भिवंडी हादसे के बाद फडणवीस सख्त, जर्जर इमारतें खाली कराने के आदेश

Update: 2026-08-01 09:41 GMT

मुंबई/भिवंडी: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में असुरक्षित और जर्जर इमारतों में रह रहे लोगों को तत्काल बाहर निकालने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया है कि लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए खतरनाक इमारतों को खाली कराया जाए। जरूरत पड़ने पर प्रशासन को बल प्रयोग करने की अनुमति भी दी गई है।

मुख्यमंत्री का यह निर्देश भिवंडी में हुई इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद आया है। गुरुवार देर रात हुई इस घटना में करीब 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद राज्य सरकार ने खतरनाक इमारतों को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

भिवंडी में चार मंजिला इमारत का हिस्सा गिरा

जानकारी के अनुसार, भिवंडी के बालाजी नगर इलाके के गंगारामवाड़ी क्षेत्र में स्थित कोहिनूर अपार्टमेंट का एक हिस्सा गुरुवार रात करीब 11:30 बजे अचानक ढह गया। यह चार मंजिला इमारत थी, जिसका एक हिस्सा गिरने से कई लोग मलबे में दब गए।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। रातभर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए बचावकर्मियों ने काफी मेहनत की।

हादसे में कई लोगों को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए अभियान चलाया गया।

C1 श्रेणी में शामिल थी इमारत

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, कोहिनूर अपार्टमेंट को पहले ही C1 श्रेणी की खतरनाक इमारत घोषित किया गया था। C1 श्रेणी का मतलब ऐसी इमारतों से है, जिन्हें रहने के लिए बेहद असुरक्षित माना जाता है और जिन्हें तत्काल खाली कराने की जरूरत होती है।

इसके बावजूद लोग इस इमारत में रह रहे थे। हादसे के बाद प्रशासन की भूमिका और खतरनाक घोषित इमारतों को खाली कराने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसी सभी इमारतों की पहचान कर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग की अनुमति

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि लोगों की जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग खतरनाक इमारतों को खाली करने से इनकार करते हैं तो प्रशासन कानून के तहत आवश्यक कदम उठा सकता है।

अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डालकर असुरक्षित इमारतों में रहने को मजबूर न हो।

प्रशासन का मानना है कि कई बार लोग वैकल्पिक व्यवस्था की कमी या अन्य कारणों से जर्जर इमारतें खाली नहीं करते। ऐसे मामलों में समझाइश के साथ-साथ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पड़ सकती है।

राज्यभर में खतरनाक इमारतों की जांच

भिवंडी हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार ने राज्यभर में खतरनाक इमारतों की स्थिति की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं। स्थानीय निकायों को निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे अपने क्षेत्रों में ऐसी इमारतों की पहचान करें और समय पर कार्रवाई करें।

मुंबई, ठाणे, भिवंडी और अन्य शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुरानी और कमजोर इमारतें मौजूद हैं। मानसून के दौरान इन इमारतों के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी इमारतों की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और जरूरत पड़ने पर पुनर्विकास जैसी प्रक्रियाओं को तेज करने की जरूरत है।

सुरक्षा को लेकर सरकार का सख्त रुख

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि खतरनाक इमारतों के मामले में केवल नोटिस जारी करने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

भिवंडी हादसे ने एक बार फिर जर्जर इमारतों से जुड़े खतरे को सामने ला दिया है। अब सरकार का ध्यान ऐसी इमारतों को चिन्हित कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और साथ ही उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए। सरकार और स्थानीय निकायों की ओर से इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल भिवंडी हादसे की जांच जारी है और अधिकारियों से घटना के कारणों तथा जिम्मेदारी तय करने को लेकर रिपोर्ट मांगी जा सकती है। इस बीच मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद राज्य में असुरक्षित इमारतों के खिलाफ अभियान तेज होने की संभावना है।

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