मिड-डे मील की गुणवत्ता जांचेगा प्रशासन, हर माह 10 स्कूलों से लिए जाएंगे भोजन के सैंपल
उत्तरप्रदेश : परिषदीय स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील यानी पीएम पोषण योजना के भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। अब हर विकासखंड के 10 स्कूलों से हर महीने पके हुए भोजन के सैंपल लिए जाएंगे और उनकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाएगी। इस जांच के जरिए भोजन में किसी भी तरह की मिलावट, जीवाणु संक्रमण और बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया जाएगा।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भोजन की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखने की व्यवस्था की जा रही है।
जिला बेसिक शिक्षाधिकारी (BSA) आशीष कुमार पांडेय ने इस संबंध में सहायक खाद्य आयुक्त को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है। पत्र में उन्होंने पीएम पोषण योजना के तहत स्कूलों में तैयार होने वाले भोजन की नियमित जांच कराने की बात कही है।
नई व्यवस्था के अनुसार, जिले के प्रत्येक विकासखंड से हर महीने कम से कम 10 परिषदीय विद्यालयों का चयन किया जाएगा। चयनित स्कूलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम पहुंचेगी और वहां बच्चों को परोसे जा रहे पके-पकाए भोजन के नमूने एकत्र करेगी।
इसके बाद इन नमूनों को प्रयोगशाला में भेजा जाएगा, जहां भोजन की गुणवत्ता की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाएगी। जांच में यह देखा जाएगा कि भोजन में किसी प्रकार की मिलावट तो नहीं है, साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि उसमें हानिकारक बैक्टीरिया या जीवाणु संक्रमण मौजूद तो नहीं हैं।
अधिकारियों के अनुसार, भोजन की जांच केवल गुणवत्ता तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उसकी सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी स्कूल में भोजन की गुणवत्ता खराब पाई जाती है या स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करने वाले तत्व मिलते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पीएम पोषण योजना के तहत परिषदीय स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
प्रशासन का मानना है कि बच्चों को मिलने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए, क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। इसी को देखते हुए अब भोजन की जांच व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम को नमूना लेने के दौरान निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। भोजन तैयार होने के बाद सही तरीके से सैंपल लिया जाएगा और उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में भोजन बनाने और परोसने की प्रक्रिया की भी निगरानी की जाएगी। रसोईघर की साफ-सफाई, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और भोजन तैयार करने के तरीकों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
अभिभावकों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विषय है। नियमित जांच होने से भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी और बच्चों को सुरक्षित भोजन मिल सकेगा।
अधिकारियों ने कहा कि पीएम पोषण योजना के सफल संचालन के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। खाद्य विभाग और शिक्षा विभाग मिलकर इस व्यवस्था को प्रभावी बनाएंगे।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर महीने स्कूलों से भोजन के नमूने लेकर जांच की जाएगी। इससे जहां भोजन की गुणवत्ता में सुधार आएगा, वहीं लापरवाही करने वालों पर भी निगरानी बढ़ेगी।
प्रशासन का लक्ष्य है कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए भोजन की नियमित जांच और निगरानी व्यवस्था को आगे भी जारी रखा जाएगा।