आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर पहुंचे CM फडणवीस, पत्नी के साथ विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में की महापूजा

Update: 2026-07-25 08:37 GMT

पंढरपुर : आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को अपनी पत्नी के साथ पंढरपुर स्थित प्रसिद्ध विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पारंपरिक महापूजा की। यह पूजा भगवान विट्ठल के करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ी वार्षिक 'वारी' तीर्थयात्रा के समापन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने मंदिर में विधि-विधान के साथ भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की पूजा-अर्चना की और प्रदेश व देश की खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने भगवान विट्ठल से प्रार्थना की है कि देश के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों को और मजबूती मिले।

वारी यात्रा के समापन पर हुई महापूजा

महाराष्ट्र की प्रसिद्ध पंढरपुर वारी यात्रा में हर साल लाखों वारकरी (भगवान विट्ठल के भक्त) पैदल यात्रा कर पंढरपुर पहुंचते हैं। आषाढ़ी एकादशी के दिन भगवान विट्ठल के दर्शन और विशेष पूजा के साथ इस धार्मिक यात्रा का प्रमुख चरण पूरा होता है।

परंपरा के अनुसार, आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री या अन्य प्रमुख व्यक्ति भगवान विट्ठल की महापूजा में शामिल होते हैं। इस वर्ष मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह धार्मिक परंपरा निभाई।

मंदिर परिसर में पूजा के दौरान धार्मिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया।

देश और युवाओं के लिए की प्रार्थना

पूजा के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भगवान विट्ठल से उन्होंने देश की प्रगति और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की है।

उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को आगे बढ़ने के लिए अधिक से अधिक अवसर मिलें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों को और गति मिले, यही उनकी कामना है।

मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र सहित पूरे देश के लोगों के सुख, शांति और समृद्धि की भी प्रार्थना की।

पंढरपुर में उमड़ा भक्तों का सैलाब

आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर पंढरपुर में लाखों श्रद्धालु पहुंचे। चंद्रभागा नदी के तट पर भक्तों ने स्नान किया और भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे।

वारकरी परंपरा महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा है। श्रद्धालु संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम सहित अन्य संतों की पालकियों के साथ कई दिनों की पैदल यात्रा कर पंढरपुर पहुंचते हैं।

इस दौरान पूरे शहर में भक्ति और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं के किए गए विशेष इंतजाम

आषाढ़ी एकादशी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। मंदिर परिसर, प्रमुख मार्गों और श्रद्धालुओं के ठहरने वाले स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।

भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी विशेष तैयारी की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

धार्मिक परंपरा के साथ जुड़ा राजनीतिक संदेश

मुख्यमंत्री फडणवीस की महापूजा धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर राज्य के प्रमुख नेताओं का पंढरपुर पहुंचना महाराष्ट्र की लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।

भगवान विट्ठल के प्रति आस्था रखने वाले वारकरी समुदाय के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।

भक्तों ने लिया विट्ठल दर्शन का लाभ

पूरे महाराष्ट्र और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे भक्तों ने आषाढ़ी एकादशी पर भगवान विट्ठल के दर्शन किए। मंदिर परिसर में दिनभर भजन, कीर्तन और धार्मिक गतिविधियों का आयोजन होता रहा।

आस्था और भक्ति से भरे इस माहौल में लाखों वारकरियों ने भगवान विट्ठल से अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा की गई महापूजा ने पंढरपुर की धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य तथा देश की प्रगति का संदेश दिया।

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