैसी तकनीकें ऊर्जा उत्पादन में मदद कर सकती हैं।
इंदौर नगर निगम लंबे समय से कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में कई नए प्रयोग करता रहा है। शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में कई बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया जा चुका है। अब निगम का ध्यान कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और संसाधनों के पुन: उपयोग पर है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि BWG के लिए कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। बड़े कचरा उत्पादकों को अपने स्तर पर गीले कचरे का निपटारा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें बेहतर तकनीक और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
EOI प्रक्रिया के जरिए निगम ऐसी एजेंसियों का चयन करेगा, जो गुणवत्ता वाले उपकरण उपलब्ध करा सकें और तकनीकी सहायता प्रदान कर सकें। सूचीबद्ध एजेंसियां भविष्य में शहर में गीले कचरे के प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं में भाग ले सकेंगी।
नगर निगम की इस पहल को इंदौर के सतत और पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल कचरे की समस्या कम होगी, बल्कि कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में भी मदद मिलेगी।