उमरिया : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन विभाग की टीम ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण अभियान चलाकर एक बाघिन के खराब हो चुके रेडियो कॉलर को सफलतापूर्वक हटा दिया। धामोकर बफर क्षेत्र के बरबासपुर बीट में बाघिन को ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) कर उसका रेडियो कॉलर हटाया गया। इसके बाद उसकी स्वास्थ्य जांच की गई और पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद उसे सुरक्षित रूप से वापस जंगल में छोड़ दिया गया।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघिन का रेडियो कॉलर पिछले कई दिनों से काम नहीं कर रहा था। इसके कारण उसकी गतिविधियों, लोकेशन और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी प्राप्त नहीं हो पा रही थी। वन्यजीव संरक्षण और निगरानी के लिहाज से यह स्थिति चिंता का विषय थी, जिसके बाद रेडियो कॉलर हटाने का निर्णय लिया गया।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सूत्रों ने बताया कि बाघिन का रेडियो कॉलर हटाने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समिता राजोरा से अनुमति ली गई थी। मंजूरी मिलने के बाद वन विभाग ने विशेष अभियान की योजना बनाई और बाघिन की तलाश शुरू की गई।

भारी बारिश और चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद वन विभाग की टीम ने करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान में वन विभाग के 63 अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। बाघिन को सुरक्षित तरीके से खोजने और रेस्क्यू करने के लिए चार प्रशिक्षित हाथियों—लक्ष्मण, सूर्य, राम और श्याम—की भी मदद ली गई।

अभियान के दौरान टीम ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। बाघिन की गतिविधियों का पता लगाने के लिए कैमरा ट्रैप और अन्य निगरानी उपकरणों की सहायता ली गई। वन अधिकारियों ने बेहद सावधानी के साथ पूरे क्षेत्र की निगरानी की ताकि बाघिन को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

कई घंटों की मेहनत के बाद आखिरकार टीम को बाघिन का पता लगाने में सफलता मिली। इसके बाद विशेषज्ञों की मौजूदगी में उसे ट्रैंक्विलाइज किया गया। बेहोश करने के बाद वन्यजीव चिकित्सकों ने उसकी जांच की और उसके शरीर से खराब रेडियो कॉलर को सुरक्षित तरीके से हटा दिया।

रेस्क्यू प्रक्रिया के दौरान वन विभाग की टीम ने बाघिन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। रेडियो कॉलर हटाने के बाद उसके स्वास्थ्य की विस्तृत जांच की गई। जांच में बाघिन पूरी तरह स्वस्थ पाई गई और उसमें किसी तरह की गंभीर समस्या नहीं मिली।

स्वास्थ्य परीक्षण पूरा होने के बाद बाघिन को दोबारा उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि उसे जंगल में सुरक्षित तरीके से वापस भेज दिया गया है और अब उसकी गतिविधियों पर सामान्य निगरानी रखी जाएगी।

रेडियो कॉलर वन्यजीवों की निगरानी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके माध्यम से वन विभाग को बाघों की आवाजाही, क्षेत्र विस्तार, व्यवहार और संरक्षण से जुड़ी जानकारी मिलती है। हालांकि, लंबे समय तक कॉलर खराब रहने की स्थिति में उसे हटाना जरूरी हो जाता है ताकि जानवर को किसी तरह की परेशानी न हो।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में बाघ पाए जाते हैं और उनकी सुरक्षा एवं निगरानी के लिए वन विभाग लगातार काम करता है। बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

वन अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अभियान में सावधानी, समय और विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी वन्यजीव को ट्रैंक्विलाइज करने की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है और इसमें प्रशिक्षित टीम की जरूरत होती है।

इस सफल अभियान के बाद वन विभाग ने राहत की सांस ली है। खराब रेडियो कॉलर के कारण जिस बाघिन की निगरानी में परेशानी आ रही थी, अब वह सुरक्षित रूप से अपने प्राकृतिक वातावरण में लौट चुकी है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के लिए चल रहे प्रयासों के बीच यह अभियान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त मेहनत से बाघिन को सुरक्षित बचाया गया और उसे बिना किसी नुकसान के वापस जंगल में छोड़ दिया गया।

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