IIM बेंगलुरु ने मराठवाड़ा के रेल माल परिवहन का किया अध्ययन

Update: 2026-07-10 08:46 GMT

Maharashtra महाराष्ट्र: मराठवाड़ा में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक निवेश और निर्यात क्षमता को देखते हुए क्षेत्र के रेल माल परिवहन (रेल फ्रेट) ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। इसी क्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) बेंगलुरु के एक प्रतिनिधिमंडल ने चैंबर ऑफ मराठवाड़ा इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर (CMIA) का दौरा कर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की वर्तमान और भविष्य की माल परिवहन आवश्यकताओं, रेलवे ढांचे की स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों का आकलन करना था।

यह अध्ययन भारतीय रेलवे के लिए भविष्य का रेल फ्रेट डेवलपमेंट रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। रेलवे बोर्ड के लिए तैयार की जा रही इस रिपोर्ट में देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की आवश्यकताओं का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि माल परिवहन प्रणाली को अधिक आधुनिक, तेज और किफायती बनाया जा सके।

AURIC को गति शक्ति कार्गो टर्मिनल योजना में शामिल करने की मांग

बैठक के दौरान CMIA ने जोर देकर कहा कि औरंगाबाद इंडस्ट्रियल सिटी (AURIC) को गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (GCT) परियोजना में शामिल किया जाना चाहिए। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना था कि AURIC तेजी से विकसित हो रहा औद्योगिक केंद्र है और यहां लगातार नए निवेश आ रहे हैं। ऐसे में यदि इसे आधुनिक रेल माल परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।

CMIA के अनुसार, बेहतर रेल संपर्क से माल ढुलाई की लागत कम होगी, परिवहन में लगने वाला समय घटेगा और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उत्पादों की पहुंच आसान होगी।

रेलवे बोर्ड के लिए तैयार हो रहा अध्ययन

IIM बेंगलुरु का यह दौरा रेलवे बोर्ड के लिए तैयार की जा रही व्यापक अध्ययन रिपोर्ट का हिस्सा था। प्रतिनिधिमंडल ने उद्योगपतियों के साथ बैठक कर यह समझने का प्रयास किया कि वर्तमान रेलवे नेटवर्क उद्योगों की जरूरतों को किस हद तक पूरा कर पा रहा है और भविष्य में किन सुधारों की आवश्यकता होगी।

बैठक में रेल माल परिवहन क्षमता, कंटेनर लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक क्लस्टरों की कनेक्टिविटी और निर्यात केंद्रित बुनियादी ढांचे पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने उद्योग जगत से लिया फीडबैक

प्रतिनिधिमंडल में दक्षिण मध्य रेलवे के राजीव त्रिपाठी, IIM बेंगलुरु के प्रोफेसर जी. रघुराम, कृष्ण मोहन और रविशंकर शामिल थे। उन्होंने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से विभिन्न मुद्दों पर सुझाव लिए।

विशेषज्ञों ने माल ढुलाई में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, रेलवे यार्ड की क्षमता, कंटेनर टर्मिनलों की उपलब्धता और भविष्य में संभावित औद्योगिक विस्तार पर भी जानकारी जुटाई।

मराठवाड़ा बन रहा निवेश का बड़ा केंद्र

CMIA ने बैठक में बताया कि मराठवाड़ा क्षेत्र तेजी से देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल हो रहा है। यहां टोयोटा, JSW, एथर एनर्जी, पिरामल और ह्योसंग जैसी कई बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं।

उद्योग संगठन के अनुसार, क्षेत्र में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का औद्योगिक निवेश आकर्षित हो चुका है और आने वाले वर्षों में इसमें और तेजी आने की संभावना है।

अगले 7-8 वर्षों में उत्पादन दोगुना होने की उम्मीद

CMIA का अनुमान है कि अगले सात से आठ वर्षों में मराठवाड़ा का विनिर्माण उत्पादन और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय निर्यात लगभग दोगुना हो सकता है। ऐसी स्थिति में मौजूदा रेल माल परिवहन व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

इसी कारण उद्योग संगठन ने समय रहते रेल फ्रेट इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने और आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बेहतर लॉजिस्टिक्स से घटेगी लागत

उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि रेल माल परिवहन प्रणाली को मजबूत किया जाता है तो उद्योगों की परिवहन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। सड़क परिवहन की तुलना में रेल माल ढुलाई अधिक किफायती और पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है।

बेहतर रेल कनेक्टिविटी से निर्यातकों को समय पर माल भेजने में सुविधा होगी, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

गति शक्ति योजना से मिल सकता है बड़ा लाभ

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि AURIC को गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल परियोजना से जोड़ा जाता है, तो उद्योगों को सड़क, रेल और अन्य परिवहन माध्यमों का एकीकृत नेटवर्क उपलब्ध होगा। इससे माल ढुलाई अधिक तेज, सुरक्षित और कम लागत वाली हो सकेगी।

भविष्य की रणनीति पर होगा निर्णय

IIM बेंगलुरु द्वारा तैयार की जा रही अध्ययन रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में रेल माल परिवहन नेटवर्क के विस्तार, नए कार्गो टर्मिनलों के विकास और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने संबंधी नीतिगत निर्णय लिए जा सकते हैं।

उद्योग जगत को उम्मीद है कि यदि उनकी मांगों को योजना में शामिल किया गया, तो मराठवाड़ा देश के सबसे प्रमुख औद्योगिक और निर्यात केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा। इससे न केवल क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता को भी नई मजबूती मिलेगी।

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