मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मध्य रेलवे की लोकल ट्रेन सेवाएं सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को बुरी तरह प्रभावित हुईं। कांजुरमार्ग रेलवे स्टेशन के पास सिग्नलिंग सिस्टम के रिले रूम में आग लगने और मुलुंड-ठाणे के बीच ओवरहेड बिजली उपकरणों में खराबी आने से रेल यातायात अस्त-व्यस्त हो गया। दोनों घटनाओं के कारण मध्य रेलवे को कुल 80 लोकल ट्रेन सेवाएं रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई ट्रेनें 60 से 90 मिनट की देरी से चलीं। सुबह कार्यालय और शिक्षण संस्थानों के लिए निकले हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई ट्रेनें रास्ते में ही खड़ी हो गईं, जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इसी बीच रेलवे ट्रैक पर तीन लोगों की मौत की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों में सोमवार की इन घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है।

सिग्नलिंग रूम में आग लगने से ठप हुई व्यवस्था

मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 9 बजकर 33 मिनट पर कांजुरमार्ग रेलवे स्टेशन के पास स्थित सिग्नलिंग रिले रूम में आग लग गई। इस घटना के कारण विक्रोली और भांडुप के बीच छह रेलवे लाइनों के लगभग 24 सिग्नल बंद हो गए।

सिग्नलिंग व्यवस्था प्रभावित होने से ट्रेनों का सामान्य संचालन संभव नहीं रह गया। रेलवे प्रशासन को सुरक्षा के मद्देनजर विशेष परिचालन व्यवस्था लागू करनी पड़ी। इसके कारण ट्रेनों की गति और आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना पड़ा।

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने बताया कि सिग्नलिंग सिस्टम प्रभावित होने के बाद ट्रेनों को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे बढ़ाया गया।

रेलवे ने आग लगने के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच कराने का निर्णय लिया है। शुरुआती स्तर पर विद्युत आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और अत्यधिक गर्मी जैसी संभावनाओं की चर्चा हुई, लेकिन आग के कारण की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।

ओवरहेड तार में खराबी ने बढ़ाई मुसीबत

सिग्नलिंग सिस्टम में आग लगने से कुछ मिनट पहले ही दूसरी तकनीकी समस्या सामने आ चुकी थी।

सोमवार सुबह करीब 9 बजकर 23 मिनट पर मुलुंड और ठाणे रेलवे स्टेशनों के बीच डाउन स्लो लाइन पर ओवरहेड बिजली उपकरणों के पास एक बाहरी तार लटका हुआ पाया गया।

इससे विद्युत उपकरण प्रभावित हुए और रेलवे प्रशासन को बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर मरम्मत कार्य शुरू कराना पड़ा।

सुबह 10 बजे संबंधित हिस्से में पावर ब्लॉक लागू किया गया। तकनीकी कर्मचारियों ने खराबी दूर करने के लिए तत्काल काम शुरू किया। करीब 10 बजकर 48 मिनट पर इस हिस्से को बहाल कर दिया गया।

हालांकि तब तक कई ट्रेनों के संचालन में देरी हो चुकी थी। इसके बाद कांजुरमार्ग में सिग्नलिंग की खराबी के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।

80 लोकल ट्रेनें रद्द, हजारों यात्री परेशान

दोनों तकनीकी समस्याओं का असर मध्य रेलवे की मेन लाइन के साथ हार्बर लाइन पर भी पड़ा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कुल 80 लोकल ट्रेन सेवाएं रद्द की गईं। इनमें मेन लाइन की 60 और हार्बर लाइन की 20 सेवाएं शामिल थीं।

मुंबई में रोजाना लाखों लोग कार्यालय, कारोबार और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने के लिए लोकल ट्रेनों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में व्यस्त समय में ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने से कई रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई।

ठाणे, मुलुंड, घाटकोपर, कल्याण और आसपास के प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों को काफी समय तक ट्रेनों का इंतजार करना पड़ा।

कई यात्रियों ने ऑटो रिक्शा, बस और मेट्रो जैसे वैकल्पिक साधनों का सहारा लिया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई।

लंबी दूरी की ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान पर भी इस तकनीकी खराबी का असर पड़ा।

ट्रेनों से उतरकर पटरियों पर चलने लगे यात्री

रेल परिचालन बाधित होने के कारण कुछ लोकल ट्रेनें स्टेशनों के बीच ही लंबे समय तक खड़ी रहीं।

लगातार इंतजार से परेशान कुछ यात्री ट्रेनों से उतरकर रेलवे पटरियों के सहारे पैदल चलते दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी सामने आए, जिनमें यात्री रेल ट्रैक पर चलते नजर आए।

रेलवे ट्रैक पर पैदल चलना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि पास की दूसरी लाइनों पर ट्रेनों का संचालन जारी रह सकता है।

इस घटना ने आपात परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षित निकासी और समय पर सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

ट्रेनों में फंसे यात्रियों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने से परेशानी और बढ़ने की शिकायतें भी सामने आईं।

भांडुप स्टेशन पर ट्रेन की चपेट में आया युवक

रेलवे सेवाओं में बाधा के बीच सोमवार शाम भांडुप रेलवे स्टेशन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ।

पुलिस के अनुसार, मुलुंड निवासी 21 वर्षीय साहिल थिटे रेलवे ट्रैक पार करते समय लोकल ट्रेन की चपेट में आ गया।

बताया गया कि साहिल प्लेटफॉर्म नंबर चार पर ट्रेन से उतरा था और दूसरी लोकल पकड़ने के लिए दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर जा रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रेन ने उसे टक्कर मार दी।

घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

कुर्ला राजकीय रेलवे पुलिस ने इस घटना में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से हादसे की परिस्थितियों का पता लगा रही है।

हालांकि युवक के रेलवे ट्रैक पार करने की वास्तविक वजह की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

रेलवे ट्रैक पर दो अन्य शव मिलने से हड़कंप

भांडुप में युवक की मौत के अलावा सोमवार रात घाटकोपर और विक्रोली रेलवे स्टेशनों के बीच पटरियों पर दो अन्य लोगों के शव मिले।

जानकारी के अनुसार, रात करीब साढ़े नौ बजे ट्रेन चालकों ने रेलवे ट्रैक पर शव पड़े होने की सूचना दी।

इसके बाद रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई की। दोनों शवों को राजावाड़ी अस्पताल भेजा गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मृतकों की पहचान और उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच जारी थी।

पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन दोनों मौतों का संबंध लोकल ट्रेन सेवाओं में आई तकनीकी खराबी से था या नहीं। ऐसे में तीनों मौतों को एक ही घटना का परिणाम नहीं माना जा सकता।

रात 7:35 बजे तक बहाल हुए सभी सिग्नल

मध्य रेलवे की तकनीकी टीम ने सिग्नलिंग व्यवस्था को ठीक करने के लिए दिनभर काम किया।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, शाम 4 बजकर 10 मिनट पर डाउन थ्रू लाइन और 4 बजकर 45 मिनट पर अप थ्रू लाइन की ट्रैक सर्किट व्यवस्था बहाल की गई।

इसके बाद शाम 5 बजकर 30 मिनट पर डाउन लोकल सिग्नल और 6 बजकर 18 मिनट पर अप स्लो लाइन के सिग्नल को ठीक किया गया।

रात करीब 7 बजकर 35 मिनट तक सभी प्रभावित सिग्नल बहाल कर दिए गए थे। हालांकि ट्रेनों की देरी का असर देर रात तक बना रहा।

मध्य रेलवे ने सिग्नलिंग रूम में लगी आग की जांच कराने और तकनीकी खराबियों के कारणों का पता लगाने का निर्णय लिया है।

रेल सुरक्षा और रखरखाव पर उठे सवाल

मुंबई की लोकल ट्रेन सेवा महानगर की जीवनरेखा मानी जाती है। ऐसे में एक ही सुबह दो तकनीकी समस्याओं के कारण बड़े पैमाने पर परिचालन प्रभावित होने से रखरखाव और आपात प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

यात्रियों और रेल यात्री संगठनों ने तकनीकी व्यवस्था की नियमित जांच, आपातकालीन सूचना प्रणाली तथा ट्रेनों में फंसे यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहतर इंतजाम की आवश्यकता जताई है।

सोमवार की घटनाओं ने स्पष्ट किया कि रेलवे की तकनीकी व्यवस्था में खराबी आने पर इसका असर केवल ट्रेनों की समय-सारिणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हजारों यात्रियों की दिनचर्या और सुरक्षा भी प्रभावित होती है।

अब रेलवे प्रशासन की जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि सिग्नलिंग रूम में आग किन कारणों से लगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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