ग्वालियर। मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में ग्वालियर-आगरा सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना का निर्माण कार्य अब रफ्तार पकड़ने लगा है। मुरैना और धौलपुर जिलों में किसानों का विरोध शांत होने के बाद 4,613 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम तेज किया जा रहा है। करीब 88.4 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे का सबसे खास हिस्सा चंबल नदी पर बनने वाला हैंगिंग ब्रिज होगा। मुरैना जिले के बसैया गांव के पास इस पुल का निर्माण कार्य भी जोर-शोर से शुरू करा दिया गया है।
इस परियोजना से ग्वालियर और आगरा के बीच आवागमन को बेहतर बनाने की उम्मीद है। वहीं, चंबल नदी पर बनने वाला पुल इंजीनियरिंग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नदी के किनारे पिलर बनाने के लिए की गई पाइल टेस्टिंग में शुरुआती योजना के अनुरूप सफलता नहीं मिलने के बाद पुल के डिजाइन में बदलाव किया गया है।
4,613 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा एक्सप्रेस-वे
ग्वालियर-आगरा सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 88.4 किलोमीटर बताई गई है। इस परियोजना पर करीब 4,613 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सिक्सलेन सड़क तैयार होने से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण आमतौर पर नए निर्धारित मार्ग पर किया जाता है, जिससे मौजूदा सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने और लंबी दूरी की यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने का अवसर मिलता है। इस तरह की परियोजनाओं में सड़क के साथ पुल, अंडरपास, निकास मार्ग और अन्य जरूरी ढांचागत सुविधाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।
ग्वालियर-आगरा मार्ग पर बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने से यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन करने वाले वाहनों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यात्रा के समय में कितनी कमी आएगी, इसका आकलन एक्सप्रेस-वे के अंतिम स्वरूप, प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा यातायात व्यवस्था की जानकारी के आधार पर ही किया जा सकेगा।
चंबल नदी पर बनेगा परियोजना का सबसे खास पुल
इस एक्सप्रेस-वे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा चंबल नदी पर प्रस्तावित हैंगिंग ब्रिज है। मुरैना जिले के बसैया गांव के पास इस पुल का निर्माण शुरू कराया गया है। नदी के ऊपर पुल बनाने की चुनौती सामान्य सड़क निर्माण से अलग होती है, क्योंकि इसमें नदी की गहराई, मिट्टी की स्थिति, पानी के बहाव और नींव की मजबूती जैसे पहलुओं का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
शुरुआती योजना में हैंगिंग ब्रिज की लंबाई 600 मीटर निर्धारित की गई थी। लेकिन नदी के किनारे पिलर बनाने के लिए की गई पाइल टेस्टिंग सफल नहीं होने के बाद डिजाइन में बदलाव किया गया है। इससे स्पष्ट है कि निर्माण कार्य के दौरान जमीन की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार तकनीकी योजना में संशोधन करना पड़ा।
पुल की अंतिम लंबाई, संशोधित डिजाइन और निर्माण की नई समयसीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसके तकनीकी स्वरूप का पूरा आकलन किया जा सकेगा।
पाइल टेस्टिंग फेल होने के बाद बदला गया डिजाइन
किसी बड़े पुल के निर्माण में पाइल फाउंडेशन का विशेष महत्व होता है। इसमें जमीन के भीतर गहराई तक मजबूत नींव तैयार की जाती है, ताकि पुल का भार सुरक्षित रूप से जमीन तक पहुंच सके। पाइल टेस्टिंग के माध्यम से यह जांच की जाती है कि प्रस्तावित नींव निर्धारित भार और तकनीकी मानकों को सहन कर पाएगी या नहीं।
चंबल नदी के किनारे पिलर के लिए की गई पाइल टेस्टिंग फेल होने के बाद शुरुआती डिजाइन में बदलाव करना पड़ा। नदी के आसपास जमीन की प्रकृति और नींव की क्षमता जैसे पहलू पुल की संरचना को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में इंजीनियरों को परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन में संशोधन करना पड़ता है।
इस तरह के बदलाव निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जाते हैं। पुल की मजबूती और लंबे समय तक टिकाऊपन के लिए जरूरी है कि नींव से जुड़े सभी तकनीकी परीक्षण निर्धारित मानकों के अनुरूप हों।
किसानों के विरोध के बाद निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार
परियोजना के निर्माण में मुरैना और धौलपुर जिलों में किसानों का विरोध भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। अब विरोध शांत होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की बात कही जा रही है। बड़ी सड़क परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण, मुआवजे और स्थानीय लोगों की मांगों से जुड़े मुद्दे कई बार काम की गति को प्रभावित करते हैं।
ऐसे में निर्माण कार्य आगे बढ़ने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय किसानों और प्रभावित परिवारों से जुड़े मुद्दों का समाधान नियमानुसार किया जाए। परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रशासन, निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की जरूरत होगी।
क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को मिल सकती है मदद
ग्वालियर-आगरा सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे पूरा होने पर क्षेत्र में सड़क परिवहन की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ व्यापारिक गतिविधियों और माल ढुलाई को भी लाभ हो सकता है। इससे आसपास के क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
चंबल नदी पर बनने वाला हैंगिंग ब्रिज इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नदी के ऊपर सुरक्षित और मजबूत पुल तैयार होने से एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा सुचारु रूप से जुड़ सकेगा। हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ निर्माण पूरा होने, सड़क को यातायात के लिए खोलने और संबंधित सुविधाओं के चालू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल, किसानों का विरोध शांत होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी और चंबल नदी पर पुल का काम शुरू होना परियोजना के लिहाज से अहम घटनाक्रम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि संशोधित डिजाइन के अनुसार पुल का निर्माण कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और पूरी परियोजना निर्धारित समयसीमा में कब तक तैयार होती है।
Tags: